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नालंदा शिक्षा विभाग का नया घोटाला, अब शिक्षक प्रशिक्षण सूची में हुआ फर्जीवाड़ा

Nalanda education department's new scam, now there is fraud in teacher training list
Nalanda education department's new scam, now there is fraud in teacher training list

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण संवाददाता)। नालंदा शिक्षा विभाग एक बार फिर विवादों के घेरे में है। पहले बेंच घोटाला, फिर संस्कृत विद्यालयों के शिक्षकों और कर्मचारियों की भविष्य निधि में कमीशन का मामला, और अब ताजा मामला शिक्षकों की प्रशिक्षण सूची में गड़बड़ी का है। इस बार सर्व शिक्षा अभियान (एसएसए) की भूमिका संदिग्ध नजर आ रही है।

पटना में स्टेट काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एससीईआरटी) द्वारा 13 से 17 मई 2025 तक पहली से पांचवीं कक्षा के शिक्षकों के लिए पांच दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण का आयोजन किया गया था। नालंदा जिले से इस प्रशिक्षण में 60 शिक्षकों को शामिल होना था, और इसके लिए एसएसए ने 60 शिक्षकों की एक सूची जारी की थी। लेकिन यह सूची अब सवालों के घेरे में है।

जांच में खुलासा हुआ कि सूची में केवल 32 शिक्षकों के नाम वास्तविक थे, जबकि शेष 28 नाम इन्हीं 32 शिक्षकों में से कुछ के नामों को दोहरा-तिहरा कर शामिल किया गया था। यानी, कुछ शिक्षकों के नाम दो से तीन बार सूची में दर्ज किए गए, लेकिन उनके शिक्षक कोड और मोबाइल नंबर अलग-अलग थे।

मो. सिकंदर, कन्या मध्य विद्यालय झींगनगर: इनका नाम सूची में तीन बार दर्ज है। हर बार स्कूल का नाम एक ही है, लेकिन शिक्षक कोड और मोबाइल नंबर अलग-अलग हैं।

राखी कुमारी, कन्या मध्य विद्यालय झींगनगर: इनका नाम भी तीन बार सूची में शामिल है, लेकिन शिक्षक कोड और मोबाइल नंबर हर बार भिन्न हैं।

संजय कुमार, पीएस मीरगंज: इनका नाम चार बार दर्ज किया गया। स्कूल का नाम एक ही है, लेकिन शिक्षक कोड और मोबाइल नंबर अलग-अलग हैं।

योगेंद्र कुमार, कन्या मध्य विद्यालय झींगनगर: इनका नाम भी चार बार सूची में है, लेकिन शिक्षक कोड और मोबाइल नंबर हर बार अलग हैं।

जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) राज कुमार ने इस गड़बड़ी का ठीकरा कम्प्यूटर ऑपरेटर पर फोड़ने की कोशिश की। उन्होंने दावा किया कि प्रशिक्षण संभाग प्रभारी ने बताया कि ऑपरेटर की गलती से गलत सूची प्रकाशित हो गई थी, जिसे बाद में सुधार कर 28 शिक्षकों की नई सूची जारी की गई। हालांकि, विभागीय सूत्रों का कहना है कि प्रशिक्षण के लिए केवल एक ही सूची जारी की गई थी, और कोई नई सूची जारी नहीं हुई।

सवाल उठता है कि क्या अधिकारी बिना जांच के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कर देते हैं? सूची तैयार करने से पहले बीईओ से शिक्षकों की सूची मांगी जाती है, और फिर उसे सत्यापित किया जाता है। ऐसे में इतनी बड़ी गड़बड़ी कैसे हो गई? अगर यह केवल ऑपरेटर की गलती थी, तो शिक्षक और स्कूल का नाम एक ही रहता, लेकिन शिक्षक कोड और मोबाइल नंबर अलग-अलग कैसे हो गए?

विभागीय सूत्रों के अनुसार इस तरह की गड़बड़ी केवल मिलीभगत से ही संभव है। सूची में दोहराए गए नामों और अलग-अलग शिक्षक कोड व मोबाइल नंबरों से यह स्पष्ट होता है कि यह महज टाइपिंग की गलती नहीं है। अगर सही तरीके से जांच हो, तो इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।

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