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जी 20 लेबर इंगेजमेंट ग्रुप में शामिल 14 देश के 49 प्रतिनिधियों ने नालंदा खंडहर का किया दीदार

नालंदा (रणजीत सिंह)। आज शनिवार को पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जी 20 लेबर इंगेजमेंट ग्रुप में शामिल नालंदा पहुंचे 14 देश के 49 प्रतिनिधियों ने नालंदा खंडहर का दीदार किया। इस दौरान प्रतिनिधियों ने यहां के भग्नावशेषों का जानकारी ली।

49 peoples representatives from 14 countries included in G20 Labor Engagement Group visited Nalanda ruins 1इस दौरान गर्मी के कारण जेएनयू के प्रो. डॉ. संतोष खंडहर में ही मूर्छित होकर गिर गये। जिसके बाद उन्हें इलाज के लिये विम्स पावापुरी में भर्ती कराया गया। प्रतिनिधियों की सुरक्षा को चाक चौबंद व्यवस्था की गयी थी।

पुलिस अधीक्षक अशोक मिश्रा ने बताया कि 261 स्थानों पर मजिस्ट्रेट एवं 632 सुरक्षा बल को तैनात किया गया था। इस दौरान जिलाधिकारी शशांक शुभंकर एवं पुलिस अधीक्षक अशोक मिश्रा मॉनिटरिंग करते दिखे।

इन देशों से पहुंचे थे प्रतिनिधि:  नालंदा खंडहर और यहां के भग्नावशेषों का दीदार करने अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, यूरोपीय संघ, फ्रांस, जर्मनी, भारत, इंडोनेशिया, इटली, जापान, मैक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया, तुर्की, यूनाइटेड किंगडम व संयुक्त राज्य अमेरिका से कुल 49 प्रतिनिधि पहुंचे थे।

पूरे कार्यक्रम पर एक नजर: तय कार्यक्रम के अनुसार जी-20 के लेबर इंगेजमेंट ग्रुप के सदस्य सुबह 6:00 से 7:00 के बीच पटना से प्रस्थान कर गए और प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के भग्नावशेष के पास सुबह 9:00 बजे तक पहुंच गए।

जीविका दीदी द्वारा उनका पारंपरिक स्वागत किया गया। 9:15 से 10:15 तक ग्रुप के सदस्य सॉफ्ट ड्रिंक और स्नेक्स दिया गया।

इसके बाद डेलीगेटो को तीन सब ग्रुप में डिवाइड कर प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के भग्नावशेष को दिखाया गया। 11:30 बजे तक वे लोग प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय परिसर में ही रहे। इसके बाद उन्हें नालंदा का मोमेंटो दिया गया।

वहां से वे लोग 11:30 बजे नालंदा विश्वविद्यालय राजगीर कैम्पस देखने के लिए प्रस्थान कर गए। उनका सुषमा स्वराज ऑडिटोरियम में स्वागत किया गया।

12:05 मिनट से 12:35 तक फिल्म प्रेजेंटेशन जो नालंदा विश्वविद्यालय से संबंधित था, उसे दिखाया गया और डेलीगेटो को सोवेनियर और हैंडीक्राफ्ट का सामग्री भेंट की गयी।

मुकेश भारतीय

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय पिछले तीन दशक से राजनीति, प्रशासन, सरकार को लेकर स्थानीय, राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर लेखन-संपादन करते आ रहे हैं।