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नालंदा जैसे जिले में ऐसी तस्वीरें देख नीतीश सरकार के करींदों को लाज नहीं आती!

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। नालंदा जिले में सीएम नीतीश कुमार के कथित विकास की चकाचौंध के बीच फिर एक बार ऐसी घटना सामने आई है, जो उनके करींदों के दावों पर सवाल खड़े करती है। बिहार शरीफ सदर अस्पताल की वास्तविकता ने एक बार फिर लोगों को झकझोर कर रख दिया है।

खबरों के अनुसार नालंदा जिले में दो अलग-अलग हादसों में धर्मेंद्र कुमार और संजू साव की करंट लगने से अकाल मौत हो गई। पुलिस दोनों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए बिहार शरीफ सदर अस्पताल लाया गया। जहां धर्मेंद्र कुमार के शव को तो शव वाहन से सिलाव भेज दिया गया, वहीं संजू साव के परिजनों को अपने प्रियजन के शव को ठेले पर ले जाने को मजबूर होना पड़ा।

यह मामला तब और भी चौंकाने वाली हो जाती है, जब यह पता चलता है कि सत्तारुढ़ जदयू सांसद कौशलेन्द्र कुमार ने अस्पताल को तीन शव वाहन उपलब्ध कराए थे। लेकिन इन वाहनों का कोई उपयोग नहीं किया गया और वे अस्पताल परिसर में धूल फांक रहे हैं।

मृतक संजू साव के परिजनों के अनुसार उन्होंने शव को ले जाने के लिए एंबुलेंस की मांग की थी, लेकिन उन्हें यह सुविधा मुहैया नहीं कराई गई। मजबूरी में उन्हें अपने प्रियजन के शव को ठेले पर ले जाना पड़ा, जो मानवीय गरिमा और सम्मान के खिलाफ है।

उधर अस्पतालकर्मियों का बहाना है कि सदर अस्पताल में शव वाहनों की कमी है, जिसके कारण ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न होती हैं। परिजनों को शव ले जाने के लिए इंतजार करने को कहा गया था, लेकिन वे शव को ठेले पर ही ले गए।

हालांकि बिहारशरीफ सदर अस्पताल की यह कोई पहला तस्वीर नहीं है। यह सरकारी अस्पताल ऐसे मामले को लेकर हमेशा विवादों में घिरा रहता है। इससे पहले 3 सितंबर को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रहुई में एक शव को गोद में लेकर ले जाने का मामला सामने आया था, जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल दी थी।

वेशक, ऐसे मामले बिहार के स्वास्थ्य क्षेत्र में व्याप्त गंभीर समस्याओं की ओर इशारा करती हैं। जहां एक ओर सरकार बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत कुछ और ही बयान कर रही है।

मुकेश भारतीय

मुकेश भारतीय वरिष्ठ पत्रकार हैं और राजनीति, प्रशासन और स्थानीय, राष्ट्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर लेखन-संपादन करते हैं। More »

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