राजगीर (नालंदा दर्पण)। बिहार का एक प्रमुख धार्मिक, ऐतिहासिक और पर्यटन स्थल राजगीर देश-विदेश के पर्यटकों के लिए आकर्षण का बड़ा केंद्र है। यहां की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के साथ-साथ प्राकृतिक सौंदर्य भी लोगों को अपनी ओर खींचता है। इस शहर को रेल नेटवर्क से जोड़ने वाली पलामू एक्सप्रेस का विस्तार राजगीर तक होना स्थानीय लोगों और यात्रियों के लिए एक बड़ी सुविधा के रूप में देखा जा रहा है।
यह ट्रेन न केवल राजगीर, बल्कि नालंदा और बिहारशरीफ जैसे महत्वपूर्ण स्थानों को भी जोड़ती है, जिससे क्षेत्र की आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है। लेकिन इस ट्रेन को स्पेशल ट्रेन के तौर पर संचालित किया जा रहा है। इस कारण इसका नंबर शून्य (0) से शुरू होता है। यह ‘शून्य टैग’ यात्रियों की सुविधाओं में कई तरह की बाधाएं उत्पन्न कर रहा है।
बताया जाता है कि पलामू एक्सप्रेस को स्पेशल ट्रेन के रूप में संचालित करने के कारण राजगीर, नालंदा और बिहारशरीफ जैसे स्टेशनों से आरक्षित टिकट की सुविधा उपलब्ध नहीं है। यात्री केवल सामान्य टिकट (जनरल टिकट) पर ही यात्रा कर सकते हैं। परिणामस्वरूप लंबी दूरी के यात्रियों को काफी असुविधा होती है।
बिना आरक्षण के यात्रा करने से न केवल उनकी यात्रा असुरक्षित और असुविधाजनक हो जाती है, बल्कि रेलवे को भी अपेक्षित राजस्व की प्राप्ति नहीं हो पाती। स्थानीय लोगों, पर्यटकों, छात्रों और व्यापारियों की बड़ी संख्या इस ट्रेन से नियमित रूप से यात्रा करती है। ऐसे में आरक्षित टिकट की सुविधा का अभाव यात्रियों के लिए एक बड़ी समस्या बन गया है।
स्थानीय लोग और यात्री संगठन लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि पलामू एक्सप्रेस के नंबर से शून्य टैग हटाया जाए। ताकि यह ट्रेन सामान्य मेल-एक्सप्रेस ट्रेन की श्रेणी में आ सके। ऐसा होने पर राजगीर, नालंदा और बिहारशरीफ जैसे स्टेशनों से आरक्षित टिकट बुक करने की सुविधा शुरू हो जाएगी। इससे न केवल यात्रियों को सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा का विकल्प मिलेगा, बल्कि रेलवे को भी राजस्व में वृद्धि होगी।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार इन स्टेशनों से बड़ी संख्या में यात्री प्रतिदिन सफर करते हैं। यदि इस ट्रेन को सामान्य मेल-एक्सप्रेस के रूप में संचालित किया जाए, तो यह रेलवे की आय बढ़ाने में भी कारगर सिद्ध हो सकता है।
इसीलिए अब वैशाली-कोडरमा बौद्ध सर्किट ट्रेन की तरह पलामू एक्सप्रेस को भी सामान्य मेल-एक्सप्रेस के रूप में संचालित करने की मांग जोर पकड़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम न केवल यात्रियों की सुविधा बढ़ाएगा, बल्कि राजगीर जैसे महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल की रेल कनेक्टिविटी को और मजबूत करेगा। इससे स्थानीय पर्यटन उद्योग को भी बढ़ावा मिलेगा, क्योंकि अधिक यात्री रेल के माध्यम से राजगीर पहुंच सकेंगे।
