बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। कैमूर और नालंदा जिले में पुलिस और स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की संयुक्त कार्रवाई में हथियार तस्करी के एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश हुआ है। मोहनिया-दुर्गावती के बीच जीटी रोड पर स्थित समेकित चेकपोस्ट पर कैमूर पुलिस और एसटीएफ ने एक ब्रेजा कार से 3700 कारतूस बरामद किए। इसके साथ ही कार में सवार दो तस्करों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार तस्करों की पहचान उत्तर प्रदेश के शत्रुघ्न और बिहार के नालंदा जिले के अभिजीत के रूप में हुई है।
कैमूर पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि उत्तर प्रदेश से बिहार के रास्ते जीटी रोड पर बड़ी मात्रा में कारतूस की तस्करी होने वाली है। इस सूचना के आधार पर कैमूर पुलिस और एसटीएफ ने यूपी-बिहार सीमा पर स्थित समेकित चेकपोस्ट पर वाहनों की गहन तलाशी शुरू की। इस दौरान एक ब्रेजा कार की तलाशी में कार की बॉडी में विशेष रूप से बनाए गए गुप्त स्थान से 3700 कारतूस बरामद किए गए। ये कारतूस 32 और 315 बोर के थे।
गिरफ्तार तस्करों से पूछताछ में पता चला कि यह कारतूस की खेप उत्तर प्रदेश के कानपुर से बिहार के नालंदा जिले लाई जा रही थी। इस जानकारी के आधार पर कैमूर पुलिस ने नालंदा पुलिस को अलर्ट किया। नालंदा में जिला पुलिस और एसटीएफ ने त्वरित कार्रवाई करते हुए छापेमारी की, जिसमें 745 और कारतूस बरामद हुए। इनमें 700 कारतूस 9 एमएम और 45 कारतूस एसएलआर के थे। इस तरह दोनों जगहों से बरामद कारतूसों की कुल संख्या 4445 पहुंच गई।
कैमूर के पुलिस अधीक्षक (एसपी) हरिमोहन शुक्ला ने बताया कि गिरफ्तार तस्कर शत्रुघ्न ने पूछताछ में कहा कि मुझे नहीं पता कि ये कारतूस कहां से आते हैं। कानपुर में एक अंकल ने इन्हें पहुंचाने का काम सौंपा था। इसके लिए मुझे हर खेप पर 5000 रुपये मिलते थे। एसपी ने बताया कि पुलिस और एसटीएफ इस गिरोह के अन्य सदस्यों का पता लगाने के लिए गहन जांच कर रही है।
नालंदा जिले में गिरफ्तार तस्करों की निशानदेही पर पुलिस और एसटीएफ की छापेमारी अभी भी जारी है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन कारतूसों को बिहार में किन-किन जगहों पर सप्लाई किया जाना था और इस तस्करी के पीछे कौन-कौन शामिल हैं। एसपी शुक्ला ने बताया कि इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
पुलिस के मुताबिक यह कारतूस तस्करी का एक संगठित नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है। उत्तर प्रदेश और बिहार के बीच हथियारों और गोला-बारूद की तस्करी लंबे समय से एक गंभीर समस्या रही है। इस कार्रवाई से न केवल तस्करी के एक बड़े रैकेट का खुलासा हुआ है, बल्कि यह भी संकेत मिलता है कि पुलिस और एसटीएफ ऐसी गतिविधियों पर कड़ी नजर रखे हुए हैं।
पुलिस और एसटीएफ अब गिरफ्तार तस्करों से पूछताछ के आधार पर इस नेटवर्क के मास्टरमाइंड तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इन कारतूसों का उपयोग किन आपराधिक गतिविधियों में किया जाना था। नालंदा और कैमूर पुलिस की संयुक्त कार्रवाई से अपराधियों में हड़कंप मच गया है।
