चंडी इंजीनियरिंग कॉलेज की छत से गिरकर छात्रा की मौत, छात्रों रात भर उग्र प्रदर्शन

चंडी (नालंदा दर्पण)। चंडी इंजीनियरिंग कॉलेज में एक दुखद घटना ने छात्र-छात्राओं के बीच आक्रोश की आग भड़का दी। इस घटना ने न केवल कॉलेज प्रशासन की लापरवाही को उजागर किया, बल्कि पुलिस और छात्रों के बीच तनावपूर्ण टकराव को भी जन्म दिया। देर रात तक चले इस हंगामे ने पूरे क्षेत्र को रणक्षेत्र में बदल दिया।
जानकारी के अनुसार कॉलेज में पढ़ने वाली छात्रा सोनम कुमारी छत पर बैठी हुई थी। अज्ञात कारणों से वह छत से नीचे गिर गई, जिसके परिणामस्वरूप उसकी मौके पर ही मृत्यु हो गई। इस हादसे ने कॉलेज परिसर में हड़कंप मचा दिया। सोनम की सहपाठी शिखा कुमारी इस दृश्य को देखकर इतनी आघात में आ गई कि उसकी तबीयत बिगड़ गई। उसे तुरंत हायर सेंटर रेफर किया गया।

कुछ छात्रों का दावा है कि सोनम कुमारी हाल ही में परीक्षा में कम अंक प्राप्त करने के कारण तनाव में थी। हालांकि इस दावे की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इस बीच छात्र-छात्राओं ने कॉलेज प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया। उनका कहना है कि अगर कॉलेज प्रबंधन ने समय रहते घायल छात्रा को अस्पताल पहुंचाने के लिए वाहन उपलब्ध कराया होता, तो शायद सोनम की जान बच सकती थी।
छात्रों का कहना है कि घटना के बाद उन्होंने कॉलेज के प्रिंसिपल गोपालनंदन से घायल छात्रा को अस्पताल ले जाने के लिए वाहन की मांग की थी। लेकिन प्रिंसिपल ने कथित तौर पर यह कहकर मना कर दिया कि गाड़ी गंदी हो जाएगी। इस बयान ने छात्रों के गुस्से को और भड़का दिया। उनका कहना है कि प्रिंसिपल की इस असंवेदनशील टिप्पणी और लापरवाही के कारण एक कीमती जान चली गई।
सोनम की मृत्यु की खबर फैलते ही सैकड़ों छात्र-छात्राएं चंडी के रेफरल अस्पताल पहुंच गए और रात भर उग्र प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान गुस्साए छात्रों ने न केवल अस्पताल परिसर में हंगामा मचाया, बल्कि डीएसपी (विधि व्यवस्था) की गाड़ी के शीशे तोड़ दिए और एक स्कूटी को आग के हवाले कर दिया। इस दौरान पूरा स्वास्थ्य केंद्र रणक्षेत्र में तब्दील हो गया।

जैसे-जैसे स्थिति बेकाबू होती गई, नालंदा पुलिस ने प्रदर्शनकारी छात्रों को नियंत्रित करने की कोशिश की। लेकिन जब स्थिति संभलने का नाम नहीं ले रही थी, पुलिस ने कथित तौर पर बल प्रयोग किया। छात्रों का आरोप है कि पुलिस ने उन्हें दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। इस दौरान मीडियाकर्मियों को भी घटना का वीडियो बनाने से रोका गया, जिससे पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।
छात्र-छात्राओं की एकमात्र मांग है कि इस घटना के लिए जिम्मेदार प्रिंसिपल गोपालनंदन के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि प्रबंधन की लापरवाही और असंवेदनशील रवैये ने एक मासूम छात्रा की जान ले ली। छात्रों ने यह भी मांग की है कि कॉलेज में आपातकालीन स्थिति के लिए बेहतर सुविधाएं और प्रबंधन सुनिश्चित किया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न दोहराई जाएं।
घटना की सूचना मिलते ही नालंदा जिला पुलिस का पूरा महकमा रेफरल अस्पताल पहुंच गया। पुलिस ने उग्र छात्रों को समझाने की कोशिश की, लेकिन यह प्रयास रात भर बेनतीजा रहा। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को अतिरिक्त बल बुलाना पड़ा।

फिलहाल इस घटना ने पूरे चंडी इंजीनियरिंग कॉलेज परिसर में तनाव का माहौल पैदा कर दिया है। छात्रों का गुस्सा और प्रशासन की लापरवाही ने इस मामले को और गंभीर बना दिया है। लोग अब इस बात पर सवाल उठा रहे हैं कि क्या शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों की सुरक्षा और आपातकालीन प्रबंधन के लिए पर्याप्त व्यवस्था है?
इस दुखद घटना ने न केवल कॉलेज प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं, बल्कि यह भी सोचने पर मजबूर किया है कि क्या हमारे शैक्षणिक संस्थान ऐसी आपात स्थितियों के लिए तैयार हैं। प्रशासन और पुलिस से अपेक्षा है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।







