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गृद्धकूट पर्वत की सीढ़ी पर श्रीलंकाई पर्यटक की मौत, शोक में डूबा दल

Sri Lankan tourist dies on the stairs of Griddhakuta mountain, team mourns

राजगीर (नालंदा दर्पण)। बिहार के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल राजगीर में गृद्धकूट पर्वत की सीढ़ियां चढ़ते समय एक दुखद घटना ने सभी को झकझोर दिया। श्रीलंका के 67 वर्षीय पर्यटक धनपाल पराना मैनाज की हार्ट अटैक से मौत हो गई। यह हादसा उस समय हुआ, जब वह अपने 87 सदस्यीय श्रीलंकाई दल के साथ भगवान बुद्ध की तपस्थली गृद्धकूट पर्वत पर पूजा-अर्चना के लिए जा रहे थे।

मृतक धनपाल पराना मैनाज श्रीलंका के कोलंबो के किरुलापन थाना क्षेत्र के 145/28 सी-हाईलेवल रोड के निवासी थे। वे बोधगया भ्रमण के बाद अपने दल के साथ राजगीर पहुंचे थे। गृद्धकूट पर्वत की खड़ी चढ़ाई पर सीढ़ियां चढ़ते समय अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार धनपाल अचानक बेहोश होकर गिर पड़े।

आनन-फानन में रोपवे प्रबंधक ने इसकी सूचना अनुमंडलीय अस्पताल को दी।  अस्पताल के उपाधीक्षक ने तत्काल एंबुलेंस भेजकर धनपाल को अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की, लेकिन वहां पहुंचने पर चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। प्रारंभिक जांच में चिकित्सकों ने उनकी मृत्यु का कारण हार्ट अटैक बताया।

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की। धनपाल का शव उनके श्रीलंकाई दल को सौंप दिया गया। इस बीच, नालंदा स्थित श्रीलंकाई बौद्ध मठ के भंते डॉ. महेंद्र चंद्र भी अस्पताल पहुंचे।

उन्होंने बताया कि शव को श्रीलंका भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके तहत शव को पहले एंबुलेंस के जरिए दिल्ली एयरपोर्ट ले जाया जाएगा, जहां से उसे विमान द्वारा श्रीलंका भेजा जाएगा।

इस अप्रत्याशित घटना ने पूरे श्रीलंकाई दल को गहरे सदमे में डाल दिया। दल के सदस्यों ने बताया कि धनपाल इस तीर्थयात्रा को लेकर बेहद उत्साहित थे और भगवान बुद्ध की तपस्थली का दर्शन करने के लिए विशेष रूप से उत्सुक थे। उनकी अचानक मृत्यु ने सभी को स्तब्ध कर दिया।

गृद्धकूट पर्वत, जिसे ‘गिद्ध चोटी’ के नाम से भी जाना जाता है, भगवान बुद्ध की तपस्थली के रूप में विश्व प्रसिद्ध है। यह स्थल बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, जहां बुद्ध ने अपने कई उपदेश दिए थे। हर साल हजारों की संख्या में देश-विदेश से पर्यटक और तीर्थयात्री यहां आते हैं। हालांकि, पर्वत की खड़ी चढ़ाई बुजुर्गों और स्वास्थ्य समस्याओं से ग्रस्त लोगों के लिए चुनौतीपूर्ण होती है।

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