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बिजली विभाग की लापरवाही का कहरः कई गांवों में गेहूं की तैयार फसल राख, लाखों का नुकसान

Electric short circuits and high winds cause massive wheat fires in Chandi, Nagarnausa, Silao, and Parbalpur villages; farmers demand compensation.

नालंदा दर्पण डेस्क। जिले के अलग-अलग प्रखंडों में बिजली विभाग की लापरवाही से शॉर्ट सर्किट और 11 हजार वोल्ट लाइन से निकली चिंगारी ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। चंडी, नगरनौसा, सिलाव और परबलपुर क्षेत्रों में अचानक लगी आग की घटनाओं में कई गांवों के खेतों में खड़ी गेहूं की तैयार फसल जलकर राख हो गई।

प्रारंभिक अनुमान के अनुसार इन घटनाओं में किसानों को लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। आग लगने की अधिकांश घटनाओं में बिजली के तारों से निकली चिंगारी को कारण बताया जा रहा है, जबकि कई स्थानों पर दमकल के देर से पहुंचने पर ग्रामीणों में नाराजगी भी देखने को मिली।

चंडी के चितरबीघा में पांच बीघा फसल राखः चंडी थाना क्षेत्र के बेलछी पंचायत अंतर्गत चितरबीघा गांव के समीप स्थित बेलछी खंदा देवी स्थान के पास गेहूं की खड़ी फसल में अचानक आग लग गई। बताया जाता है कि बिजली के शॉर्ट सर्किट से उठी चिंगारी ने देखते ही देखते खेतों में लगी फसल को अपनी चपेट में ले लिया।

इस अगलगी की घटना में अखिलेश कुमार की लगभग तीन बीघा, महेश सिंह की दस कठ्ठा, वीरमणि कुमार की बारह कठ्ठा तथा विजेंद्र सिंह की एक कठ्ठा गेहूं की फसल पूरी तरह जलकर नष्ट हो गई। प्रारंभिक आकलन के मुताबिक करीब तीन लाख रुपये की क्षति का अनुमान लगाया गया है।

घटना के बाद ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए बाल्टी, मोटर और पानी की मदद से आग बुझाने का प्रयास किया। काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते आग नहीं बुझाई जाती तो आसपास के कई अन्य खेत भी इसकी चपेट में आ सकते थे।

नगरनौसा में दमकल के देर से पहुंचने पर नाराजगीः नगरनौसा थाना क्षेत्र के मनीचक गांव के मधुवन खंधा में भी दोपहर बिजली की चिंगारी से गेहूं की फसल में आग लग गई। इस घटना में अनिरुद्ध यादव, लालू यादव और सुधीर यादव सहित चार किसानों के करीब तीन बीघा खेत में लगी गेहूं की तैयार फसल जलकर नष्ट हो गई।

ग्रामीणों का आरोप है कि सूचना देने के बावजूद अग्निशमन विभाग की टीम काफी देर से पहुंची, जिससे नुकसान बढ़ गया। इसको लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी भी देखी गई।

सिलाव के मलिकपुर में भी तीन बीघा फसल खाकः सिलाव प्रखंड के मलिकपुर गांव में भी 11 हजार वोल्ट की बिजली लाइन से निकली चिंगारी के कारण खेतों में आग लग गई। आग लगते ही ग्रामीणों ने दमकल विभाग को सूचना दी, लेकिन दमकल के पहुंचने से पहले ही करीब तीन बीघा में लगी गेहूं की तैयार फसल जलकर राख हो गई।

इस अगलगी में गांव के राजेंद्र सिंह, सुनील सिंह और मंटू सिंह की फसल पूरी तरह नष्ट हो गई। ग्रामीणों ने काफी प्रयास के बाद आग पर काबू पाया।

परबलपुर में सबसे बड़ी घटना, 40 बीघा फसल जलीः परबलपुर थाना क्षेत्र के भसिंगपुर और कटहरी बिगहा गांव में हुई अगलगी की घटना सबसे बड़ी बताई जा रही है। यहां 11 हजार वोल्ट बिजली के तार तेज हवा के कारण आपस में टकरा गए, जिससे निकली चिंगारी खेतों में गिर गई और देखते ही देखते आग फैल गई।

इस घटना में दोनों गांवों के करीब 40 बीघा खेत में लगी गेहूं की तैयार फसल जलकर बर्बाद हो गई। भसिंगपुर गांव के शंकर सिंह, राजा सिंह, अजय सिंह, संजय सिंह, शिवकुमार सिंह, बिनोद सिंह, रामचंद्र सिंह और धीरेंद्र मिश्रा समेत कई किसान प्रभावित हुए हैं। वहीं कटहरी बिगहा गांव की सुनैना देवी, रामकिशोर प्रसाद, कांति देवी, त्रिपुरारी प्रसाद, अनिल प्रसाद और संजय कुमार सहित एक दर्जन किसानों की फसल जलने की सूचना है।

ग्रामीणों ने बताया कि आग लगने के बाद किसानों और गांव के लोगों ने मिलकर आग बुझाने की कोशिश की और साथ ही दमकल को भी सूचना दी। हालांकि दमकल के पहुंचने तक काफी बड़े क्षेत्र में लगी फसल जल चुकी थी।

तैयार फसल पर संकट, मुआवजे की मांगः घटनाओं के बाद प्रभावित किसानों में मायूसी का माहौल है। किसानों का कहना है कि महीनों की मेहनत से तैयार हुई गेहूं की फसल कटाई से ठीक पहले जलकर नष्ट हो गई, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ेगा।

किसानों ने जिला प्रशासन से तत्काल सर्वे कराकर उचित मुआवजा देने की मांग की है, ताकि उन्हें हुए नुकसान की भरपाई हो सके।

हर साल दोहराई जा रही समस्याः ग्रामीणों का कहना है कि खुले और जर्जर बिजली तारों के कारण हर साल फसल में आग लगने की घटनाएं सामने आती हैं। इसके बावजूद बिजली विभाग द्वारा समय पर तारों की मरम्मत और रखरखाव नहीं किया जाता। यदि बिजली लाइनों की नियमित जांच और मरम्मत हो, तो ऐसी घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।

किसानों ने प्रशासन और बिजली विभाग से मांग की है कि खेतों के ऊपर से गुजर रही जर्जर बिजली लाइनों को तत्काल दुरुस्त कराया जाए। ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से किसानों की मेहनत और आजीविका को बचाया जा सके।

मुकेश भारतीय

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय (mukesh bhartiy) पिछले तीन दशक से राजनीति, अर्थ, अधिकार, प्रशासन, पर्यावरण, पर्यटन, धरोहर, खेल, मीडिया, कला, संस्कृति, मनोरंजन, रोजगार, सरकार आदि को लेकर स्थानीय, राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर बतौर कंटेंट राइटर-एडिटर सक्रिय हैं।

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