बिहार में 100 करोड़ का GST घोटालाः पटना, पूर्णिया, नालंदा और मुंगेर में CBI की रेड

नालंदा दर्पण डेस्क। बिहार में 100 करोड़ रुपये के विशाल GST घोटाला का पर्दाफाश हुआ है, जिसने राज्य के व्यापारिक और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने इस मामले में पटना, पूर्णिया, नालंदा और मुंगेर में एक साथ छापेमारी की। इस दौरान कई चौंकाने वाले खुलासे हुए।

यह घोटाला फर्जी निर्यात बिलों के जरिए टैक्स रिफंड हड़पने की साजिश से जुड़ा है, जिसमें कागजों पर माल नेपाल भेजने का दिखावा किया गया, जबकि हकीकत में ऐसा कुछ हुआ ही नहीं।

CBI की कार्रवाई के दौरान कई अहम सबूत हाथ लगे हैं। छापों में सात सोने के बिस्किट, कई मोबाइल फोन और महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए, जो इस घोटाले की गहरी साजिश की ओर इशारा करते हैं।

जांच में पता चला कि बिहार-नेपाल सीमा पर जयनगर, भीमनगर और भिट्टामोर जैसे सीमावर्ती इलाकों से कागजों में टाइल्स और ऑटो पार्ट्स का निर्यात दिखाया गया। इन फर्जी दस्तावेजों के आधार पर करोड़ों रुपये का GST रिफंड लिया गया।

इस घोटाले में पटना कस्टम विभाग के पूर्व एडिशनल कमिश्नर रणविजय कुमार का नाम प्रमुखता से सामने आया है। वर्तमान में जमशेदपुर में तैनात रणविजय से CBI ने उनके सरकारी आवास पर छह घंटे तक गहन पूछताछ की।

हालांकि, अभी तक उनकी गिरफ्तारी नहीं हुई है, लेकिन जांच एजेंसी उनके रोल की गहराई से पड़ताल कर रही है। सूत्रों के मुताबिक रणविजय इस साजिश के अहम कड़ी हो सकते हैं।

CBI की जांच में सामने आया कि इस घोटाले का जाल बिहार से कोलकाता तक फैला हुआ है। चार सीमा शुल्क अधिकारियों, 23 व्यापारियों और कोलकाता के एक एजेंट पर सरकारी खजाने को चूना लगाने का आरोप है।

इन लोगों ने मिलकर फर्जी बिलिंग और निर्यात के दस्तावेज तैयार किए, जिसके जरिए GST रिफंड की राशि हड़पी गई। जांच एजेंसी अब इन सभी आरोपियों के बैंक खातों, संपत्तियों और आपसी लेन-देन की जांच में जुट गई है।

घोटालेबाजों ने बिहार-नेपाल सीमा पर स्थित जयनगर, भीमनगर और भिट्टामोर को अपने फर्जीवाड़े का केंद्र बनाया। कागजों में टाइल्स और ऑटो पार्ट्स जैसे सामानों का नेपाल को निर्यात दिखाया गया, लेकिन असल में कोई माल सीमा पार नहीं गया।

इन फर्जी निर्यात बिलों के आधार पर GST रिफंड का दावा किया गया, जिसे सरकारी तंत्र की मिलीभगत से आसानी से पास करा लिया गया। इस पूरी प्रक्रिया में न केवल व्यापारी, बल्कि सीमा शुल्क विभाग के कुछ अधिकारी भी शामिल थे।

CBI ने इस मामले में अपनी जांच तेज कर दी है। बरामद दस्तावेजों और मोबाइल फोनों की फॉरेंसिक जांच की जा रही है, ताकि घोटाले के पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सके। साथ ही जांच एजेंसी उन सभी व्यापारियों और अधिकारियों के खिलाफ सबूत जुटा रही है, जिनका इस साजिश में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से हाथ है। सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं।

यह घोटाला न केवल बिहार, बल्कि पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है। जनता में इस बात को लेकर गुस्सा है कि सरकारी तंत्र की मिलीभगत से कैसे करोड़ों रुपये का फर्जीवाड़ा हो रहा था। दूसरी ओर सरकार ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए CBI को पूरी छूट दी है कि वह दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे।

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