Home आवागमन वैशाली-कोडरमा बौद्ध सर्किट ट्रेन बना विलंब का एक अनोखा सफर

वैशाली-कोडरमा बौद्ध सर्किट ट्रेन बना विलंब का एक अनोखा सफर

Vaishali-Koderma Buddhist Circuit Train becomes a unique journey of delay

राजगीर (नालंदा दर्पण)। बीते 22 अगस्त  को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हरी झंडी दिखाकर शुरू की गई वैशाली-कोडरमा बौद्ध सर्किट फास्ट मेमू ट्रेन (ट्रेन संख्या 63383/63384) ने बिहार और झारखंड के यात्रियों के लिए एक नई उम्मीद जगाई थी। यह ट्रेन वैशाली, नालंदा, राजगीर, गया और कोडरमा जैसे बौद्ध धर्म के प्रमुख तीर्थ स्थलों को जोड़ती है, जिससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने की अपेक्षा थी।

साथ ही यह छात्रों, नौकरीपेशा लोगों और दैनिक यात्रियों के लिए तेज, सस्ती और सुविधाजनक यात्रा का वादा करती है। लेकिन इस ट्रेन का हालिया सफर कई यात्रियों के लिए उत्साह के साथ-साथ निराशा भी लेकर आया।

आइए, इस ट्रेन के एक दिन के सफर की कहानी को विस्तार से जानते हैं, जिसमें समय की पाबंदी के बावजूद कई ठहरावों ने इसकी फास्ट छवि पर सवाल उठाए।

वैशाली-कोडरमा बौद्ध सर्किट फास्ट मेमू ट्रेन अपने निर्धारित समय सुबह 5:15 बजे, वैशाली से रवाना हुई और समय पर पटना जंक्शन पहुंची। लेकिन यहां से इसकी यात्रा में देरी की शुरुआत हुई।

पटना जंक्शन पर ट्रेन को खोलने में देरी हुई, क्योंकि इसके ठीक 20 मिनट बाद पटना-हावड़ा वंदे भारत एक्सप्रेस को रवाना करना था। न तो वैशाली-कोडरमा ट्रेन के पीछे कोई दूसरी ट्रेन थी और न ही आगे कोई बाधा। फिर भी इसे प्राथमिकता नहीं दी गई। यात्रियों को आश्चर्य हुआ कि फास्ट मेमू होने के बावजूद इसे क्यों रोका गया।

पटना जंक्शन से रवाना होने के बाद ट्रेन ने अपनी रफ्तार पकड़ी, लेकिन करौटा रेलवे स्टेशन पर इसे 40 मिनट तक रोक दिया गया। इसका कारण था पटना-धनबाद इंटरसिटी एक्सप्रेस को पास देना।

यात्रियों के लिए यह एक थकाऊ अनुभव था, क्योंकि करौटा जैसे छोटे स्टेशन पर इतने लंबे समय तक रुकना असामान्य लगा। कई यात्रियों ने इस बात पर नाराजगी जताई कि अगर यह ट्रेन फास्ट है तो इसे बार-बार क्यों साइड किया जा रहा है।

यात्रा का अगला पड़ाव राजगीर रेलवे स्टेशन था, जहां स्थिति और भी जटिल हो गई। यहां ट्रेन को 45-50 मिनट तक रोककर रखा गया। इसका कारण था राजगीर-कोडरमा स्पेशल ट्रेन, जो इसके आगे थी।

इसके अलावा तिलैया की ओर से गया-बख्तियारपुर मेमू ट्रेन को भी पास देना था। इस लंबे ठहराव ने यात्रियों की धैर्य की परीक्षा ली। कई यात्रियों ने बताया कि राजगीर जैसे महत्वपूर्ण स्टेशन पर इतना लंबा इंतजार अप्रत्याशित था। खासकर तब जब यह ट्रेन बौद्ध सर्किट के लिए विशेष रूप से शुरू की गई थी।

वैशाली-कोडरमा बौद्ध सर्किट फास्ट मेमू ट्रेन को तेज और सुविधाजनक यात्रा का प्रतीक माना जा रहा था, लेकिन इस सफर में बार-बार साइडिंग और ठहराव ने इसके फास्ट होने पर सवाल उठाए।

यह ट्रेन हाजीपुर, सोनपुर, पाटलिपुत्र, पटना, फतुहा, बख्तियारपुर, बिहार शरीफ, नालंदा, राजगीर, तिलैया, गया और गुरपा जैसे स्टेशनों से होकर गुजरती है और दोपहर 3:15 बजे कोडरमा पहुंचती है।

वापसी में यह ट्रेन कोडरमा से शाम 4:45 बजे रवाना होती है और अगले दिन तड़के 2:45 बजे वैशाली पहुंचती है। लेकिन बार-बार एक्सप्रेस ट्रेनों को पास देने के लिए इसे साइड करने से यात्रा का समय अनावश्यक रूप से बढ़ जाता है।

यात्रियों ने इस ट्रेन की सुविधा की सराहना की, क्योंकि यह बिहार और झारखंड के बीच कनेक्टिविटी को मजबूत करती है और बौद्ध तीर्थ स्थलों तक पहुंच को आसान बनाती है। लेकिन, लंबे ठहराव और साइडिंग की वजह से कई यात्रियों ने निराशा व्यक्त की।

रेलवे अधिकारियों का कहना है कि वैशाली-कोडरमा मेमू ट्रेन को अन्य एक्सप्रेस ट्रेनों को पास देने के लिए साइड करना पड़ता है, क्योंकि रेलवे ट्रैक पर प्राथमिकता तेज गति वाली ट्रेनों को दी जाती है।

लेकिन, यह सवाल उठता है कि क्या बौद्ध सर्किट जैसी महत्वपूर्ण ट्रेन को भी इस तरह की देरी का सामना करना चाहिए। रेलवे के एक अधिकारी ने बताया कि ट्रैक की भीड़ और अन्य ट्रेनों की प्राथमिकता के कारण ऐसी स्थिति उत्पन्न होती है, लेकिन भविष्य में इसे कम करने की कोशिश की जाएगी।

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