Home कतरीसराय कतरीसराय थाना बना बच्चों का शिक्षण केंद्र, पुलिसिंग से रूबरू हुए नौनिहाल

कतरीसराय थाना बना बच्चों का शिक्षण केंद्र, पुलिसिंग से रूबरू हुए नौनिहाल

मध्य विद्यालय कतरीडीह के बच्चों ने थाना परिसर का भ्रमण कर पुलिसिंग के आधुनिक उपकरण और कार्यप्रणाली को नजदीक से जाना।

थाना परिभ्रमण बाल कार्यक्रम
पुलिस सप्ताह कतरीसराय

कतरीसराय (नालंदा दर्पण)। बिहार पुलिस सप्ताह के तहत आयोजित कार्यक्रमों की श्रृंखला में कतरीसराय थाना परिसर सोमवार को खासा जीवंत नजर आया, जब मध्य विद्यालय कतरीडिह के छात्र-छात्राओं ने थाना परिभ्रमण कर पुलिस की कार्यप्रणाली को नजदीक से जाना। इस दौरान बच्चों में उत्सुकता, जिज्ञासा और उत्साह साफ तौर पर देखने को मिला।

कार्यक्रम की शुरुआत बच्चों के स्वागत के साथ हुई, जिसके बाद अपर थानाध्यक्ष आदित्य कुमार ने स्वयं उन्हें थाना के विभिन्न महत्वपूर्ण कक्षों और शाखाओं का भ्रमण कराया। बच्चों ने ओडी ऑफिस, थाना हाजत, महिला हेल्प डेस्क, मालखाना, सरिस्ता कक्ष तथा आगंतुक कक्ष का अवलोकन किया और वहां होने वाले कार्यों की जानकारी प्राप्त की।

इस दौरान पुलिस अधिकारियों ने बच्चों को सरल और रोचक भाषा में बताया कि थाना में प्राथमिकी (एफआईआर) कैसे दर्ज की जाती है, पंजी संधारण की प्रक्रिया क्या होती है और वारंट, इश्तेहार तथा कुर्की जैसी कानूनी कार्रवाइयां कैसे संपन्न होती हैं। बच्चों को यह भी समझाया गया कि किसी भी शिकायत को दर्ज करने से लेकर उसके निष्पादन तक पुलिस किस तरह चरणबद्ध तरीके से काम करती है।

थाना परिभ्रमण के दौरान बच्चों को आधुनिक तकनीक से लैस पुलिसिंग की झलक भी देखने को मिली। अधिकारियों ने सीसीटीएनएस प्रणाली के महत्व और उसके उपयोग के बारे में जानकारी दी। साथ ही वायरलेस सेट, ब्रेथ एनालाइजर मशीन और एचएचडी डिवाइस जैसे आधुनिक उपकरणों का प्रदर्शन कर उनके उपयोग और आवश्यकता के बारे में विस्तार से बताया।

बच्चों ने पूरे कार्यक्रम के दौरान पुलिस अधिकारियों से कई सवाल पूछे, जैसे अपराध की जांच कैसे होती है, पुलिस अपराधियों तक कैसे पहुंचती है और आपात स्थिति में क्या करना चाहिए। अधिकारियों ने बच्चों के सभी सवालों का धैर्यपूर्वक जवाब दिया, जिससे उनकी जिज्ञासा शांत हुई और पुलिस के प्रति उनका विश्वास और मजबूत हुआ।

इस अवसर पर पुलिस पदाधिकारियों ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य बच्चों में कानून के प्रति जागरूकता बढ़ाना और पुलिस एवं आमजन के बीच सकारात्मक संबंध स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि जब बच्चे पुलिस की कार्यप्रणाली को समझेंगे, तो वे भविष्य में जिम्मेदार नागरिक बनेंगे और समाज में कानून व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करेंगे।

कार्यक्रम के अंत में बच्चों ने थाना परिसर के अनुभव को यादगार बताते हुए पुलिस अधिकारियों का आभार व्यक्त किया। वहीं शिक्षकों ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के कार्यक्रम बच्चों के ज्ञान और आत्मविश्वास दोनों को बढ़ाते हैं।

समाचार डेस्कः नालंदा दर्पण डेस्क / संतोष भारती

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