Home कतरीसराय भारतीय डाक सेवा के जरिए ठगी का बड़ा खेल, देश-विदेश तक फैला...

भारतीय डाक सेवा के जरिए ठगी का बड़ा खेल, देश-विदेश तक फैला जाल

Big fraud game through Indian Postal Service, network spread across India and abroad
Big fraud game through Indian Postal Service, network spread across India and abroad

कतरीसराय (नालंदा दर्पण)। नालंदा जिले के कतरीसराय थाना क्षेत्र से आयुर्वैदिक दवाओं के नाम पर देश-विदेश में लोगों को ठगा जा रहा है। इस धंधे में भारतीय डाक सेवा का उपयोग कर ठगों ने अपना जाल इतनी चतुराई से फैलाया है कि न केवल स्थानीय लोग, बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों और विदेशों में रहने वाले लोग भी इसका शिकार हो रहे हैं।

पुलिस सूत्रों के अनुसार कतरीसराय और आसपास के इलाकों से संचालित इस गिरोह ने आयुर्वैदिक दवाओं के नाम पर लोगों को लुभाने के लिए डाक और डिजिटल माध्यमों का सहारा लिया है। ठग पहले फर्जी विज्ञापनों के जरिए लोगों को आकर्षित करते हैं, जिसमें चमत्कारी आयुर्वैदिक दवाओं का दावा किया जाता है। ये विज्ञापन सोशल मीडिया, फर्जी वेबसाइट्स और यहां तक कि स्थानीय समाचार पत्रों में भी प्रकाशित किए जाते हैं।

लोगों को लुभाने के लिए दवाओं को कई गंभीर बीमारियों जैसे मधुमेह, जोड़ों का दर्द, बांझपन और यहां तक कि कैंसर के इलाज के लिए रामबाण बताया जाता है। ऑर्डर देने के बाद ग्राहकों को डाक के माध्यम से सस्ते और नकली उत्पाद भेजे जाते हैं, जो न केवल बेकार होते हैं, बल्कि कई मामलों में स्वास्थ्य के लिए हानिकारक भी साबित हुए हैं।

जांच में पता चला है कि ठग डाकघरों का उपयोग कर फर्जी पते और नामों से पार्सल भेजते हैं। डाक सेवा की विश्वसनीयता का फायदा उठाकर ये ठग लोगों का भरोसा जीत लेते हैं।

कई पीड़ितों ने बताया कि उन्हें डाक से प्राप्त पैकेट में नकली दवाएं, साधारण चूर्ण या यहां तक कि खाली डिब्बे मिले। कुछ मामलों में, ठगों ने ग्राहकों से ऑनलाइन भुगतान करवाने के बाद कोई सामान ही नहीं भेजा।

पुलिस सूत्रों के अनुसार इस गिरोह का नेटवर्क केवल भारत तक सीमित नहीं है। यह गिरोह विदेशों में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों को भी निशाना बना रहा है। खासकर अमेरिका, कनाडा और खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासी भारतीयों को फर्जी आयुर्वैदिक उत्पादों के नाम पर ठगा जा रहा है। इसके लिए ठगों ने फर्जी कॉल सेंटर स्थापित किए हैं, जहां से वे विदेशी ग्राहकों को फोन और ईमेल के जरिए संपर्क करते हैं।

कतरीसराय पुलिस ने इस मामले में कई शिकायतों के बाद जांच शुरू की है। पुलिस ने कई बार संदिग्धों को हिरासत में लिया है और उनके पास से फर्जी दवाओं के पैकेट, डाक रसीदें और डिजिटल उपकरण जब्त किए हैं। हालांकि पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस नेटवर्क की जटिलता है। ठग बार-बार अपने ठिकाने और फोन नंबर बदलते रहते हैं, जिससे उनकी गिरफ्तारी मुश्किल हो रही है।

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे बिना जांच-पड़ताल के किसी भी आयुर्वैदिक दवा या उत्पाद को न खरीदें। खासकर उन उत्पादों से सावधान रहें, जिनके लिए आपको डाक या ऑनलाइन भुगतान करने को कहा जाए। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि आयुर्वैदिक दवाएं केवल प्रमाणित और विश्वसनीय विक्रेताओं से ही खरीदी जाएं।

एक भुक्तभोगी राकेश प्रसाद ने बताया, “मैंने एक विज्ञापन में देखा कि एक आयुर्वैदिक दवा जोड़ों के दर्द को पूरी तरह ठीक कर सकती है। मैंने 5000 रुपये का ऑर्डर दिया, लेकिन मुझे जो पैकेट मिला, उसमें साधारण हल्दी पाउडर था।”

वहीं, एक अन्य पीड़ित अनीता देवी ने कहा, “मुझे डाक से एक अंड-संड भरा खाली डिब्बा मिला। जब मैंने शिकायत करने की कोशिश की तो उनका फोन नंबर बंद था।”

इस मामले ने नालंदा जिले में डाक सेवाओं और स्थानीय प्रशासन की सतर्कता पर भी सवाल उठाए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि डाकघरों में पार्सल की जांच प्रक्रिया को और सख्त करने की जरूरत है। साथ ही लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाए जाने चाहिए ताकि वे इस तरह की ठगी का शिकार न हों।

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

error: Content is protected !!
Exit mobile version