इस्लामपुर (नालंदा दर्पण)। पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में वर्ष 2026 में आयोजित भव्य बागवानी महोत्सव ने बिहार में बागवानी क्षेत्र की तेज़ी से बदलती तस्वीर को सामने ला दिया। इस महोत्सव में राज्य और देश के विभिन्न बागवानी संस्थानों, वैज्ञानिकों और किसानों ने हिस्सा लिया तथा अपने नवाचारों और उपलब्धियों का प्रदर्शन किया।
इस्लामपुर प्रखंड स्थित मगही पान अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिक एस. एन. दास ने जानकारी देते हुए बताया कि महोत्सव के दौरान उत्कृष्ट योगदान के लिए कई संस्थानों को सम्मानित किया गया। इनमें बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर (भागलपुर) की सहभागिता विशेष रूप से सराहनीय रही। विश्वविद्यालय द्वारा बागवानी क्षेत्र में किए जा रहे अनुसंधान, नवाचार और किसानों को तकनीकी सहयोग प्रदान करने के प्रभावी प्रयासों को देखते हुए इसे प्रथम पुरस्कार से नवाजा गया।
महोत्सव के दौरान आयोजित सम्मान समारोह में माननीय कृषि मंत्री ने विजेता संस्थानों और प्रतिभागियों को पुरस्कार एवं प्रमाण-पत्र प्रदान किए। इस अवसर पर कृषि वैज्ञानिकों, विभागीय अधिकारियों, प्रगतिशील किसानों और बड़ी संख्या में आम आगंतुकों की उपस्थिति रही, जिससे आयोजन की भव्यता और महत्ता और बढ़ गई।
कार्यक्रम में प्रदर्शित उन्नत खेती तकनीकें, गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री और आधुनिक कृषि उपकरण किसानों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। विशेषज्ञों ने किसानों को नई किस्मों, बेहतर उत्पादन तकनीकों और बाजार से जुड़ाव की जानकारी दी, जिससे उनकी आय बढ़ाने के नए रास्ते खुले।
वैज्ञानिकों का कहना है कि आज बागवानी केवल पारंपरिक खेती तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह रोजगार, कृषि-उद्योग और निर्यात से जुड़कर किसानों की आर्थिक स्थिति को सशक्त बना रही है। कई किसान बागवानी को एक उद्यम के रूप में अपनाकर न केवल आत्मनिर्भर बन रहे हैं, बल्कि समाज के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा स्रोत भी बनते जा रहे हैं।
वास्तव में बागवानी ने जीवन की बगिया को महका दिया है,जहां हर पौधा मेहनत, उम्मीद, आत्मनिर्भरता और समृद्धि की नई कहानी कहता है। यह क्षेत्र आने वाले समय में कृषि को नई दिशा देने के साथ-साथ किसानों के उज्ज्वल भविष्य का मजबूत आधार बनने की ओर अग्रसर है।
स्रोतः इस्लामपुर से नालंदा दर्पण डेस्क के लिए रामकुमार वर्मा की रिपोर्ट