Home नालंदा नालंदा में PDS दुकानों से बंट रहा घटिया चावल, लोगों में भारी...

नालंदा में PDS दुकानों से बंट रहा घटिया चावल, लोगों में भारी नाराजगी

Substandard rice is being distributed through PDS shops in Nalanda, causing widespread anger among the people.

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। समूचे नालंदा जिले में जन वितरण प्रणाली (PDS) इन दिनों गंभीर सवालों के घेरे में है। सरकारी दुकानों पर पहुंच रहा चावल घटिया गुणवत्ता का बताया जा रहा है, जिससे उपभोक्ताओं में भारी नाराज़गी है।

हालात ऐसे हैं कि कई जगहों पर चावल को लेकर उपभोक्ताओं और पीडीएस दुकानदारों के बीच तीखी बहस तक हो रही है। उपभोक्ताओं का कहना है कि जो चावल वितरित किया जा रहा है, वह खाने योग्य नहीं है। गरीब आखिर क्या खाएंगे, जब चावल ही घटिया होगा। यह सवाल अब आम लोगों की जुबान पर है।

पूरे जिले में 25 लाख से अधिक उपभोक्ता पीडीएस पर निर्भर हैं। ऐसे में यह मामला सीधे लाखों परिवारों की सेहत और भरोसे से जुड़ा है। वहीं दुकानदार अपनी सफाई में कहते हैं कि वे जिम्मेदार नहीं हैं।

डीलरों के अनुसार राज्य खाद्य निगम गोदाम से ही घटिया चावल की आपूर्ति हो रही है। उनका कहना है कि जो अनाज उन्हें मिलता है, वही वे वितरित करने को मजबूर हैं। फिलहाल प्रति उपभोक्ता हर माह 4 किलो चावल और 1 किलो गेहूं दिया जा रहा है।

हालांकि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के तहत जनवरी 2026 से वितरण व्यवस्था में बदलाव प्रस्तावित है, जिसके अनुसार गेहूं बंद कर केवल 2 या 3 किलो चावल प्रति उपभोक्ता दिया जाएगा। ऐसे में चावल की गुणवत्ता को लेकर चिंता और भी बढ़ गई है। पीडीएस दुकानदारों की परेशानी भी कम नहीं है।

दुकानदारों का आरोप है कि जून 2025 से अब तक कमीशन का भुगतान नहीं हुआ है, जिससे उन्हें आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। जिले में 1400 से अधिक पीडीएस दुकानदार हैं, हालांकि इनमें कुछ निलंबित हैं और कुछ का निधन हो चुका है।

जिले में कुल 1437 जन वितरण प्रणाली की दुकानें संचालित हैं। इनमें बिहारशरीफ में सबसे अधिक 295 दुकानें हैं, जबकि अन्य प्रखंडों में अस्थावां (75), बेन (43), चंडी (70), एकंगरसराय (78), हिलसा (94), इस्लामपुर (113), राजगीर (68), सिलाव (74) सहित सभी प्रखंडों में पीडीएस के माध्यम से अनाज वितरण किया जा रहा है।

अब सवाल यह है कि जब सरकारी योजना का उद्देश्य गरीबों को सस्ता और सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराना है, तो घटिया चावल की आपूर्ति पर जिम्मेदार विभाग कब और कैसे कार्रवाई करेगा। उपभोक्ता और दुकानदार दोनों की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं।

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

error: Content is protected !!
Exit mobile version