Home दीपनगर मूर्ति विसर्जन के दौरान डूबे किशोर को ढूंढ रही NDRF टीम

मूर्ति विसर्जन के दौरान डूबे किशोर को ढूंढ रही NDRF टीम

NDRF team is searching for the teenager who drowned during idol immersion

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण संवाददाता)। दीपनगर थाना क्षेत्र के कोसुक गांव में एक दुखद घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। पंचाने नदी में भगवान गणेश की मूर्ति विसर्जन के दौरान एक 17 वर्षीय किशोर रोहित कुमार डूब गया। घटना की सूचना मिलते ही राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल यानि एनडीआरएफ (NDRF) की टीम मौके पर पहुंची और किशोर की तलाश में व्यापक खोज अभियान शुरू किया।

बताया जाता है कि देर शाम को नूरसराय के कखड़ा गांव निवासी सुबोध प्रसाद का पुत्र रोहित कुमार अपने दोस्तों के साथ कोसुक गांव के पास पंचाने नदी में मूर्ति विसर्जन के लिए गया था। मूर्ति विसर्जन के दौरान रोहित का पैर फिसल गया, जिसके कारण वह नदी की गहराई में चला गया और डूब गया। आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत इसकी सूचना स्थानीय पुलिस को दी।

सूचना मिलते ही दीपनगर थाना की पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। घटना की गंभीरता को देखते हुए तुरंत राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) और एनडीआरएफ की टीम को बुलाया गया। एनडीआरएफ की टीम ने अत्याधुनिक उपकरणों और गोताखोरों की मदद से किशोर की तलाश शुरू की। रात होने के बावजूद खोज अभियान जारी रखा गया, लेकिन खबर लिखे जाने तक रोहित का कोई सुराग नहीं मिल सका।

रोहित के परिवार में कोहराम मचा हुआ है। सुबोध प्रसाद और उनके परिजन नदी के किनारे खोज अभियान को देखने के लिए मौजूद हैं। रोहित के माता-पिता और रिश्तेदारों का रो-रोकर बुरा हाल है। स्थानीय लोगों ने भी परिवार को सांत्वना देने की कोशिश की, लेकिन इस दुखद घटना ने सभी को स्तब्ध कर दिया।

इस घटना ने कोसुक और आसपास के गांवों में मूर्ति विसर्जन के दौरान सुरक्षा के मुद्दे को फिर से चर्चा में ला दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि पंचाने नदी में कई स्थानों पर गहराई अधिक है और विसर्जन स्थलों पर कोई सुरक्षा व्यवस्था नहीं है। कुछ स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि नदी के किनारे विसर्जन के लिए सुरक्षित घाट बनाए जाएं और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए गोताखोरों या आपदा प्रबंधन टीमों की तैनाती की जाए।

नालंदा जिले में मूर्ति विसर्जन के दौरान ऐसी घटनाएं आम हो चुकी हैं और अब समय आ गया है कि ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। प्रशासन को चाहिए कि नदियों और तालाबों के किनारे सुरक्षित विसर्जन स्थल बनाए जाएं और वहां पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

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