मंगल की छांव में एवरेस्ट से ऊंचा ज्वालामुखी! NASA ने भेजी हैरतअंगेज तस्वीर
इस अविश्वसनीय दृश्य को रिकॉर्ड करने में नासा के थेमिस कैमरे (THEMIS - Thermal Emission Imaging System) की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इस कैमरे के प्रमुख संचालनकर्ता जोनाथन हिल के मुताबिक, हमने जानबूझकर इस ज्वालामुखी को चुना ताकि उसके शिखर को बादलों से ऊपर देख सकें और वैसा ही हुआ जैसा हमने सोचा था...
नालंदा दर्पण डेस्क। मानवता की नजरें जब से मंगल ग्रह पर टिकी हैं, हर नई खोज रोमांच और रहस्य से भरपूर रही है। अब नासा के 2001 मार्स ओडिसी ऑर्बिटर ने एक ऐसी अद्भुत तस्वीर भेजी है, जिसने अंतरिक्ष प्रेमियों और वैज्ञानिकों दोनों को चौंका दिया है। यह तस्वीर मंगल ग्रह के एक विशाल ज्वालामुखी अरसिया मोन्स की है, जो बादलों की मोटी परत को चीरते हुए सीधे क्षितिज पर उभरता दिखाई दे रहा है।

मंगल का ज्वालामुखी, धरती से कहीं ऊंचाः यह दृश्य बीते 2 मई को रिकॉर्ड किया गया था, जब मंगल सूर्य से अपने सबसे दूर के बिंदु यानी एपीहीलियन पर था। इसी समय नासा के ऑर्बिटर ने अपना कैमरा सामान्य सतही अवलोकन से घुमाकर क्षितिज की ओर मोड़ा और यह अद्भुत चित्र खींचा। तस्वीर में साफ देखा जा सकता है कि अरसिया मोन्स का शिखर बादलों के ऊपर अकेला खड़ा है- बिल्कुल किसी साक्षात देवता की तरह।
अरसिया मोन्स की ऊंचाई लगभग 20 किलोमीटर (यानी 65,616.8 फीट) है। यह न केवल पृथ्वी के सबसे ऊंचे पर्वत माउंट एवरेस्ट (29,032 फीट) से कहीं अधिक है, बल्कि पृथ्वी के सबसे बड़े ज्वालामुखी मौना लोआ से भी कहीं ज्यादा विशाल है। इसका व्यास भी चौंकाने वाला है- लगभग 450 किलोमीटर में फैला हुआ यह ज्वालामुखी एक शहर जितना बड़ा दिखाई देता है।
वैज्ञानिकों के लिए वरदान है यह दृश्यः इस अविश्वसनीय दृश्य को रिकॉर्ड करने में नासा के थेमिस कैमरे (THEMIS – Thermal Emission Imaging System) की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इस कैमरे के प्रमुख संचालनकर्ता जोनाथन हिल के मुताबिक, हमने जानबूझकर इस ज्वालामुखी को चुना ताकि उसके शिखर को बादलों से ऊपर देख सकें और वैसा ही हुआ जैसा हमने सोचा था।
नासा के गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर के वायुमंडलीय वैज्ञानिक माइकल डी. स्मिथ ने बताया कि इस प्रकार की छवियां उन्हें मंगल ग्रह पर मौसमी बदलावों, धूल और बर्फ के बादलों की परतों को समझने में मदद कर रही हैं। खासकर एपीहीलियन क्लाउड बेल्ट नामक एक मोटी बादलों की पट्टी इस क्षेत्र में हर साल बनती है, जो इस तस्वीर में भी साफ नजर आ रही है।
कैसे ली गई यह अनोखी तस्वीर? ऑर्बिटर ने यह दृश्य रिकॉर्ड करने के लिए अपने सामान्य मार्ग से हटकर खुद को 90 डिग्री घुमा दिया। आमतौर पर सतह की गर्मी मापने वाला THEMIS कैमरा इस बार क्षितिज की ओर घुमा दिया गया, जिससे यह चमत्कारिक क्षण कैमरे में कैद हो सका।
अंतरिक्ष में नया अध्यायः अरसिया मोन्स केवल एक विशाल ज्वालामुखी नहीं है, बल्कि यह मंगल की जलवायु, उसकी भूगर्भीय गतिविधियों और पर्यावरणीय संरचना को समझने की एक खिड़की है। आने वाले वर्षों में यह खोज वैज्ञानिकों को मंगल ग्रह के अतीत और संभावित भविष्य को समझने में निर्णायक मदद कर सकती है।
तो क्या मंगल ग्रह पर भी एवरेस्ट’ जैसा रोमांच है? इस नयी तस्वीर ने न केवल विज्ञान की दुनिया में हलचल मचा दी है, बल्कि यह साबित कर दिया है कि हमारा सौरमंडल रहस्यों से भरा हुआ है। कहीं ना कहीं इन रहस्यों के भीतर ही वह भविष्य छिपा है, जिसमें इंसान मंगल पर अपने कदम रखेगा।





