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Pond Tourism Development Scheme: अब 5 एकड़ से बड़ा तालाब आपको बनाएगा धनवान!

यदि आपके पास 5 एकड़ से बड़ा तालाब है तो यह योजना आपके लिए एक बड़ा अवसर लेकर आई है। निजी तालाबों के मालिक अपने तालाब का रखरखाव और संचालन स्वयं कर सकेंगे और पर्यटन से होने वाली आय का सीधा लाभ उठा सकेंगे। वहीं सरकारी तालाबों को 5 साल की अवधि के लिए लीज पर दिया जाएगा, जिससे स्थानीय कारोबारी और समुदाय भी लाभान्वित होंगे...

नालंदा दर्पण डेस्क। बिहार सरकार एक अनूठी पहल के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने जा रही है। तालाब पर्यटन विकास योजना (Pond Tourism Development Scheme) के तहत राज्य के 5 एकड़ से बड़े तालाबों को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। इस योजना से न केवल ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे, बल्कि तालाब मालिकों को भी सालाना लाखों रुपये की कमाई का मौका मिलेगा।

बिहार सरकार का लक्ष्य है कि बड़े तालाबों के किनारों को आकर्षक पर्यटन स्थल में तब्दील किया जाए, जहां लोग परिवार और दोस्तों के साथ समय बिता सकें। इसके लिए तालाबों के आसपास बुनियादी ढांचे का विकास, हरियाली, बैठने की व्यवस्था, और मनोरंजन के साधन उपलब्ध कराए जाएंगे। यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ बिहार में वाटर टूरिज्म को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

पर्यटन विभाग और लघु जल संसाधन विभाग मिलकर इस योजना को अमलीजामा पहनाने में जुटे हैं। राज्य भर में 604 राजकीय तालाबों और पोखरों की सूची तैयार की गई है, जो 5 एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैले हैं। ये तालाब मुख्य रूप से पटना, गया, नालंदा, भागलपुर और मुजफ्फरपुर जैसे जिलों में स्थित हैं। इसके अलावा, निजी तालाब मालिक भी अपने 5 एकड़ से बड़े तालाबों को इस योजना में शामिल करने के लिए आवेदन कर सकते हैं।

यदि आपके पास 5 एकड़ से बड़ा तालाब है तो यह योजना आपके लिए एक बड़ा अवसर लेकर आई है। निजी तालाबों के मालिक अपने तालाब का रखरखाव और संचालन स्वयं कर सकेंगे और पर्यटन से होने वाली आय का सीधा लाभ उठा सकेंगे। वहीं सरकारी तालाबों को 5 साल की अवधि के लिए लीज पर दिया जाएगा, जिससे स्थानीय कारोबारी और समुदाय भी लाभान्वित होंगे।

इस योजना के तहत तालाबों को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए सरकार वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान करेगी। तालाबों के किनारे रेस्तरां, बोटिंग, पिकनिक स्पॉट और बच्चों के लिए खेल क्षेत्र जैसे आकर्षण विकसित किए जाएंगे। इससे स्थानीय स्तर पर छोटे-बड़े कारोबार को बढ़ावा मिलेगा।

बिहार सरकार पहले से ही वाटर टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठा रही है। कुढ़नी डैम, बांका, रोहतास, कैमूर और सासाराम जैसे क्षेत्रों में नदियों और झीलों के किनारों को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया गया है। अब तालाबों को शामिल कर वाटर टूरिज्म को और विस्तार देने की कोशिश की जा रही है।

यह योजना बिहार के पर्यटन मानचित्र पर ग्रामीण क्षेत्रों को प्रमुखता देगी। तालाबों के किनारे विकसित होने वाले पर्यटन स्थल न केवल स्थानीय लोगों के लिए मनोरंजन का साधन बनेंगे, बल्कि बिहार के बाहर से आने वाले पर्यटकों को भी आकर्षित करेंगे।

यदि आपके पास 5 एकड़ से बड़ा तालाब है और आप इसे इस योजना का हिस्सा बनाना चाहते हैं तो नजदीकी पर्यटन विभाग या लघु जल संसाधन विभाग के कार्यालय में संपर्क करें। तालाब का विवरण और दस्तावेज जमा करने के बाद उसे योजना में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक क्रांति ला सकती है। तालाब पर्यटन न केवल स्थानीय लोगों को रोजगार देगा, बल्कि बिहार को पर्यटन के क्षेत्र में एक नई पहचान भी दिलाएगा। साथ ही तालाबों का संरक्षण और रखरखाव सुनिश्चित होने से पर्यावरण संतुलन को भी बढ़ावा मिलेगा।

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नालंदा दर्पण (Nalanda Darpan) के संचालक-संपादक वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय (Mukesh Bhartiy) पिछले 35 वर्षों से समाचार लेखक, संपादक और संचार विशेषज्ञ के रूप में सक्रिय हैं। उन्हें समसामयिक राजनीति, सामाजिक मुद्दों, स्थानीय समाचार और क्षेत्रीय पत्रकारिता पर गहरी पकड़ और विश्लेषणात्मक अनुभव है। वे तथ्य आधारित, निष्पक्ष और भरोसेमंद रिपोर्टिंग के माध्यम से पाठकों तक ताज़ा खबरें और सटीक जानकारी पहुँचाने के लिए जाने जाते हैं। एक्सपर्ट मीडिया न्यूज़ (Expert Media News) सर्विस द्वारा प्रकाशित-प्रसारित नालंदा दर्पण (Nalanda Darpan) के माध्यम से वे स्थानीय समाचार, राजनीतिक विश्लेषण और सामाजिक सरोकारों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हैं। उनका मानना है कि स्थानीय पत्रकारिता का उद्देश्य केवल खबर देना नहीं, बल्कि सच को जिम्मेदारी, प्रमाण और जनहित के साथ सामने रखना है। ताकि एक स्वस्थ समाज और स्वच्छ व्यवस्था की परिकल्पना साकार हो सके। More »

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