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भारत-भूटान मित्रता का प्रतीक बौद्ध मंदिर का भव्य अभिषेक

राजगीर (नालंदा दर्पण)। आज राजगीर की पवित्र भूमि पर भूटान बौद्ध मंदिर का अभिषेक समारोह पूरे उत्साह और भक्ति के साथ संपन्न हुआ। इस ऐतिहासिक अवसर पर भूटान के सर्वोच्च धार्मिक गुरु महामहिम जे खेनपो ने समारोह की अध्यक्षता की। जिसमें भूटान के प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, रॉयल सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, केंद्रीय भिक्षु परिषद के सदस्य, नालंदा के जिला पदाधिकारी, पुलिस अधीक्षक सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। यह समारोह न केवल धार्मिक, बल्कि राजनयिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण रहा, जो भारत और भूटान के बीच गहरे रिश्तों को दर्शाता है।

बता दें कि भूटान मंदिर परियोजना की शुरुआत मार्च 2019 में भूटान के गृह मंत्रालय के अंतर्गत संस्कृति एवं जोङ्खा विकास विभाग द्वारा की गई थी। यह परियोजना जून 2025 में अपने पूर्ण स्वरूप में सामने आई।

भूटान की रॉयल सरकार ने इस परियोजना के लिए पूर्ण आर्थिक सहयोग प्रदान किया, जो राजगीर की पवित्र भूमि के प्रति उनके गहन सम्मान और भारत-भूटान राजनयिक संबंधों की स्वर्ण जयंती के उपलक्ष्य में शुरू की गई थी।

Grand consecration of Bhutan temple a symbol of India Bhutan friendship 3
Grand consecration of Bhutan temple, a symbol of India-Bhutan friendship

भारत सरकार ने बिहार सरकार के माध्यम से वर्ष 2011 में नालंदा जिले के राजगीर में भूटान की रॉयल सरकार को 30 वर्ष के नवीकरणीय पट्टे पर उदारतापूर्वक दो एकड़ भूमि प्रदान की। यह मंदिर न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और आध्यात्मिक एकता का प्रतीक भी है।

यह मंदिर राजगीर की प्राचीन और पवित्र भूमि पर बना है, जो बौद्ध धर्म के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र रही है। इस समारोह में उपस्थित भूटान के प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि यह मंदिर हमारे साझा मूल्यों और आध्यात्मिक विरासत का प्रतीक है। यह भारत और भूटान के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों को और गहरा करेगा।

महामहिम जे खेनपो ने अभिषेक के दौरान मंत्रोच्चारण और विशेष पूजा-अनुष्ठान किए, जो बौद्ध परंपराओं के अनुसार संपन्न हुए। समारोह में स्थानीय जनता और बौद्ध अनुयायियों की भारी भीड़ ने भी हिस्सा लिया, जिससे राजगीर का वातावरण भक्ति और उत्साह से भर गया।

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Grand consecration of Bhutan temple, a symbol of India-Bhutan friendship

यह भूटान मंदिर का डिज़ाइन भूटानी वास्तुकला का उत्कृष्ट नमूना है, जिसमें पारंपरिक भूटानी शैली के साथ आधुनिक निर्माण तकनीकों का समावेश किया गया है। मंदिर का मुख्य हॉल भगवान बुद्ध की एक भव्य प्रतिमा को समर्पित है, जो शांति और करुणा का प्रतीक है। मंदिर परिसर में ध्यान केंद्र, पुस्तकालय और सांस्कृतिक प्रदर्शनी कक्ष भी शामिल हैं, जो बौद्ध दर्शन और भूटान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करते हैं।

नालंदा के जिला पदाधिकारी ने इस अवसर पर कहा कि यह परियोजना दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और धार्मिक सहयोग का एक शानदार उदाहरण है। राजगीर में इस मंदिर का निर्माण न केवल पर्यटन को बढ़ावा देगा, बल्कि बौद्ध तीर्थयात्रियों के लिए भी एक नया आकर्षण बनेगा। यह मंदिर भारत और भूटान के बीच स्थायी मित्रता का एक जीवंत प्रतीक है।

भूटान मंदिर के अभिषेक के साथ ही यह स्थल बौद्ध तीर्थयात्रियों, शोधकर्ताओं और पर्यटकों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बनने की ओर अग्रसर है। यह मंदिर नालंदा और राजगीर के ऐतिहासिक महत्व को और अधिक उजागर करेगा। साथ ही भारत और भूटान के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देगा।

मुकेश भारतीय

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय (mukesh bhartiy) पिछले तीन दशक से राजनीति, अर्थ, अधिकार, प्रशासन, पर्यावरण, पर्यटन, धरोहर, खेल, मीडिया, कला, संस्कृति, मनोरंजन, रोजगार, सरकार आदि को लेकर स्थानीय, राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर बतौर कंटेंट राइटर-एडिटर सक्रिय हैं।

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