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इस्लामपुर में सनसनीखेज खुलासा: मिट्टी में 90 दिन बाद दबी मिली विवाहिता की लाश

इस्लामपुर (नालंदा दर्पण)। नालंदा जिले के इस्लामपुर थाना क्षेत्र में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां दहेज उत्पीड़न के आरोपों के बीच एक विवाहिता की हत्या कर शव को जमीन में दबा देने का सनसनीखेज मामला उजागर हुआ है। करीब तीन महीने बाद पुलिस ने आरोपी पति की निशानदेही पर शव बरामद किया, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है।

दहेज की मांग बनी मौत की वजह? मृतका के जहानाबाद जिले के बरझी बिगहा गांव के निवासी भाई राधव कुमार ने बताया कि उन्होंने अपनी बहन सीमा कुमारी की शादी वर्ष 2024 में इस्लामपुर के चमरबिगहा मकसुदपुर गांव निवासी अशोक कुमार के साथ अपनी हैसियत के अनुसार की थी। शादी के बाद एक पुत्र आयुष कुमार का जन्म हुआ, जिसकी उम्र महज 8 महीने है।

परिवार का आरोप है कि शादी के कुछ समय बाद से ही ससुराल पक्ष द्वारा 5 लाख रुपये की मांग को लेकर सीमा को लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था। यह प्रताड़ना धीरे-धीरे हिंसक रूप लेती गई।

23 दिसंबर को आई थी मौत की खबरः राधव कुमार के अनुसार 23 दिसंबर 2025 को उन्हें सूचना मिली कि उनकी बहन की मौत हो गई है। जब वे ससुराल पहुंचे तो घर बंद मिला और सभी लोग फरार थे। ग्रामीणों से पूछताछ में उन्हें संदेह हुआ कि उनकी बहन की हत्या कर शव को गायब कर दिया गया है। इस मामले में पति अशोक कुमार, सास-ससुर समेत कुल 9 लोगों के खिलाफ इस्लामपुर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई।

पुलिस जांच में बड़ा खुलासाः मामले की जांच कर रही दारोगा काजल कुमारी के अनुसार, पुलिस दबाव बढ़ने पर आरोपी पति अशोक कुमार ने न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया। बाद में उसे रिमांड पर लेकर पूछताछ की गई।

पूछताछ के दौरान आरोपी की निशानदेही पर 20 मार्च 2026 को सिलाव मौजा के मखमनिया बरनौसा पइन के पास उत्तर बांध क्षेत्र से जमीन में दबा हुआ सीमा कुमारी का शव बरामद किया गया। प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि हत्या के बाद साक्ष्य छिपाने के उद्देश्य से शव को मिट्टी में दफना दिया गया था।

कई सवालों के घेरे में ससुराल पक्षः इस पूरे मामले ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या यह पूरी तरह से दहेज हत्या का मामला है? क्या अन्य आरोपी भी इस साजिश में शामिल थे? घटना के बाद सभी आरोपी एक साथ फरार कैसे हो गए? पुलिस फिलहाल सभी पहलुओं की गहन जांच कर रही है और अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।

समाज के लिए चेतावनी दहेज प्रथा अब भी जानलेवा? यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि दहेज प्रथा आज भी समाज में जड़ें जमाए हुए है और महिलाओं के जीवन के लिए घातक बन रही है। कानून सख्त होने के बावजूद ऐसे मामलों में कमी नहीं आ रही है, जो सामाजिक चेतना पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

बहरहाल इस्लामपुर की यह घटना केवल एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि सामाजिक विफलता का आईना है। एक ओर जहां एक मासूम बच्चे से उसकी मां छिन गई, वहीं दूसरी ओर न्याय की राह अब भी लंबी और चुनौतीपूर्ण दिख रही है। पुलिस की कार्रवाई से उम्मीद जरूर जगी है, लेकिन असली सवाल है कि क्या ऐसी घटनाएं  कब रुकेंगी?  स्रोतः रामकुमार वर्मा/नालंदा दर्पण

Nalanda Darpan

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय (mukesh bhartiy) पिछले तीन दशक से राजनीति, अर्थ, अधिकार, प्रशासन, पर्यावरण, पर्यटन, धरोहर, खेल, मीडिया, कला, संस्कृति, मनोरंजन, रोजगार, सरकार आदि को लेकर स्थानीय, राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर बतौर कंटेंट राइटर-एडिटर सक्रिय हैं।

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