Home आवागमन राजगीर-बिहारशरीफ फोरलेन बनेगा देश का पहला बरगद-बोधिवृक्ष कॉरिडोर

राजगीर-बिहारशरीफ फोरलेन बनेगा देश का पहला बरगद-बोधिवृक्ष कॉरिडोर

Rajgir-Bihar Sharif four lane will become the country's first banyan-Bodhivriksha corridor
Rajgir-Bihar Sharif four lane will become the country's first banyan-Bodhivriksha corridor

राजगीर (नालंदा दर्पण)। बिहार के राजगीर और बिहारशरीफ को जोड़ने वाले राष्ट्रीय उच्च पथ-82 (फोरलेन) को देश के पहले “बरगद-बोधिवृक्ष कॉरिडोर” के रूप में विकसित करने की मांग तेज हो गई है। इस अभिनव प्रस्ताव को नालंदा मेमोरियल फाउंडेशन और पर्यावरणीय संस्था ‘प्रकृति’ ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ. सुनील कुमार को ज्ञापन भेजकर रखा है।

प्रस्ताव के अनुसार, इस फोरलेन के एक ओर राष्ट्रीय वृक्ष बरगद और दूसरी ओर राजकीय वृक्ष पीपल (बोधिवृक्ष) की श्रृंखलाबद्ध पौधारोपण किया जाए। संस्था के अध्यक्ष नीरज कुमार और प्रकृति के अध्यक्ष नवेंदु झा ने बताया कि यदि सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है तो यह न केवल देश का पहला वृक्ष-सज्जित ग्रीन कॉरिडोर बनेगा, बल्कि बिहार की धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय विरासत को भी नया आयाम मिलेगा।

क्यों खास है यह प्रस्ताव? इस वृक्षारोपण योजना का महत्व केवल हरियाली बढ़ाना नहीं है, बल्कि यह मार्ग बौद्ध और सूफी संस्कृति का प्रतीक बन सकता है। एक ओर पीपल वृक्ष, जिसे बोधिवृक्ष कहा जाता है, बौद्ध धर्म का गहरा प्रतीक है और इसी वृक्ष के नीचे गौतम बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था। दूसरी ओर बरगद वृक्ष न केवल लंबी उम्र, छांव और जीवन शक्ति का प्रतीक है, बल्कि भारतीय लोक संस्कृति में इसका विशेष धार्मिक महत्व भी है।

आध्यात्मिकता से जुड़ेगा पर्यटनः राजगीर और नालंदा जहां बौद्ध सर्किट का अहम हिस्सा हैं, वहीं बिहारशरीफ सूफी सर्किट का प्रमुख केंद्र है। ऐसे में बोधिवृक्ष और बरगद जैसे पवित्र वृक्षों से सजे इस मार्ग की कल्पना श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए एक आत्मिक अनुभूति का माध्यम बन सकती है।

पर्यावरणीय और जैव विविधता की दृष्टि से लाभकारीः फाउंडेशन के अनुसार वन विभाग मानसून के दौरान हर वर्ष बड़े पैमाने पर पौधारोपण करता है। आवश्यकता है कि इस विशेष मार्ग पर थीमेटिक वृक्षारोपण किया जाए, जिससे न केवल पर्यावरण संरक्षण हो, बल्कि यह मार्ग जैव विविधता संवर्धन और कार्बन अवशोषण में भी सहायक हो।

एक उदाहरण बन सकता है देश के लिएः नीरज कुमार और नवेंदु झा का मानना है कि यदि यह परियोजना मूर्त रूप लेती है तो यह बिहार नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक मॉडल बन सकती है।  जहां विकास, आस्था और प्रकृति का अद्भुत संगम दिखाई देगा।

बोधिवृक्ष कॉरिडोर और बरगद कॉरिडोर जैसी परियोजनाएं न केवल राजगीर-बिहारशरीफ फोरलेन की पहचान बदल देंगी, बल्कि यह भारत में सतत विकास और आध्यात्मिक पर्यटन का नया अध्याय भी लिख सकती हैं।

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