Home स्वास्थ्य कोरोना अलर्ट के बीच मॉडल सदर अस्पताल की बड़ी लापरवाही उजागर

कोरोना अलर्ट के बीच मॉडल सदर अस्पताल की बड़ी लापरवाही उजागर

Big negligence of Model Sadar Hospital exposed amidst Corona alert
Big negligence of Model Sadar Hospital exposed amidst Corona alert

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। देशभर में एक बार फिर कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य व्यवस्था को अलर्ट मोड में ला दिया है, लेकिन नालंदा जिले का सबसे बड़ा सरकारी मॉडल सदर अस्पताल बिहारशरीफ अभी भी मूलभूत तैयारियों में पिछड़ा नजर आ रहा है।

कोरोना के संभावित खतरे को देखते हुए जहां राज्य सरकार सभी जिलों को स्वास्थ्य संसाधनों के साथ पूरी तरह तैयार रहने का निर्देश दे चुकी है, वहीं इस अस्पताल में बीते 18 महीनों से बंद पड़े ऑक्सीजन प्लांट की स्थिति ने चिंताओं को और गहरा कर दिया है।

18 महीने से बंद है पीएम फंड से बना प्लांटः कोरोना की पहली और दूसरी लहर के दौरान पीएम केयर्स फंड से बने इस ऑक्सीजन प्लांट ने एक समय में अस्पताल के 86 बेडों पर ऑक्सीजन सप्लाई की रीढ़ की भूमिका निभाई थी।

इमरजेंसी वार्ड, एसएनसीयू, पीकू और ऑपरेशन थिएटर तक पाइपलाइन के जरिए निर्बाध ऑक्सीजन आपूर्ति होती थी। लेकिन पिछले डेढ़ साल से यह प्लांट पूरी तरह बंद पड़ा है, जिससे न केवल इमरजेंसी सेवा प्रभावित हो रही है, बल्कि अस्पताल प्रशासन को हर महीने 80 से 90 हजार रुपये की लागत से ऑक्सीजन सिलिंडर खरीदने को मजबूर होना पड़ रहा है।

टेंडर विवाद बना बाधाः मिली जानकारी के अनुसार ऑक्सीजन प्लांट का संचालन कर रहे पुराने ठेकेदार का टेंडर खत्म हो गया है। इसके बाद नया टेंडर तो जारी कर दिया गया, लेकिन नए ठेकेदार ने अभी तक काम शुरू नहीं किया है। अस्पताल के डीएस से लेकर जिला स्वास्थ्य समिति तक इस संबंध में कई बार पत्राचार किया जा चुका है, लेकिन नतीजा सिफर रहा। प्रशासनिक सुस्ती और ठेकेदार की उदासीनता मरीजों पर भारी पड़ रही है।

कोरोना केस नहीं, लेकिन अलर्ट ज़रूरीः गौरतलब है कि जिले में अब तक कोरोना संक्रमण का कोई कंफर्म केस सामने नहीं आया है, जो राहत की बात है। लेकिन विशेषज्ञों की मानें तो कोरोना की किसी भी अगली लहर से निपटने के लिए सभी अस्पतालों को पूरी तरह तैयार रहना अनिवार्य है। ऐसे में नालंदा का सबसे बड़ा अस्पताल ही ऑक्सीजन जैसी बुनियादी जरूरत में पिछड़ रहा है तो पूरे जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह लगना स्वाभाविक है।

अस्पताल प्रबंधन की सफाईः इस पूरे मामले पर अस्पताल प्रबंधक मोहम्मद इमरान ने बताया कि प्लांट को फिर से शुरू कराने के लिए लगातार विभागीय स्तर पर पत्राचार किया जा रहा है। जल्द ही समाधान की उम्मीद जताई जा रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

कोरोना की गंभीरता को देखते हुए यह आवश्यक है कि प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इस लापरवाही को गंभीरता से लें और बंद पड़े ऑक्सीजन प्लांट को अविलंब चालू कराएं, ताकि जरूरत पड़ने पर मरीजों की जान बचाई जा सके। वरना यह लापरवाही भविष्य में बड़ी त्रासदी का कारण बन सकती है।

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