
इस्लामपुर (नालंदा दर्पण)। इस्लामपुर प्रखंड के चंधारी पंचायत अंतर्गत हनुमानगढ़ी में मकर संक्रांति के पावन अवसर पर आयोजित होने वाला पारंपरिक दो दिवसीय मेला एक बार फिर श्रद्धालुओं और ग्रामीणों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यह मेला न केवल वर्षों पुरानी परंपरा को संजोए धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि ग्रामीण संस्कृति और सामाजिक एकता का भी सजीव उदाहरण प्रस्तुत करता है।
हनुमानगढ़ी स्थित प्राचीन देवी-देवताओं के मंदिर का इतिहास काफी समृद्ध रहा है। इस मंदिर के पूर्व पुजारी स्वर्गीय चंद्रदीप त्यागी ने मकर संक्रांति के अवसर पर मेले के आयोजन के लिए अथक प्रयास किए थे।
उनके प्रयासों का ही परिणाम है कि आज यह स्थल दूर-दराज के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुका है। श्रद्धालु यहां पूजा-अर्चना कर मन्नतें मांगते हैं और मन्नत पूरी होने पर चढ़ावा अर्पित करते हैं। पुजारी के स्वर्गवास के बाद भी ग्रामीणों के सहयोग से यह परंपरा निरंतर जारी है।
मेले में इस वर्ष भी दूर-दराज से आए दुकानदारों ने अपनी दुकानों को आकर्षक ढंग से सजाया है। लकड़ी से बने फर्नीचर, घरेलू उपयोग की वस्तुएं, बच्चों के लिए रंग-बिरंगे खिलौने, झूले, गुब्बारे और मिठाइयों की दुकानों से पूरा मेला परिसर गुलजार नजर आ रहा है। बच्चों की किलकारियों और खरीदारों की चहल-पहल से मेले की रौनक और बढ़ गई है।
मनोरंजन के लिए मेले में घुड़दौड़, कुश्ती जैसी पारंपरिक प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया गया है, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग उमड़ रहे हैं। वहीं धार्मिक आयोजन के तहत 24 घंटे का अखंड कीर्तन भी सफलतापूर्वक संपन्न हुआ, जिससे पूरे क्षेत्र में भक्तिमय माहौल बना रहा।
आयोजन समिति के अनुसार मेला 14 और 15 जनवरी तक चलेगा, जबकि 16 जनवरी को विधिवत समापन किया जाएगा। मेले में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन द्वारा पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं।
पुलिस बल की तैनाती और लगातार निगरानी से श्रद्धालु बेफिक्र होकर मेले का आनंद ले रहे हैं। कुल मिलाकर हनुमानगढ़ी का यह मेला श्रद्धा, संस्कृति और सामूहिक सहयोग का जीवंत उदाहरण बनकर इस्लामपुर क्षेत्र की पहचान को और मजबूत कर रहा है।





