सरकारी स्कूलों की बदहाली को लेकर ACS सिद्धार्थ हुए सख्त, दिए कड़े निर्देश

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। सरकारी विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता और बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए शिक्षा विभाग ने कड़े कदम उठाए हैं। अपर मुख्य सचिव (ACS) डॉ. एस. सिद्धार्थ ने क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक और जिला शिक्षा पदाधिकारी को कड़े निर्देश दिए हैं कि सभी सरकारी स्कूलों में न्यूनतम सुविधाएं और शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। इन निर्देशों का उद्देश्य स्कूलों में व्याप्त कमियों को दूर कर बच्चों के लिए बेहतर शैक्षणिक माहौल तैयार करना है।
हाल के निरीक्षणों में कई स्कूलों में गंभीर कमियां सामने आई हैं। कई स्कूलों में बिजली की व्यवस्था नहीं है, कक्षाओं में पर्याप्त बल्ब और पंखे नहीं हैं और पेयजल की समस्या बनी हुई है। शौचालयों में बहता पानी उपलब्ध नहीं है, जिससे स्वच्छता पर सवाल उठते हैं।
इसके अलावा बेंच-डेस्क की खराब स्थिति, स्मार्ट क्लास उपकरणों का उपयोग न होना, टूटे फर्नीचर का कक्षाओं में जमा होना और कबाड़ के लिए अच्छे कमरों का दुरुपयोग जैसी समस्याएं भी उजागर हुई हैं।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि कई स्कूलों में शिक्षकों की कमी है, जिसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई और उपस्थिति पर पड़ रहा है। कुछ स्कूलों में पुस्तकालय और आईसीटी लैब की कमी भी देखी गई है, क्योंकि पर्याप्त कमरे उपलब्ध नहीं हैं।
अपर मुख्य सचिव ने जिला शिक्षा पदाधिकारी को निर्देश दिए हैं कि सभी स्कूलों में आकस्मिकता मद के तहत 50 हजार रुपये की राशि उपलब्ध कराई जाए। इस राशि का उपयोग स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं को दुरुस्त करने में किया जाएगा।
इसके साथ ही शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। प्राथमिक विद्यालयों में कम से कम 3 शिक्षक, मध्य विद्यालयों में न्यूनतम 8 शिक्षक और विषय विशेष के लिए कम से कम 1-1 शिक्षक की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है।
जिला शिक्षा पदाधिकारी को यह भी सुनिश्चित करने का जिम्मा सौंपा गया है कि सभी स्कूलों में यह राशि उपलब्ध हो और इसका उपयोग पारदर्शी तरीके से हो।
बहरहाल, शिक्षा विभाग का यह प्रयास नालंदा के सरकारी स्कूलों को नई दिशा देने की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। लेकिन इन निर्देशों का प्रभावी कार्यान्वयन जिला प्रशासन और स्कूल प्रबंधन की सक्रियता पर निर्भर करेगा।





