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संस्कृत स्कूलों में 13 शिक्षकों की अवैध बहाली रद्द, जांच में बड़ा खुलासा

Illegal appointment of 13 teachers in Sanskrit schools cancelled, big revelation in investigation

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। नालंदा जिले के संस्कृत स्कूलों में वर्षों से चल रही अवैध शिक्षक नियुक्तियों पर अब शिक्षा विभाग ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। विभागीय जांच में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का खुलासा होने के बाद 13 शिक्षकों की नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से रद्द करने का आदेश जारी किया गया है। इसके साथ ही इस अवैध बहाली में शामिल अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी कार्रवाई की तलवार लटक रही है।

माध्यमिक शिक्षा के विशेष निदेशक ने संस्कृत शिक्षा बोर्ड के सचिव को पत्र जारी कर स्पष्ट निर्देश दिया है कि इन नियुक्तियों को रद्द किया जाए और दोषी व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। जांच में पाया गया कि इसलामपुर और एकंगरसराय प्रखंडों के तीन संस्कृत विद्यालयों वैदिक साहित्य संस्कृत उच्च विद्यालय अतासराय, विश्वबंधु संस्कृत उच्च विद्यालय तेल्हाड़ा और भास्कर संस्कृत प्राथमिक सह मध्य विद्यालय औंगारीधाम में 13 शिक्षकों की बहाली बिना किसी विज्ञापन और रोस्टर के की गई थी।

जांच में यह भी खुलासा हुआ कि इनमें से 10 शिक्षकों को बिना किसी जांच के वेतन का भुगतान किया जा रहा था। इन शिक्षकों और विद्यालयों में श्री महेंद्र संस्कृत प्रा. सह म.वि. मुरौरा (अंकित कुमार सिंह, कल्पना कुमारी) प्रा. सह मा. संस्कृत विद्यालय हिरदन बिगहा (रिंकू कुमारी, मिनिकांत कुमार) ब्रह्मरत्न संस्कृत प्रा. सह मा. विद्यालय सरथा (सौरभ कुमार), नारी ज्ञान भारती बालिका संस्कृत उच्च विद्यालय भारती ग्राम भोभी  (सुमंत कुमार कश्यप, विद्या सागर) प्रा. संस्कृत विद्यालय दरियापुर नगरनौसा (उषा कुमारी) संस्कृत प्रा.वि. यारपुर बलवा (सविता कुमारी) अवध संस्कृत म.वि. राजगीर  (दुर्गेश उपाध्याय) शामिल हैं।

इन सभी शिक्षकों को विभागीय नियमों की अनदेखी करते हुए वेतन भुगतान किया गया, जो अब जांच के दायरे में है।

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए शिक्षा विभाग ने त्रि-स्तरीय जांच समिति का गठन किया था। इस समिति में प्राथमिक शिक्षा के संयुक्त निदेशक अमर कुमार को अध्यक्ष, जबकि माध्यमिक शिक्षा के उप निदेशक संजय कुमार चौधरी और नरेंद्र कुमार को सदस्य बनाया गया। समिति ने तीनों विद्यालयों का दौरा कर बहाली से संबंधित दस्तावेजों की गहन जांच की।

जांच में दस्तावेजों में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा सामने आया। अतासराय विद्यालय में 5 शिक्षकों की बहाली के लिए दर्शाई गई बैठक के दस्तावेजों में सात में से केवल तीन सदस्यों के हस्ताक्षर पाए गए। तेल्हाड़ा विद्यालय में 3 नियुक्तियों के दस्तावेजों में सात में से केवल दो हस्ताक्षर मिले। एक सदस्य के हस्ताक्षर दो अलग-अलग पन्नों पर पाए गए, जो संदेहास्पद है। औंगारीधाम विद्यालय में केवल दो सदस्यों ने दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए थे।

इन गड़बड़ियों से स्पष्ट हो गया कि बहाली प्रक्रिया पूरी तरह से नियमों की अनदेखी कर की गई थी।

बता दें कि यह मामला विधान सभा में भी गूंजा। इसलामपुर के विधायक राकेश कुमार रौशन ने इसलामपुर और एकंगरसराय प्रखंडों के संस्कृत विद्यालयों में फर्जी बहाली के खिलाफ जांच की मांग की थी। उनकी मांग पर शिक्षा विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए जांच समिति का गठन किया। अब जांच रिपोर्ट के आधार पर 13 शिक्षकों की नियुक्तियां रद्द करने का आदेश जारी हो चुका है।

शिक्षा विभाग ने संकेत दिए हैं कि इस मामले में गंभीर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों, जो इस अवैध बहाली में शामिल थे, उनके खिलाफ भी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हो गई है। बिहार संस्कृत माध्यमिक शिक्षक संघ के पूर्व सचिव विद्या सागर ने बताया कि जिले के 13 स्कूलों में कुल 28 शिक्षकों की बहाली हुई थी, जिनमें से 13 की जांच पूरी हो चुकी है। इन नियुक्तियों को रद्द करने का आदेश जारी हो गया है और शेष मामलों की भी जांच जारी है।

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