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Digital Arrest Scam in Nalanda : रिटायर्ड शिक्षक से 6.20 लाख की ठगी, 8 दिन तक रखा वर्चुअल बंधक

Digital Arrest Scam: Retired Teacher Duped of ₹6.20 Lakh in Nalanda, Held Virtually for 8 Days. Cyber fraudsters posed as CBI officers, judge, and police officials to trap elderly victim and force RTGS transfers.

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डिजिटल अरेस्ट का खौफ: रिटायर्ड शिक्षक से 6.20 लाख की ठगी, 8 दिन तक रखा वर्चुअल बंधक

डिजिटल अरेस्ट स्कैम (Digital Arrest Scam )जैसे मामलों में खासकर बुजुर्गों को निशाना बनाया जा रहा है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल के जरिए गिरफ्तारी नहीं करती। ऐसे किसी भी संदिग्ध कॉल या संदेश से सतर्क रहें और तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं…

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। नालंदा जिले में साइबर अपराधियों के नए-नए तरीके लोगों के लिए (Digital Arrest Scam) चिंता का कारण बनते जा रहे हैं। पुलिस की लगातार कार्रवाई के बावजूद ठग तकनीक का सहारा लेकर लोगों को अपने जाल में फंसा रहे हैं। ताजा मामला हरनौत थाना क्षेत्र के मुढारी गांव से सामने आया है, जहां डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर एक रिटायर्ड शिक्षक से 6.20 लाख रुपये की ठगी कर ली गई।

जानकारी के अनुसार पीड़ित कृष्ण कुमार (61 वर्ष) 31 मार्च 2026 की दोपहर करीब 3 बजे अपने मोबाइल पर आए एक कॉल के झांसे में आ गए। कॉल करने वाले ने खुद को जांच एजेंसी का अधिकारी बताते हुए उन्हें कश्मीर के पुलवामा हमले से जुड़ा होने का आरोप लगाया। अचानक लगे गंभीर आरोपों से शिक्षक घबरा गए।

इसके बाद ठगों ने वीडियो कॉल के जरिए खुद को कभी सीबीआई अधिकारी, कभी जज और कभी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी बताकर उन्हें मानसिक रूप से दबाव में लिया। अपराधियों ने यह भी कहा कि उनके बैंक खाते में संदिग्ध लेन-देन हुआ है और जांच के नाम पर खाते का सत्यापन जरूरी है।

ठगों ने लगातार धमकी दी कि यदि उन्होंने सहयोग नहीं किया या मोबाइल बंद किया तो उन्हें तत्काल गिरफ्तार कर लिया जाएगा और गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। डर का माहौल बनाने के लिए व्हाट्सएप पर आरबीआई की मुहर लगा फर्जी नोटिस भी भेजा गया, जिससे पीड़ित और अधिक भयभीत हो गए।

मानसिक दबाव और भय के कारण शिक्षक ने ठगों के निर्देश पर दो किस्तों में आरटीजीएस के माध्यम से कुल 6.20 लाख रुपये उनके बताए खाते में ट्रांसफर कर दिए। हैरानी की बात यह है कि अपराधियों ने उन्हें 31 मार्च से 8 अप्रैल तक डिजिटल अरेस्ट में रखा यानी लगातार वीडियो कॉल और वर्चुअल निगरानी में बांधे रखा। इस दौरान उन्हें लगभग 24 घंटे निगरानी में रखा गया।

आखिरकार 8 अप्रैल को जब उन्हें ठगी का एहसास हुआ तो उन्होंने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई। साइबर डीएसपी रावेन्द्र मणि त्रिपाठी ने बताया कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और मनी ट्रेल के आधार पर अपराधियों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है।

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