आंगनबाड़ी केंद्र की छत गिरने से 6 बच्चे जख्मी, 8 महीने पहले हुई थी मरम्मत
Plaster from the ceiling collapsed during class at Jaishiv Bigha Anganwadi Centre ; building was repaired just eight months ago

हिलसा (नालंदा दर्पण)। परवलपुर प्रखंड के जयशिव बिगहा गांव में स्थित आंगनबाड़ी केंद्र संख्या-6 में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब पढ़ाई के दौरान अचानक छत का निचला हिस्सा प्लास्टर समेत टूटकर नीचे गिर गया। इस हादसे में केंद्र में मौजूद आधा दर्जन छोटे बच्चे घायल हो गए। घटना के बाद बच्चों की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग दौड़े और तत्काल सभी घायलों को इलाज के लिए नजदीकी निश्चलगंज स्थित एक क्लिनिक ले जाया गया।
घायलों में जयशिव बिगहा निवासी ज्वाला पासवान के चार वर्षीय पुत्र आकाश कुमार, रवि भाष्कर पासवान की चार वर्षीय जुड़वां बेटियां अन्नू कुमारी और तन्नू कुमारी, नीतीश पासवान के तीन वर्षीय पुत्र आर्यन राज, मिथलेश पासवान के पुत्र आयुष कुमार तथा रविंद्र पासवान के पुत्र विक्रम कुमार शामिल हैं।
डॉक्टरों के अनुसार सभी बच्चों को प्राथमिक उपचार दिया गया, लेकिन चार बच्चों की हालत गंभीर होने के कारण उन्हें आगे इलाज के लिए एकंगरसराय के निजी क्लिनिक में भर्ती कराया गया। फिलहाल सभी बच्चे खतरे से बाहर बताए जा रहे हैं।
सबसे अधिक चोट आकाश कुमार कोः हादसे में सबसे ज्यादा चोट आकाश कुमार को लगी है। उसके पैर में फ्रैक्चर हो गया है, जबकि कुछ बच्चों के सिर और शरीर के अन्य हिस्सों में चोटें आई हैं। घटना के बाद बच्चों के परिजन और ग्रामीण काफी आक्रोशित दिखे। लोगों का कहना है कि यदि यह हादसा कुछ देर बाद होता, तो बड़ी दुर्घटना हो सकती थी।
आठ महीने पहले ही हुई थी मरम्मतः इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आंगनबाड़ी केंद्र की मरम्मत महज आठ महीने पहले ही कराई गई थी। जानकारी के अनुसार करीब 77 हजार रुपये की लागत से स्थानीय मुखिया द्वारा भवन की मरम्मत कराई गई थी। इसके बावजूद इतनी जल्दी छत का प्लास्टर गिर जाना निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
परवलपुर की सीडीपीओ शशिकला सिंह ने बताया कि घायल बच्चों का इलाज कराया जा रहा है और फिलहाल सभी खतरे से बाहर हैं। उन्होंने कहा कि भवन की मरम्मत कुछ महीने पहले कराई गई थी, लेकिन इसके बावजूद प्लास्टर गिरने की घटना सामने आई है, जिसकी जांच कराई जाएगी।
जिम्मेदारी को लेकर विभागों में असमंजसः घटना के बाद जिम्मेदारी को लेकर विभागीय स्तर पर भी असमंजस की स्थिति दिखाई दे रही है। परवलपुर के प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी विजय शंकर प्रसाद ने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्रों के भवन की देखरेख और रखरखाव की जिम्मेदारी बाल विकास परियोजना कार्यालय (सीडीपीओ) के पास होती है, इसलिए वही इस मामले में विस्तृत जानकारी दे सकते हैं।
ग्रामीणों में आक्रोश, जांच की मांगः हादसे के बाद ग्रामीणों और अभिभावकों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि छोटे बच्चों की सुरक्षा से इस तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि भवन निर्माण और मरम्मत कार्य की गुणवत्ता की जांच कराई जाए तथा अगर इसमें किसी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता पाई जाती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
सवालों के घेरे में ग्रामीण स्तर की निगरानी व्यवस्थाः यह घटना एक बार फिर आंगनबाड़ी केंद्रों की आधारभूत संरचना और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी भवनों के निर्माण और मरम्मत कार्य में गुणवत्ता नियंत्रण की कमी अक्सर ऐसे हादसों की वजह बनती है। यदि समय-समय पर तकनीकी निरीक्षण और सामाजिक निगरानी को सख्ती से लागू किया जाए, तो इस तरह की घटनाओं को रोका जा सकता है।
फिलहाल गांव में भय और आक्रोश का माहौल है। अभिभावक अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं और प्रशासन से त्वरित व पारदर्शी जांच की मांग कर रहे हैं। प्रशासनिक कार्रवाई और जांच रिपोर्ट से ही स्पष्ट होगा कि यह हादसा महज एक दुर्घटना था या फिर निर्माण कार्य में हुई किसी गंभीर लापरवाही का परिणाम। समाचार स्रोतः नालंदा दर्पण/मीडिया रिपोर्टस्









