Home नालंदा सात महीने बाद भी ठंडे बस्ते में नगर परिषद राजगीर का यह...

सात महीने बाद भी ठंडे बस्ते में नगर परिषद राजगीर का यह ऐतिहासिक प्रस्ताव

Even after seven months, this historic proposal of the Rajgir Municipal Council remains in limbo.

राजगीर (नालंदा दर्पण)। नगर परिषद राजगीर की सामान्य बोर्ड बैठक में सर्वसम्मति से पारित प्रस्तावों के अमल में हो रही देरी को लेकर अब जनप्रतिनिधियों का धैर्य जवाब देने लगा है। खासकर राजगीर का नाम बदलकर उसके ऐतिहासिक नाम ‘राजगृह’ किए जाने संबंधी प्रस्ताव पर सात महीने बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से वार्ड पार्षदों में गहरी नाराजगी देखी जा रही है।

वार्ड पार्षदों का कहना है कि नगर परिषद की बैठकों में जब व्यापक विचार-विमर्श के बाद सर्वसम्मति से निर्णय लिए जाते हैं और उन पर समयबद्ध अमल नहीं होता तो यह न सिर्फ लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करता है, बल्कि नगर के विकास कार्यों की गति को भी बाधित करता है। 28 अप्रैल 2025 को हुई सामान्य बोर्ड बैठक में राजगीर का नाम बदलकर ‘राजगृह’ करने का प्रस्ताव ऐतिहासिक सहमति के साथ पारित किया गया था।

पार्षदों का कहना है कि यह प्रस्ताव केवल नाम परिवर्तन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरा ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व जुड़ा हुआ है। प्राचीन काल में यह नगर ‘राजगृह’ के नाम से ही जाना जाता था, जो राजाओं की राजधानी हुआ करता था।

बौद्ध और जैन ग्रंथों में राजगृह का विशेष उल्लेख मिलता है और आज भी देश-विदेश से आने वाले बौद्ध व जैन श्रद्धालु इस शहर को राजगृह के नाम से ही पहचानते हैं। कई जैन मंदिरों और धार्मिक संस्थानों के साइनबोर्ड पर आज भी ‘राजगृह’ नाम अंकित है।

पार्षदों ने यह भी कहना है कि तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी कुमार ओमकेश्वर तथा वर्तमान एसडीओ आशीष नारायण द्वारा भी राजगीर का नाम बदलकर राजगृह किए जाने की सिफारिश की जा चुकी है। उस ऐतिहासिक बैठक में नालंदा के सांसद कौशलेन्द्र कुमार की उपस्थिति ने प्रस्ताव को और मजबूती दी थी।

सांसद ने न केवल प्रस्ताव का समर्थन किया था, बल्कि इसे केंद्र और राज्य सरकार तक पहुंचाने का आश्वासन भी दिया था। उस समय इस निर्णय को वर्षों पुरानी जनभावना की पूर्ति के रूप में देखा गया, जिससे नगरवासियों में खासा उत्साह था।

हालांकि, समय बीतने के साथ अब वही उत्साह निराशा में बदलता दिख रहा है। पार्षदों और आम नागरिकों का कहना है कि यदि नगर परिषद के सर्वसम्मत निर्णय भी लंबित रहेंगे, तो परिषद की बैठकों की उपयोगिता और उसकी भूमिका पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

लोगों का मानना है कि नाम परिवर्तन से न सिर्फ ऐतिहासिक पहचान की पुनर्स्थापना होगी, बल्कि पर्यटन को भी नई दिशा और गति मिलेगी।

वार्ड पार्षदों ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से मांग की है कि इस प्रस्ताव पर शीघ्र निर्णय लेते हुए आवश्यक प्रक्रिया पूरी की जाए, ताकि राजगीर को उसकी प्राचीन और गौरवशाली पहचान ‘राजगृह’ के रूप में पुनः स्थापित किया जा सके।

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Exit mobile version