राजगीर में ACS एस. सिद्धार्थ का दिखा अनोखा अंदाज, लोग दंग

ACS एस. सिद्धार्थ का यह अनोखा अंदाज न केवल उनकी सादगी और सहजता को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि बड़े पद पर होने के बावजूद वे जमीन से जुड़े हुए हैं। उनका लौंगलता बनाने वाला वीडियो बिहार की संस्कृति और उनके व्यक्तित्व की एक खूबसूरत झलक पेश करता है।

ACS S. Siddharth's unique style seen in Rajgir, people stunned
ACS S. Siddharth’s unique style seen in Rajgir, people stunned

राजगीर (नालंदा दर्पण)। बिहार शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव (ACS) एस. सिद्धार्थ एक बार फिर सुर्खियों में हैं, लेकिन इस बार वजह न तो कोई नया शैक्षिक प्रयोग है और न ही कोई प्रशासनिक निर्णय। नालंदा जिले के राजगीर में उनकी एक अनोखी और दिलचस्प तस्वीर सामने आई है, जहां वे एक स्थानीय दुकान पर मशहूर बिहारी मिठाई लौंगलता बनाते और तलते नजर आए। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग उनके इस सादगी भरे और अनौपचारिक अंदाज की जमकर तारीफ कर रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार 1991 बैच के IAS अधिकारी एस. सिद्धार्थ राजगीर में एक दुकान पर चाय पीने के लिए रुके थे। इस दौरान उनकी नजर दुकान में बन रही लौंगलता पर पड़ी। चाय की चुस्की लेते हुए उन्होंने दुकानदार से लौंगलता बनाने की प्रक्रिया के बारे में पूछताछ की।

बातचीत के दौरान उनकी उत्सुकता इतनी बढ़ी कि उन्होंने खुद लौंगलता बनाने का फैसला कर लिया। इसके बाद वे दुकान के काउंटर के पीछे गए और दुकानदार के साथ मिलकर लौंगलता तैयार करने और तलने में जुट गए।

एस. सिद्धार्थ का यह अनोखा अंदाज कैमरे में कैद हो गया और देखते ही देखते उनका वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर छा गया। वीडियो में वे पूरी तन्मयता के साथ आटा गूंथते, लौंगलता की शेप बनाते और उसे कढ़ाई में तलते दिख रहे हैं।

उनके इस सादगी भरे व्यवहार ने न केवल स्थानीय लोगों को हैरान किया, बल्कि सोशल मीडिया यूजर्स भी उनकी तारीफ करते नहीं थक रहे। एक यूजर ने लिखा है कि यह देखकर दिल खुश हो गया कि इतने बड़े अधिकारी इतनी सादगी से आम लोगों के बीच घुलमिल रहे हैं। वहीं एक अन्य यूजर ने टिप्पणी की कि एस. सिद्धार्थ सर का यह अंदाज बताता है कि वे दिल से बिहारी संस्कृति से जुड़े हैं।

बता दें कि एस. सिद्धार्थ बिहार के उन IAS अधिकारियों में से एक हैं, जिनकी गिनती तेज-तर्रार और ईमानदार अफसरों में होती है। शिक्षा विभाग में अपर मुख्य सचिव के रूप में उन्होंने बिहार में कई नवाचार किए हैं, जिनमें स्कूलों में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देना और शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना शामिल है।

उनकी सादगी और जनता के बीच सहज व्यवहार ने उन्हें हमेशा चर्चा में रखा है। चाहे वह ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूलों का दौरा करना हो या स्थानीय लोगों से सीधा संवाद, एस. सिद्धार्थ का अंदाज हमेशा निराला रहा है।

वहीं उल्लेखनीय है कि लौंगलता बिहार की एक पारंपरिक मिठाई है, जिसे खासकर त्योहारों और विशेष अवसरों पर बनाया जाता है। यह मिठाई खोया, मैदा और चीनी की चाशनी से तैयार की जाती है और इसका स्वाद बिहार की मिठास को दर्शाता है। एस. सिद्धार्थ का लौंगलता बनाना न केवल उनकी जिज्ञासा को दर्शाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि वे बिहारी संस्कृति और खान-पान के प्रति कितने उत्साहित हैं।

राजगीर के स्थानीय दुकानदार, जिनकी दुकान पर यह घटना हुई, उन्होंने बताया कि हमने कभी नहीं सोचा था कि इतने बड़े अधिकारी हमारी छोटी सी दुकान पर आएंगे और लौंगलता बनाएंगे। उनके साथ बातचीत करना और उन्हें लौंगलता बनाते देखना एक यादगार अनुभव था।

वहीं, सोशल मीडिया पर लोगों ने इसे एक प्रेरणादायक उदाहरण बताया। एक यूजर ने लिखा है कि ऐसे अधिकारी दूसरों के लिए मिसाल हैं। वे न केवल अपने काम में कुशल हैं, बल्कि आम जनता के साथ भी उनका जुड़ाव गजब का है।

Nalanda Darpan

नालंदा दर्पण (Nalanda Darpan) के संचालक-संपादक वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय (Mukesh Bhartiy) पिछले 35 वर्षों से समाचार लेखक, संपादक और संचार विशेषज्ञ के रूप में सक्रिय हैं। उन्हें समसामयिक राजनीति, सामाजिक मुद्दों, स्थानीय समाचार और क्षेत्रीय पत्रकारिता पर गहरी पकड़ और विश्लेषणात्मक अनुभव है। वे तथ्य आधारित, निष्पक्ष और भरोसेमंद रिपोर्टिंग के माध्यम से पाठकों तक ताज़ा खबरें और सटीक जानकारी पहुँचाने के लिए जाने जाते हैं। एक्सपर्ट मीडिया न्यूज़ (Expert Media News) सर्विस द्वारा प्रकाशित-प्रसारित नालंदा दर्पण (Nalanda Darpan) के माध्यम से वे स्थानीय समाचार, राजनीतिक विश्लेषण और सामाजिक सरोकारों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हैं। उनका मानना है कि स्थानीय पत्रकारिता का उद्देश्य केवल खबर देना नहीं, बल्कि सच को जिम्मेदारी, प्रमाण और जनहित के साथ सामने रखना है। ताकि एक स्वस्थ समाज और स्वच्छ व्यवस्था की परिकल्पना साकार हो सके। More »

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