हिलसा (नालंदा दर्पण)। बिहार राजस्व व भूमि सुधार विभाग ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि राज्य में अब से जमीन की मालगुजारी ऑनलाइन रसीद ही वैध मानी जाएगी। इस संबंध में विभाग ने 5 अक्टूबर 2018 को सभी जिलों को निर्देशित किया था कि भू-लगान रसीदें ऑफलाइन नहीं, बल्कि पूरी तरह से ऑनलाइन जारी की जाएंगी।
हालांकि, तीन साल से अधिक समय बीतने के बावजूद, करीब 64.9 प्रतिशत रैयत यानी भूमि धारक अब भी अपनी जमीन का मालगुजारी ऑनलाइन जमा करने के प्रति संकोच दिखा रहे हैं या रुचि नहीं ले रहे हैं।
इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए विभाग ने स्पष्ट चेतावनी जारी की है कि यदि कोई भी कर्मचारी या अधिकारी किसी भी तरह से ऑफलाइन भू-लगान रसीद जारी करता पाया गया तो उसके खिलाफ कड़ी अनुशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
राजस्व विभाग ने सभी जिला प्रशासन को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में निरीक्षण करें और यदि कहीं भी पुराने ऑफलाइन रसीदें पाई जाती हैं तो उन्हें जब्त कर जिला मुख्यालय में सुरक्षित जमा कराया जाए। साथ ही इसकी जानकारी विभाग को तुरंत दी जाए।
विभाग के अनुसार 2022 से राज्य में ऑफलाइन रसीदों की सरकारी छपाई पूरी तरह से बंद कर दी गई है। यह कदम आम जनता की सुविधा को ध्यान में रखते हुए और भूमि विवादों को कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
अब रैयतों को अंचल कार्यालय के चक्कर नहीं काटने पड़ते। वे अपने मोबाइल फोन या कंप्यूटर से घर बैठे भू-लगान का भुगतान कर सकते हैं और ऑनलाइन रसीद प्राप्त कर सकते हैं, जो पूरे राज्य में वैध मानी जाती है। इससे न केवल समय की बचत होती है बल्कि भ्रष्टाचार की संभावना भी कम हो जाती है।
विभाग का कहना है कि इस नई व्यवस्था से भू-राजस्व में पारदर्शिता बढ़ेगी और अनियमितताओं पर अंकुश लगेगा। इसलिए सभी रैयतों से आग्रह किया गया है कि वे जल्द से जल्द ऑनलाइन माध्यम से मालगुजारी जमा करने की प्रक्रिया अपनाएं ताकि वे सरकारी नियमों के अंतर्गत सुरक्षित रह सकें।
