नालंदा दर्पण डेस्क। राजगीर नगर परिषद की मनमानी पर आखिरकार जिला प्रशासन का डंडा चल ही गया। ऐतिहासिक धरोहरों से सटे क्षेत्र में नियमों की अनदेखी कर बनाए जा रहे फव्वारा पार्क को प्रशासन ने न सिर्फ तत्काल प्रभाव से रुकवाया, बल्कि विवादित ढांचे को पूरी तरह ध्वस्त भी करा दिया। यह कार्रवाई जिलाधिकारी कुंदन कुमार के स्पष्ट निर्देश पर की गई।
कार्रवाई के बाद राजगीर के ऐतिहासिक अजातशत्रु स्तूप के समीप स्थित सर्कस मैदान में चल रहा निर्माण कार्य पूरी तरह थम गया है। प्रशासन की इस सख्ती से यह साफ हो गया कि मलमास मेला सैरात की भूमि पर कराया जा रहा निर्माण न केवल नियमों के खिलाफ था, बल्कि सरकारी दिशा-निर्देशों और वित्तीय अनुशासन की भी खुली अवहेलना थी।
बिना निविदा, बिना एजेंसी तैयार हो गया ढांचाः सूत्रों के अनुसार नगर परिषद द्वारा बिना विधिवत निविदा प्रक्रिया अपनाए, बिना किसी कार्य एजेंसी का चयन किए और बिना वर्क ऑर्डर जारी किए ही लाखों रुपये की लागत से फव्वारा पार्क का ढांचा लगभग तैयार कर लिया गया था।
हैरानी की बात यह रही कि विधानसभा चुनाव के दौरान आनन-फानन में निविदा प्रक्रिया शुरू करने की कोशिश तो की गई, यहां तक कि समाचार पत्रों में निविदा प्रकाशित भी कर दी गई, लेकिन न तो निविदा खोली गई और न ही किसी ठेकेदार का चयन हुआ।
इस पूरे मामले को जब नालंदा दर्पण ने प्रमुखता से उजागर किया, तब जिला प्रशासन ने स्वतः संज्ञान लेते हुए तुरंत निर्माण कार्य पर रोक लगा दी और बाद में ढांचे को ध्वस्त करने का आदेश दिया।
पुरातत्व विभाग की आपत्ति, नोटिस और एफआईआर की तैयारीः मामला यहीं नहीं रुका। सूत्र बताते हैं कि पुरातत्व विभाग ने भी ऐतिहासिक स्थल के समीप निर्माण को लेकर गंभीर आपत्ति जताई थी। नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। साथ ही राजगीर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए आवेदन भी दिया गया है।
प्रशासन ने नगर परिषद से यह स्पष्ट करने को कहा है कि बिना निविदा प्रक्रिया पूरी किए कार्य किन परिस्थितियों में शुरू किया गया और इसके लिए किस योजना मद की राशि का उपयोग किया जा रहा था।
नागरिकों ने उठाए सवाल, प्रशासन की कार्रवाई का स्वागतः मलमास मेला ठेकेदार संजय कुमार सिंह ने जिलाधिकारी की कार्रवाई का स्वागत करते हुए कहा कि सर्कस मैदान में फव्वारा बनने से मैदान का आकार छोटा हो जाता। इससे सर्कस, सरकारी मेले और बड़े आयोजनों पर प्रतिकूल असर पड़ता।
वहीं शहरवासियों का आरोप है कि मलमास मेला सैरात की आधे से अधिक भूमि पर पहले से अतिक्रमण है, लेकिन उसे हटाने में नगर परिषद कोई गंभीरता नहीं दिखा रही।
नागरिकों का मानना है कि यदि समय रहते जिला प्रशासन हस्तक्षेप नहीं करता तो सरकारी राशि का बड़ा दुरुपयोग हो सकता था। इस पूरे घटनाक्रम ने नगर परिषद की कार्यशैली, पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
समतलीकरण, कोई भुगतान नहीं: जिला प्रशासन के अनुसार डीएम के निर्देश पर फव्वारा पार्क को पूरी तरह ध्वस्त कर क्षेत्र का समतलीकरण कर दिया गया है। इस कार्य के लिए किसी को कोई भुगतान नहीं किया गया है। नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी अजीत कुमार ने भी इसकी पुष्टि की है।
फिलहाल, यह मामला न सिर्फ राजगीर बल्कि पूरे जिले में प्रशासनिक पारदर्शिता और नियमों के पालन को लेकर एक अहम उदाहरण बन गया है।
समाचार स्रोत : मुकेश भारतीय / मीडिया रिपोर्ट्स








