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आस्था, इतिहास और लोकविश्वास का अद्भुत त्रिवेणी सूर्य नगरी औंगारीधाम में उमड़ा जन सैलाब

नालंदा दर्पण डेस्क/मुकेश भारतीय। बिहार के प्राचीन सांस्कृतिक और धार्मिक भूगोल में कई ऐसे तीर्थ स्थल हैं, जिनकी महिमा सदियों से लोकमानस में रची-बसी है। इन्हीं में से एक है नालंदा जिले के एकंगरसराय प्रखंड के अंतर्गत स्थित सूर्य नगरी औंगारीधाम। यह ऐतिहासिक सूर्य मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि पौराणिक कथाओं, लोकविश्वास और सांस्कृतिक परंपराओं का भी एक महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है।Surya Nagari Nalanda

हर वर्ष चैती और कार्तिक मास में यहां हजारों श्रद्धालु सूर्योपासना और छठ व्रत के लिए पहुंचते हैं। विशेष रूप से छठ पर्व के अवसर पर यहां का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो उठता है और देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालुओं का विशाल जनसमूह उमड़ पड़ता है।

भगवान अंगारक से औंगारीधाम तक का सफरः स्थानीय परंपराओं के अनुसार इस मंदिर का प्राचीन नाम भगवान अंगारक का मंदिर था। समय के साथ इसका नाम बदलते-बदलते औंगारीधाम हो गया। आज यह स्थान सूर्य आराधना के प्रमुख तीर्थों में गिना जाता है।

मंदिर में स्थापित सूर्य देव की प्रतिमा अत्यंत आकर्षक और दिव्य मानी जाती है। श्रद्धालुओं का कहना है कि भगवान सूर्य के दर्शन करते ही ऐसा प्रतीत होता है मानो उनके भीतर से दिव्य प्रकाश प्रस्फुटित हो रहा हो।

सूर्य भगवान की प्रतिमा के समीप उनके सहचर देव के रूप में भगवान विष्णु की अद्भुत प्रतिमा भी स्थापित है। इसके अतिरिक्त मंदिर परिसर में ब्रह्मा, गणेश, शिव, पार्वती, दुर्गा और सरस्वती सहित कई देवी-देवताओं की प्रतिमाएं भी विराजमान हैं, जो इस स्थल की धार्मिक विविधता और समृद्धि को दर्शाती हैं।

द्वापर युग से जुड़ी पौराणिक कथाः औंगारीधाम के इतिहास को लेकर एक अत्यंत रोचक पौराणिक कथा भी प्रचलित है। कहा जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण के पौत्र साम्ब रूप और सौंदर्य में अपने दादा श्रीकृष्ण के समान थे।

एक बार साम्ब भूलवश उन गोपियों के बीच पहुंच गए जो श्रीकृष्ण की प्रतीक्षा कर रही थीं। गोपियों ने उन्हें श्रीकृष्ण समझकर उनके साथ क्रीड़ा करनी शुरू कर दी। हालांकि साम्ब ने उन्हें समझाने की कोशिश की, लेकिन गोपियां नहीं मानीं।

यह दृश्य देखकर श्रीकृष्ण क्रोधित हो उठे और उन्होंने साम्ब को श्राप दे दिया कि उनका दिव्य सौंदर्य नष्ट हो जाएगा और उन्हें कुष्ठ रोग हो जाएगा। श्राप के प्रभाव से साम्ब वास्तव में कुष्ठ रोग से पीड़ित हो गए।

उपाय जानने के लिए उन्होंने नारद से मार्गदर्शन मांगा। नारद के सुझाव पर साम्ब ने पुनः श्रीकृष्ण से प्रार्थना की। तब श्रीकृष्ण ने उन्हें आदेश दिया कि वे पूरे भारत में बारह सूर्य मंदिरों की स्थापना कर उनकी पूजा-अर्चना करें। ऐसा करने पर ही उन्हें रोग से मुक्ति और पुनः सौंदर्य की प्राप्ति होगी। लोकविश्वास के अनुसार इन्हीं बारह सूर्य स्थलों में से एक औंगारीधाम सूर्य मंदिर भी है।

रोग मुक्ति और मनोकामना पूर्ति का विश्वासः औंगारीधाम में स्थित प्राचीन सूर्य कुंड और तालाब को लेकर भी गहरी आस्था है। श्रद्धालुओं का मानना है कि इस कुंड में स्नान करने और इसका जल ग्रहण करने से अनेक प्रकार की बीमारियों से मुक्ति मिलती है।

मंदिर में पूजा करने वाले भक्तों का विश्वास है कि यहां आराधना से स्वास्थ्य, संतान सुख, समृद्धि और मानसिक शांति प्राप्त होती है। यही कारण है कि दूर-दराज से लोग यहां आकर सूर्य भगवान की आराधना करते हैं।

भौगोलिक स्थिति और स्थानीय महत्वः सूर्य नगरी औंगारीधाम, नालंदा जिला के एकंगरसराय बाजार से लगभग 6 किलोमीटर पूर्व-दक्षिण दिशा में स्थित है। मंदिर परिसर के आसपास कई महत्वपूर्ण संस्थान भी मौजूद हैं, जिनमें पुरानी धर्मशाला, शैक्षणिक संस्थान और प्रशासनिक भवन शामिल हैं।

तालाब के दक्षिण दिशा में लाल सिंह त्यागी महाविद्यालय, एक मध्य विद्यालय, दक्षिण मध्य बिहार ग्रामीण बैंक और पंचायत भवन स्थित हैं। मंदिर के समीप ही औंगारी थाना भी है, जिससे यहां आने वाले श्रद्धालुओं को सुरक्षा की सुविधा मिलती है।

मंदिर के विकास में स्थानीय संस्थाओं की भूमिकाः औंगारीधाम के संरक्षण और विकास में स्थानीय संस्थाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। औंगारीधाम ट्रस्ट के माध्यम से तालाब घाटों की सफाई, सुलभ शौचालय, पेयजल व्यवस्था और सीढ़ियों की मरम्मत जैसे कार्य कराए जा रहे हैं। ट्रस्ट के अध्यक्ष रामभूषण दयाल और उपाध्यक्ष बी.एन. यादव इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

इसी तरह सूर्यमठ विकास सेवा समिति भी मंदिर के विकास में लगातार योगदान दे रही है। समिति के अध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार पाण्डेय तथा सचिव सह मंदिर के प्रधान पुजारी गंगाधर पाण्डेय के नेतृत्व में मंदिर परिसर में मंडप, ओसरा, प्रकाश व्यवस्था और माइक सिस्टम जैसी सुविधाओं का निर्माण कराया गया है। मंदिर के मंडप निर्माण में स्थानीय समाजसेवी महेन्द्र प्रसाद का सहयोग भी उल्लेखनीय माना जाता है।

आस्था और पर्यटन की संभावनाः इतिहास, पौराणिकता और लोकविश्वास से जुड़ा औंगारीधाम न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि पर्यटन की दृष्टि से भी अत्यंत संभावनाशील स्थल है। यदि यहां बेहतर आधारभूत सुविधाएं, पर्यटन मार्गदर्शन और प्रचार-प्रसार की व्यवस्था हो, तो यह स्थान बिहार के प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्रों में शामिल हो सकता है।

सदियों से सूर्य उपासना की परंपरा को जीवित रखे यह पवित्र स्थल आज भी लोगों के विश्वास और आस्था का केंद्र बना हुआ है। औंगारीधाम की यही विशेषता इसे नालंदा जिले की धार्मिक पहचान के रूप में स्थापित करती है।

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