Home प्रशासन नालंदा शिक्षा विभाग में क्लीन एडमिनिस्ट्रेशन ड्राइव लागू, प्रशासन में भारी फेरबदल

नालंदा शिक्षा विभाग में क्लीन एडमिनिस्ट्रेशन ड्राइव लागू, प्रशासन में भारी फेरबदल

Clean administration drive implemented in Nalanda education department, major reshuffle in administration
Clean administration drive implemented in Nalanda education department, major reshuffle in administration

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। नालंदा शिक्षा विभाग ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त कर दिया है। इस निर्णय के साथ ही विभाग ने प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए कर्मियों के बीच संभागों का पुनर्बंटवारा किया है।

जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) ने इस ‘क्लीन एडमिनिस्ट्रेशन ड्राइव’ को लागू करने के लिए सभी संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। इस पहल का उद्देश्य शिक्षकों को केवल शिक्षण कार्यों पर केंद्रित करना और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सुचारू बनाना है।

पिछले कुछ समय से जिला शिक्षा विभाग में शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों, जैसे- प्रशासनिक कागजी कार्रवाई और अन्य गैर-शिक्षण गतिविधियों में उलझाए जाने की शिकायतें सामने आ रही थीं। इससे शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा था, जिसका सीधा असर विद्यार्थियों की शिक्षा पर पड़ रहा था। डीईओ द्वारा जारी इस आदेश का लक्ष्य शिक्षकों को उनके मूल कार्य शिक्षण पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर देना है।

सवाल यह उठता है कि क्या यह कदम वास्तव में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाएगा? क्या प्रशासनिक फेरबदल से विभाग में पहले से चली आ रही लापरवाही और संदिग्ध गतिविधियों पर अंकुश लगेगा? नालंदा के शिक्षा क्षेत्र के लिए यह एक महत्वपूर्ण मोड़ हो सकता है, बशर्ते इसकी निगरानी और कार्यान्वयन प्रभावी ढंग से हो।

डीईओ ने कर्मियों के बीच कार्यों का नए सिरे से बंटबारा किया है। जिन कर्मियों पर पहले लापरवाही या संदिग्ध गतिविधियों के आरोप थे, उन्हें नए संभागों में स्थानांतरित किया गया है। यह कदम विभाग में जवाबदेही बढ़ाने और कार्य प्रणाली को पारदर्शी बनाने की दिशा में उठाया गया है। निम्नलिखित कर्मियों को नए दायित्व सौंपे गए हैं-

जावेद हसन मंसूरी (डीईओ सेल): मदरसा से संबंधित सभी कार्य, तारांकित प्रश्न, किशोर न्याय परिषद।

सौरभ कुमार (प्रधान लिपिक): माध्यमिक शाखा।

फणी मोहन (स्थापना): न्यायालय से संबंधित कार्य, राज्य व जिला अपीलीय प्राधिकार से संबंधित कार्य।

सूर्य भूषण कुमार (स्थापना): ई-शिक्षा कोष, विभागीय कार्रवाई।

विनोद कुमार-1 (स्थापना): उच्च प्राधिकार के रिपोर्ट से संबंधित कार्य, जिला जनता दरबार।

विनोद कुमार-2 (स्थापना): सेवा शिकायत, जिला लोक शिकायत निवारण, और जनता दरबार से संबंधित कार्य।

पुरुषोत्तम कुमार (स्थापना): सभी प्रकार के स्थानांतरण से संबंधित कार्य।

अमित कुमार (स्थापना): बीपीएससी से नियुक्त शिक्षकों की नियुक्ति।

अली रजा (परीक्षा शाखा): अल्पसंख्यक विद्यालय से संबंधित सभी कार्य।

रामनरेश प्रसाद: माध्यमिक शाखा।

ओम प्रकाश सिन्हा: योजना लेखा।

बहरहाल, यह कदम नालंदा के शिक्षा विभाग में एक नई शुरुआत का संकेत देता है। शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त करने से वे कक्षा में अधिक समय दे सकेंगे, जिससे विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षण का लाभ मिल सकता है। साथ ही प्रशासनिक कार्यों के पुनर्बंटवारे से कार्यों की जवाबदेही सुनिश्चित होगी।

हालांकि इस पहल की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि इसका कार्यान्वयन कितनी सख्ती और पारदर्शिता के साथ किया जाता है।  स्थानीय शिक्षक संघों ने इस कदम का स्वागत किया है, लेकिन कुछ शिक्षकों का मानना है कि बिना उचित निगरानी के यह बदलाव केवल कागजी हो सकता है।

इस ‘क्लीन एडमिनिस्ट्रेशन ड्राइव’ के सामने सबसे बड़ी चुनौती है इसकी निरंतरता। प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता लाने के लिए न केवल नियमित निगरानी की जरूरत है, बल्कि कर्मियों और अधिकारियों के बीच समन्वय भी आवश्यक है। इसके अलावा स्थानांतरित कर्मियों के प्रदर्शन पर नजर रखना और उनकी जवाबदेही सुनिश्चित करना भी एक चुनौती होगी।

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