पटना-नालंदा के इस ठग दंपति से सावधान, यूं कर रहे करोड़ों का फ्रॉड !
ठग संजय कुमार केशरी, पिता श्री महेश प्रसाद केशरी,स्थाई निवास स्थान- ग्राम-नालंदा कॉलोनी रामचन्द्रपुर, बिहार शरीफ, थाना- लहेरी, पत्रालय-रामचन्द्रपुर, जिला-नालंदा, पिन कोड-801301. वर्त्तमान पता- शिव कम्पलेक्स अपार्टमेंट, ब्लॉक नं.-A, फ्लैट नं.-104, रामकृष्णा नगर, पटना, पिन कोड 800027.
बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। बिहार में जमीन दलाली अब ठगी और धोखाधड़ी का सबसे नया अड्डा बनती जा रही है। पैसे के लालच में रिश्तों की मर्यादा टूट रही है और लोग धोखेबाजों के जाल में फंसते जा रहे हैं। ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला नालंदा जिले से सामने आया है, जहां एक सरकारी शिक्षिका और उसका पूरा परिवार जमीन के नाम पर करोड़ों की ठगी में लिप्त पाया गया है।
जानकारी के अनुसार एक सरकारी स्कूल में कार्यरत शिक्षिका माधुरी कुमारी, उसके पति संजय कुमार केशरी और पुत्र सुमन सौरव पटना और नालंदा के कई भोले-भाले लोगों को जमीन बेचने के नाम पर लाखों की चपत लगा चुके हैं। ताजा मामला पटना के शांति निकेतन कॉलोनी निवासी सुरेश प्रसाद से जुड़ा है, जिनसे 30 लाख रुपये की ठगी की गई है।
सुरेश प्रसाद इन दिनों बेहद मानसिक तनाव में हैं। उनकी बहू की डायलिसिस चल रही है और डॉक्टरों ने तत्काल किडनी ट्रांसप्लांट की सलाह दी है। इसी उम्मीद में उन्होंने दानापुर स्थित अपनी संपत्ति बेच दी और पटना के मालसलामी थाना क्षेत्र में स्थित जमीन के लिए माधुरी और संजय से सौदा किया। लेकिन रकम देने के बावजूद न तो रजिस्ट्री हुई और न ही पैसा वापस मिला।
संजय कुमार केशरी ने सुरेश प्रसाद को कुल 30 लाख रुपये की एवज में 10-10 लाख के तीन पोस्टडेटेड चेक दिए, जिसमें से एक की रकम लौटाई, लेकिन बाकी दो बार-बार बैंक में फंड इनसफिसिएंट के कारण बाउंस हो गए। तीन बार चेक बाउंस होने के बावजूद आरोपी ने पैसा नहीं लौटाया, बल्कि बहानेबाजी करता रहा।
पीड़ित सुरेश प्रसाद ने अब आरोपी संजय कुमार केशरी को वकालतन नोटिस भेज कर 15 दिनों के भीतर 20 लाख रुपये लौटाने की अंतिम चेतावनी दी है। नोटिस में यह भी उल्लेख है कि अगर निर्धारित समय में राशि वापस नहीं की गई तो आरोपी दंपति के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 316(2), 318(4) और N.I. Act की धारा 138 के तहत आपराधिक मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।
बहरहाल, इस प्रकरण ने यह साबित कर दिया है कि अब जमीन के लेन-देन में किसी पर भी आंख मूंद कर विश्वास करना खतरनाक हो सकता है, चाहे वह सरकारी कर्मचारी ही क्यों न हो। एक ओर पीड़ित अपने परिवार के जीवन के लिए संघर्ष कर रहा है, वहीं दूसरी ओर ठग दंपति ऐश की जिंदगी जी रहे हैं।





