
इस्लामपुर (नालंदा दर्पण)। इस्लामपुर प्रखंड के बेशवक पंचायत के वीरा बिगहा प्राथमिक विद्यालय में नालंदा प्राधिकार जिला जज सह अध्यक्ष गुरुविन्दर सिंह मलहोत्रा, सचिव राजेश कुमार गौरव, हिलसा तालुका सेवा समिति के अध्यक्ष सह एडीजे आलोक कुमार पाण्डेय, सचिव सह एसडीजेएम शोभना स्वेतांकी के संयुक्त निर्देशन में पैनल अधिवक्ता विजय कुमार, हिलसा विधिक सहायता केन्द्र में डिपुट पाराविधिक स्वयंसेवक पीएलवी आलोक कुमार के कुशल नेतृत्व में विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया।
इस शिविर का मुख्य लक्ष्य कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न प्रतिषेध निवारण रोकथाम अधिनियम 2013 विषय पर कानूनी जागरुक करना है। पीएलवी आलोक कुमार ने नालंदा जिला विधिक सेवा प्राधिकार का गठन और उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्राधिकार का गठन वर्ष 1987 में किया गया था। लेकिन इसे 9 नवम्बर 1995 से पूरे देश में लागू हुआ है। प्राधिकार का मुख्य उद्देश्य समाज के कमजोर वर्गो जैसे निर्धन, महिलाएँ, बच्चे, अनुसूचित जाति, जनजाति और विकलांग व्यक्तियों को निःशुल्क कानूनी सहायता प्रदान करना है। इतना ही नहीं समय समय पर राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन करना है। और सुलह समझौते व मध्यस्थता के आधार पर विवादों को निपटाया जाता है। इसमे जिलाधिकारी प्राधिकार के उपाध्यक्ष, एसपी सदस्य, जिला एवं सत्र न्यायाधीश इसके अध्यक्ष और न्यायायिक अधिकारी सचिव होते हैं।
उन्होंने कहा कि कानूनी जागरूकता न केवल व्यक्तिगत अधिकारों की रक्षा करती है। बल्कि समाज में समानता और न्याय को बढ़ावा देती है। इसके लिए फ्रॉण्ट ऑफिस व ईसेवा केन्द्र का संचालन किया जा रहा है।
पैनल अधिवक्ता विजय कुमार ने कहा कि कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न रोकथाम निषेध और निवारण अधिनियम 9 दिसम्बर 2013 से प्रभाव में आया है।फेस एक्ट 2013 हमें यह सिखाता है। कि सम्मान समानता और सुरक्षा हर महिला का अधिकार है। कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न केवल एक महिला की समस्या नहीं, बल्कि समाज और कार्य संस्कृति की गंभीर चुनौती है।
उन्होंने कहा कि इस कानून का मुख्य उद्देश्य महिलाओं के लिए सुरक्षित सम्मानजनक और भयमुक्त कार्यस्थल सुनिश्चित करना है। यौन उत्पीड़न की धारा 2 (एन )के अनुसार यौन उत्पीड़न में निम्नलिखित शामिल है। शारीरिक सम्पर्क, अश्लील बातें, अश्लील चित्र, संदेश या विडियो दिखाना या भेजना, किसी महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला अभद्र व्यवहार आदि शामिल है। यह सब चाहे प्रत्यक्ष रूप से हो या ऑनलाईन या डिजिटल माध्यम से दोनों ही यौन उत्पीड़न के अन्तर्गत आते हैं।
उन्होंने कहा कि कर्मस्थल के अन्तर्गत क्या क्या आता हैं। सरकारी एवं निजी कार्यालय फैक्ट्री, दुकान, संस्थान, स्कूल कॉलेज विश्वविद्यालय, अस्पताल, नर्सिग होम आदि शामिल है। इसके लिए शिकायत समिति का गठन किया गया है। जिसमें जहाँ दस या उससे अधिक कर्मचारी हो, वहाँ आंतरिक शिकायत समिति कार्य करती है। एक स्थानीय शिकायत समिति है। जिसमें दस से कम कर्मचारी हो या असंगठित क्षेत्र हो वहाँ जिला स्तर पर इसकी समिति कार्य करती है।
उन्होंने ने शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि पीड़ित महिला घटना के 3 माह के भीतर लिखित शिकायत दर्ज कर सकती है। जाँच प्रक्रिया 90 दिनों में पूर्ण की जाती है। गोपनीयता बनाए रखना अनिवार्य है। पीड़िता को मिलने वाले अधिकार में निष्पक्ष और गोपनीय जाँच अस्थायी राहत दोषी के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाई मानसिक, आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा आदि है। महिलाओं की गरिमा की रक्षा करना, कार्यस्थल पर समानता, भयमुक्त वातावरण, न्याय तक आसान पहुँच इत्यादि कानून का महत्व को दर्शाता है। भारत का एक केन्द्रीय कानून है। महिला उत्पीड़न से जुड़ी कई धाराये हैं। जिसमें कुछ मुख्य धारायें इस प्रकार है। धारा 354 लज्जाभंग, 354ए शारीरिक सम्पर्क, 354 बी निर्वस्त्र करने का प्रयास, 354 सी अश्लील विडियो बनाना, 354 डी लगातार पीछा करना एवं धारा 509 हावभाव इशारा या लज्जा का अपमान करना इत्यादि शामिल है। हम सभी मिलकर इस कानून के प्रति जागरूक बने और एक सुरक्षित संवेदनशील एवं न्यायपूर्ण कार्यस्थल का निर्माण करें।
इस मौके पर मनोज कुमार सिंह, रामदहीन प्रसाद, संतोष कुमार वार्डसदस्य, सुनील प्रसाद, विमल कुमार, मधेश मिस्त्री, दिनेश प्रसाद, पुनम कुमारी पंचायत समिति, रेखा देवी, रीना देवी, सुनैना देवी, पिंकी कुमारी, बेबी देवी, नीलम देवी, पुनम देवी, शकुन्ती देवी पंच, संतोष कुमार आदि लोग मौजूद थे।





