Home स्वास्थ्य CS के औचक निरीक्षण से हड़कंप, गायब 18 डॉक्टर-कर्मियों का वेतन बंद

CS के औचक निरीक्षण से हड़कंप, गायब 18 डॉक्टर-कर्मियों का वेतन बंद

CS's surprise inspection causes panic; salaries of 18 absent doctors and staff suspended.

नालंदा दर्पण डेस्क। ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था को दुरुस्त करने के सरकारी दावे एक बार फिर कागजों तक ही सिमटते नजर आए। अस्पतालों में संसाधन होने के बावजूद डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की लापरवाही मरीजों की परेशानी बढ़ा रही है। चेतावनी और पूर्व की कार्रवाइयों के बाद भी अनुमंडलीय अस्पताल से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक बिना सूचना ड्यूटी से गायब रहने की प्रवृत्ति थमने का नाम नहीं ले रही है।

इसी कड़ी में जिले के नए सिविल सर्जन (सीएस) डॉ. जय प्रकाश सिंह ने कार्यभार संभालते ही स्वास्थ्य केंद्रों का औचक निरीक्षण शुरू कर दिया। निरीक्षण के दौरान राजगीर अनुमंडलीय अस्पताल समेत सिलाव, गिरियक और कतरीसराय के स्वास्थ्य केंद्रों की जांच की गई। नतीजा चौंकाने वाला रहा। चारों केंद्रों में कुल 18 डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मी बिना सूचना के ड्यूटी से अनुपस्थित पाए गए।

सीएस के निरीक्षण में सामने आया कि कई केंद्रों पर आधे से अधिक चिकित्सक और कर्मचारी ड्यूटी से गायब थे। इस गंभीर लापरवाही को देखते हुए सभी दोषियों से स्पष्टीकरण तलब किया गया है और अगले आदेश तक एक दिन के वेतन भुगतान पर रोक लगा दी गई है। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि भविष्य में ऐसी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

निरीक्षण में यह भी सामने आया कि सिर्फ डॉक्टर ही नहीं, बल्कि एएनएम, बीसीएम और डेटा ऑपरेटर तक अपनी जिम्मेदारी से गायब थे। कुल 18 अनुपस्थित कर्मियों में 8 डॉक्टर शामिल हैं।

सिलाव पीएचसी में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी फील्ड में बताए गए, जबकि ओपीडी में केवल दो डॉक्टर मौजूद थे। यहां डॉ. चंदन कुमार, डॉ. तपेश्वर रजक, बीसीएम पूनम कुमारी, एएनएम संध्या कुमारी, डेटा ऑपरेटर संध्या कुमारी, ममता लक्ष्मिनिया देवी और कांती कुमारी अनुपस्थित मिलीं।

राजगीर अनुमंडलीय अस्पताल में प्रभारी उपाधीक्षक प्रशिक्षण के लिए एनएमसीएच गए हुए थे। ओपीडी में तीन डॉक्टर मौजूद मिले, लेकिन चार डॉक्टर ज्योति प्रकाश, रविरंजन कुमार, आशुतोष कुमार और अभिलाषा कुमारी के साथ बीसीएम संगीता कुमारी और एएनएमआर पूनम कुमारी ड्यूटी से गायब पाई गईं। अधिकारियों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कदम उठाए जाते तो यह स्थिति पैदा नहीं होती।

गिरियक पीएचसी में डॉ. प्रशांत सिंह, पीएमडब्ल्यू रंजीत कुमार पांडेय और स्वास्थ्य प्रबंधक राजीव रंजन अनुपस्थित मिले। वहीं कतरीसराय में डॉ. दीपक कुमार, अंकिता केशरी और एएनएम सरिता कुमारी ड्यूटी पर नहीं थीं। गिरियक में एक्स-रे मशीन खराब पाई गई, जिसे जल्द दुरुस्त कराने का निर्देश दिया गया है।

सीएस ने बताया कि निरीक्षण के दौरान किसी भी स्वास्थ्य केंद्र में ड्यूटी रोस्टर और दवा उपलब्धता की सूची डिस्प्ले नहीं की गई थी, जो गंभीर प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है। हालांकि सफाई व्यवस्था संतोषजनक मिली और सुरक्षा गार्ड तैनात थे। सभी प्रभारियों को तत्काल रोस्टर और दवा सूची सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित कराने के निर्देश दिए गए हैं।

स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि चिकित्सकों और कर्मियों की लापरवाही का सीधा असर मरीजों और महत्वपूर्ण योजनाओं पर पड़ रहा है। परिवार नियोजन जैसे कार्यक्रम भी प्रभावित हो रहे हैं, जिससे सरकार की मंशा पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

सीएस डॉ. जय प्रकाश सिंह ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। उनका कहना है कि ड्यूटी से गायब रहना किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है और जरूरत पड़ी तो और भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। औचक निरीक्षण के बाद स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मचा हुआ है और उम्मीद की जा रही है कि इससे व्यवस्था में सुधार आएगा।

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