
नगरनौसा (नालंदा दर्पण)। ग्रामीण महिलाओं के हाथों में स्मार्टफोन अब सिर्फ बातचीत का माध्यम नहीं रह गया है, बल्कि यह डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन खरीदारी और विभिन्न सरकारी व गैर-सरकारी सेवाओं तक पहुंच का जरिया भी बन रहा है। नगरनौसा प्रखंड में जीविका से जुड़ी महिलाओं के बीच डिजिटल तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल को समझने के लिए एक विशेष प्रतिनिधिमंडल ने महिला सहकारी समितियों का भ्रमण किया।
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, बेंगलुरु, ग्राम वाणी, बिल एंड मिलिंडा गेट्स फाउंडेशन तथा पीसीआई के प्रतिनिधियों ने उत्सव जीविका महिला विकास स्वावलंबी सहकारी समिति लिमिटेड और एकता जीविका महिला विकास स्वावलंबी सहकारी समिति लिमिटेड का दौरा किया। इस दौरान प्रतिनिधियों ने स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं और जीविका कैडरों से सीधे संवाद कर उनके डिजिटल अनुभवों को समझा।
गूगल पे और फोनपे के इस्तेमाल की ली जानकारी
भ्रमण के दौरान महिलाओं से यह जानने की कोशिश की गई कि वे स्मार्टफोन का इस्तेमाल किस तरह कर रही हैं और डिजिटल माध्यमों से कौन-कौन सी सेवाएं प्राप्त कर रही हैं। प्रतिनिधियों ने विशेष रूप से गूगल पे, फोनपे सहित डिजिटल भुगतान एप्लीकेशन, ऑनलाइन खरीदारी और अन्य डिजिटल सेवाओं के उपयोग को लेकर महिलाओं से बातचीत की।
प्रतिनिधिमंडल ने यह भी समझने का प्रयास किया कि ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं डिजिटल वित्तीय सेवाओं का इस्तेमाल करते समय किन व्यवहारिक चुनौतियों का सामना करती हैं और स्मार्टफोन ने उनके रोजमर्रा के कामकाज को किस तरह प्रभावित किया है।
जीविका के डिजिटल डेटा और एमआईएस की भी पड़ताल
भ्रमण केवल महिलाओं के स्मार्टफोन उपयोग तक सीमित नहीं रहा। प्रतिनिधियों ने जीविका परियोजना में डिजिटल डेटा और एमआईएस (मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम) के इस्तेमाल की प्रक्रिया की भी जानकारी ली।
जीविका से जुड़ी दीदियों और कैडरों द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली सूचनाओं को डिजिटल माध्यम से संग्रहित करने, दर्ज करने और आगे उपयोग में लाने की प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की गई। विभिन्न एप्लीकेशन के माध्यम से सूचनाओं एवं आंकड़ों के संधारण की व्यवस्था को भी समझा गया।
बीपीएम अजय कुमार ने प्रतिनिधिमंडल को जीविका की गतिविधियों, महिला स्वयं सहायता समूहों, डिजिटल सेवाओं के उपयोग तथा डिजिटल डेटा और एमआईएस से संबंधित प्रक्रियाओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि डिजिटल माध्यमों के उपयोग से महिलाओं को विभिन्न सेवाओं तक अपेक्षाकृत आसान पहुंच मिल रही है। साथ ही, जीविका की गतिविधियों से जुड़ी सूचनाओं के संधारण और प्रबंधन में भी सुविधा हो रही है।
महिलाओं के अनुभवों से समझीं जमीनी चुनौतियां
प्रतिनिधिमंडल ने स्वयं सहायता समूह की सदस्यों और जीविका कैडरों के साथ बातचीत कर उनके वास्तविक डिजिटल अनुभवों को जाना। इस दौरान डिजिटल सेवाओं के इस्तेमाल में आने वाली व्यवहारिक कठिनाइयों, महिलाओं की जरूरतों और डिजिटल तकनीक के भविष्य में संभावित उपयोग पर भी चर्चा हुई।
भ्रमण का प्रमुख उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं के बीच डिजिटल साक्षरता, डिजिटल वित्तीय सेवाओं के इस्तेमाल और जीविका के डिजिटल डेटा एवं एमआईएस तंत्र की वास्तविक स्थिति को समझना था। इसके साथ ही प्रतिनिधियों ने इन क्षेत्रों में आगे की संभावनाओं और आवश्यकताओं की जानकारी भी जुटाई।
इस अवसर पर जिला परियोजना प्रबंधक संजय प्रसाद पासवान, क्षेत्रीय समन्वयक राजीव रंजन एवं अरबिंद कुमार सहित अन्य संबंधित कर्मी मौजूद रहे। खास बात यह रही कि इस अध्ययन में डिजिटल तकनीक को केवल सुविधा के तौर पर नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं की रोजमर्रा की आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों से जुड़ते बदलाव के रूप में समझने का प्रयास किया गया।
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