बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। नालंदा जिले में मतदाता सूची से 1,38,505 वोटरों के नाम गायब होने की खबर ने स्थानीय राजनीति और आम जनता में हलचल मचा दी है। जिला निर्वाचन पदाधिकारी (डीईओ) कुंदन कुमार की अध्यक्षता में आयोजित विशेष गहन पुनरीक्षण 2025 की बैठक में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ। क्या यह तकनीकी त्रुटि है या इसके पीछे कोई गहरी साजिश? यह सवाल नालंदा के हर गली-नुक्कड़ पर चर्चा का विषय बन चुका है।
बैठक में सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। जिसमें आम आदमी पार्टी (आप), भाजपा, जद (यू), आरजेडी और कांग्रेस जैसे दलों के नेता शामिल थे। डीईओ ने प्रारूप मतदाता सूची की हार्ड और सॉफ्ट कॉपी साझा की। साथ ही उन 1.38 लाख मतदाताओं की सूची भी प्रस्तुत की, जिनके नाम सूची से हटा दिए गए हैं।
डीईओ ने बताया कि मृतक मतदाताओं, डुप्लीकेट एंट्री, स्थानांतरित मतदाताओं और दस्तावेजी त्रुटियों के कारण यह कदम उठाया गया। लेकिन क्या यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी थी? क्या स्थानीय लोग इस बदलाव से सहमत हैं?
नालंदा जिले के सात विधानसभा क्षेत्रों में कुल 2391 बूथ हैं। आंकड़ों के अनुसार प्रत्येक बूथ से औसतन 50-60 वोटरों के नाम हटाए जाने की संभावना है। सबसे अधिक प्रभाव राजगीर विधानसभा क्षेत्र में देखा गया, जहां 7.05% मतदाताओं के नाम सूची से गायब हैं। जबकि नालंदा विधानसभा में यह आंकड़ा 3.57% है। यह असमानता क्यों? क्या इसका कोई विशेष कारण है या यह केवल संयोग है?
स्थानीय लोगों में इस खबर को लेकर बेचैनी है। बिहारशरीफ के निवासी राजकिशोर कुशवाहा ने कहा कि मैंने हर चुनाव में वोट दिया, लेकिन अब मेरा नाम सूची में नहीं है। यह कैसे हो सकता है? क्या हमारा वोट देने का अधिकार छीना जा रहा है? कई अन्य मतदाताओं ने भी ऐसी ही शिकायतें दर्ज की हैं।
राजनीतिक दलों ने भी इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। एक प्रमुख विपक्षी दल के नेता ने कहा कि यह बदलाव आगामी विधानसभा चुनाव को प्रभावित करने की साजिश हो सकती है। हम चुनाव आयोग से इसकी गहन जांच की मांग करेंगे।
वहीं सत्ताधारी दल के एक प्रतिनिधि ने इसे सामान्य शुद्धिकरण प्रक्रिया का हिस्सा बताया और कहा कि यह पारदर्शी तरीके से किया गया है। क्या यह वास्तव में एक निष्पक्ष प्रक्रिया है या इसके पीछे कोई और मंशा है?
डीईओ कुंदन कुमार ने बताया कि छूटे हुए मतदाता 15 अगस्त तक फॉर्म-6 जमा कर अपने नाम सूची में शामिल कर सकते हैं। इसके लिए विशेष शिविरों का आयोजन किया जाएगा, जहां मतदाता अपने दस्तावेज जमा कर त्रुटियों को सुधार सकते हैं।
मतदाताओं से अपील की गई है कि वे अपने नजदीकी बूथ स्तर अधिकारी (बीएलओ) या सहायक निर्वाचन अधिकारी से संपर्क करें। इसके अलावा चुनाव आयोग की वेबसाइट पर भी मतदाता सूची में अपना नाम जांचने की सुविधा उपलब्ध है।
लेकिन क्या ये शिविर पर्याप्त होंगे? क्या 15 अगस्त की समय सीमा सभी प्रभावित मतदाताओं के लिए व्यावहारिक है? और सबसे महत्वपूर्ण कि क्या यह प्रक्रिया नालंदा के मतदाताओं का भरोसा बहाल कर पाएगी?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मतदाता सूची में इतने बड़े पैमाने पर बदलाव का असर आगामी विधानसभा चुनाव पर पड़ सकता है। नालंदा हमेशा से बिहार की राजनीति में एक महत्वपूर्ण क्षेत्र रहा है। ऐसे में यह बदलाव विभिन्न दलों की रणनीतियों को प्रभावित कर सकता है। कुछ दलों ने इस मुद्दे पर चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण मांगने की बात कही है, जबकि अन्य ने इसे एक सामान्य प्रक्रिया करार दिया है।
क्या यह बदलाव नालंदा की राजनीतिक तस्वीर को बदल देगा? क्या मतदाताओं का भरोसा लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर बना रहेगा या यह एक नया विवाद खड़ा करेगा? इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में स्पष्ट होंगे।
यदि आप नालंदा के मतदाता हैं तो तुरंत अपनी मतदाता सूची में नाम जांच लें। इसके लिए आप निम्नलिखित कदम उठा सकते हैं। चुनाव आयोग की वेबसाइट www.eci.gov.in पर जाएं और अपनी जानकारी सत्यापित करें। अपने नजदीकी बूथ स्तर अधिकारी (बीएलओ) से संपर्क करें। विशेष शिविरों में भाग लें और फॉर्म-6 जमा करें।
