Home सरकार बिहार राजस्व महाअभियान को झटका, सर्वेक्षण अमीन और सरकार की जंग शुरु

बिहार राजस्व महाअभियान को झटका, सर्वेक्षण अमीन और सरकार की जंग शुरु

Setback to Bihar Revenue Maha Abhiyan, war between Survey Amin and government begins
Setback to Bihar Revenue Maha Abhiyan, war between Survey Amin and government begins

नालंदा दर्पण डेस्क। बिहार राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा शुरू किया गया राजस्व महा-अभियान उस समय गंभीर संकट में पड़ गया, जब राज्य के कुछ अंचलों में विशेष सर्वेक्षण अमीनों ने अपनी मांगों को लेकर हड़ताल शुरू कर दी।

इस हड़ताल ने न केवल अभियान की गति को प्रभावित किया है, बल्कि सरकार और अमीनों के बीच तनाव को भी बढ़ा दिया है। विभाग ने हड़ताल पर गए अमीनों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए उनके लॉगिन अकाउंट तत्काल प्रभाव से बंद करने और सरकारी जिम्मेदारियों से वंचित करने का निर्देश जारी किया है।

सरकार ऐसे हड़ताली सर्वेक्षण अमीनों को नौकरी से हटाकर नई बहाली की प्रक्रिया शुरू करने पर भी विचार किया जा रहा है।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार बिहार राजस्व अमीन संघ लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर सरकार के साथ बातचीत कर रहा है। इन मांगों में कार्यस्थल पर बेहतर सुविधाएं, वेतन वृद्धि और नियमितीकरण जैसे मुद्दे शामिल हैं।

14 अगस्त को अपर मुख्य सचिव (राजस्व एवं भूमि सुधार) दीपक कुमार सिंह ने संघ के प्रतिनिधियों के साथ एक बैठक की थी, जिसमें अभियान के सुचारू संचालन के लिए सहयोग का अनुरोध किया गया था।

अपर मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया था कि राजस्व महा-अभियान राज्य सरकार की एक महत्वाकांक्षी पहल है, जिसका उद्देश्य आम लोगों की जमीन से संबंधित समस्याओं का त्वरित समाधान करना है।

हालांकि, बैठक के बाद भी कुछ अमीनों ने 16 अगस्त से शुरू हुए इस महा-अभियान के दौरान हड़ताल शुरू कर दी। विभाग ने इसे गंभीरता से लेते हुए हड़ताली अमीनों के खिलाफ कठोर कदम उठाने का फैसला किया।

सभी बंदोबस्त पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि हड़ताल में शामिल अमीनों का लॉगिन अकाउंट बंद कर दिया जाए और उन्हें सरकारी कार्यालयों में प्रवेश से रोका जाए।

बता दें कि 16 अगस्त से पूरे बिहार में शुरू हुआ राजस्व महा-अभियान जमीन से जुड़े विवादों और समस्याओं के समाधान के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है। इस अभियान के तहत प्रत्येक पंचायत में दो-दो शिविर लगाए जा रहे हैं, जहां लोगों की समस्याओं का तुरंत समाधान करने की व्यवस्था की गई है।

 हर शिविर में विशेष सर्वेक्षण अमीनों को लैपटॉप के साथ उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है, ताकि डिजिटल माध्यम से रिकॉर्ड अपडेट और शिकायतों का निपटारा किया जा सके।

यह अभियान न केवल जमीन के मालिकाना हक को स्पष्ट करने में मदद करेगा, बल्कि राजस्व रिकॉर्ड को डिजिटल और पारदर्शी बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। सरकार का दावा है कि इस अभियान से लाखों लोगों को लाभ होगा, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में, जहां जमीन से जुड़े विवाद आम हैं।

बिहार राजस्व अमीन संघ ने दावा किया है कि उनकी मांगें जायज हैं और वे लंबे समय से अनसुनी हो रही हैं। संघ के एक प्रतिनिधि ने कहा कि हम दिन-रात मेहनत करते हैं, लेकिन हमें न तो उचित वेतन मिलता है और न ही कार्यस्थल पर पर्याप्त संसाधन। हमारी मांगें पूरी होने तक हमारा आंदोलन जारी रहेगा।

हालांकि, संघ ने यह भी आश्वासन दिया था कि अभियान के दौरान कोई हड़ताल नहीं होगी, लेकिन कुछ अमीनों द्वारा हड़ताल पर जाने से स्थिति जटिल हो गई है।

हड़ताल के कारण राजस्व महा-अभियान की प्रगति पर असर पड़ना तय है। विशेष सर्वेक्षण अमीन इस अभियान की रीढ़ हैं, क्योंकि उनके बिना जमीन के रिकॉर्ड को अपडेट करना और विवादों का समाधान करना मुश्किल है।

विभाग अब इस संकट से निपटने के लिए वैकल्पिक उपायों पर विचार कर रहा है, जिसमें नए अमीनों की भर्ती और निजी एजेंसियों की मदद लेना शामिल है।

वहीं कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार और अमीन संघ के बीच संवाद की कमी इस स्थिति के लिए जिम्मेदार है। उनका सुझाव है कि दोनों पक्षों को जल्द से जल्द एक मध्यस्थता बैठक आयोजित करनी चाहिए ताकि हड़ताल समाप्त हो और अभियान अपने तय समय पर पूरा हो सके।

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