बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। बिहार के सरकारी विद्यालयों में कक्षा एक से आठवीं तक की वार्षिक परीक्षा (Annual Examination) 12 से 19 मार्च के बीच आयोजित की जाएगी। परीक्षा को स्वच्छ, पारदर्शी और कदाचारमुक्त बनाने के लिए राज्य स्तर से विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। परीक्षा संचालन, वीक्षण व्यवस्था, मूल्यांकन प्रक्रिया और निगरानी तंत्र को लेकर इस बार विशेष सतर्कता बरतने का निर्देश दिया गया है।
राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) की ओर से सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि परीक्षा के दौरान निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए प्रखंड स्तर पर एक विद्यालय में कार्यरत शिक्षक को दूसरे विद्यालय में प्रतिनियुक्त किया जाएगा। इसका उद्देश्य यह है कि अपने ही विद्यालय में वीक्षण की स्थिति से उत्पन्न संभावित पक्षपात या कदाचार की आशंका को समाप्त किया जा सके।
परीक्षा के बाद अलग-अलग तरीके से होगा मूल्यांकनः निर्देश के अनुसार परीक्षा समाप्त होने के बाद कक्षा एक और दो के विद्यार्थियों का वार्षिक मूल्यांकन उनके मूल विद्यालय में ही किया जाएगा। वहीं कक्षा तीन से आठवीं तक के विद्यार्थियों की उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन संकुल केंद्रों पर किया जाएगा।
यह मूल्यांकन प्रक्रिया 19 मार्च से 24 मार्च के बीच पूरी की जाएगी। हालांकि 21 मार्च को ईद-उल-फितर और 22 मार्च को बिहार दिवस के कारण इन दो दिनों में मूल्यांकन कार्य स्थगित रहेगा। शेष दिनों में अधिकतम चार कार्य दिवस के भीतर सभी उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
प्रत्येक छात्र-छात्रा के परिणाम को विधिवत मूल्यांकन पंजी में दर्ज करना अनिवार्य किया गया है, ताकि भविष्य में शैक्षणिक प्रगति का स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध रहे।
जिला स्तर पर बनेगा नियंत्रण कक्षः वार्षिक परीक्षा के संचालन और निगरानी के लिए जिला स्तर पर विशेष नियंत्रण कक्ष स्थापित किया जाएगा। इस नियंत्रण कक्ष में स्थापना शाखा के कर्मियों, प्रखंड से संबद्ध लिपिकों, शिक्षा अभियान कार्यालय के कर्मियों और अनुमंडल स्तर के अधिकारियों को तैनात किया जाएगा।
इनकी जिम्मेदारी परीक्षा केंद्रों की गतिविधियों पर नजर रखना, किसी भी अनियमितता की सूचना तत्काल प्राप्त करना तथा आवश्यक प्रशासनिक हस्तक्षेप सुनिश्चित करना होगी।
परीक्षा कक्ष में दूरी और अनुशासन अनिवार्यः दिशा-निर्देशों के अनुसार परीक्षा कक्ष में बैठने की व्यवस्था इस प्रकार की जाएगी कि दो विद्यार्थियों के बीच कम से कम दो फीट की दूरी बनी रहे। परीक्षा कक्ष में प्रवेश से पहले विद्यार्थियों को केवल आवश्यक सामग्री पेंसिल, रबर, शार्पनर, पेन और ज्योमेट्री बॉक्स ले जाने की अनुमति होगी।
इसके अतिरिक्त किसी भी प्रकार की अन्य वस्तु परीक्षा कक्ष में ले जाना प्रतिबंधित रहेगा। यदि किसी विद्यार्थी को प्रश्न समझने में कठिनाई होती है तो वीक्षक केवल प्रश्न को स्पष्ट कर सकते हैं, लेकिन उत्तर बताने की अनुमति नहीं होगी।
एक घंटे बाद ही वॉशरूम जाने की अनुमतिः परीक्षा के दौरान अनुशासन बनाए रखने के लिए यह भी निर्देश दिया गया है कि परीक्षा शुरू होने के एक घंटे बाद ही विद्यार्थियों को वॉशरूम जाने की अनुमति दी जाएगी। हालांकि किसी विशेष परिस्थिति में वीक्षक अपने विवेक से छात्र को कक्ष से बाहर जाने की अनुमति दे सकते हैं।
परीक्षा के दौरान भी जारी रहेगा मध्याह्न भोजनः सरकारी स्कूलों में परीक्षा अवधि के दौरान भी मध्याह्न भोजन योजना बंद नहीं होगी। इसके लिए स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि बच्चों को प्रतिदिन नियमानुसार भोजन उपलब्ध कराया जाए।
निरीक्षण के दौरान अधिकारी यह भी देखेंगे कि परीक्षा में कितने विद्यार्थियों की उपस्थिति रही और उनमें से कितने बच्चों ने मध्याह्न भोजन किया। इसकी विस्तृत रिपोर्ट संबंधित विभाग को भेजी जाएगी।
शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता पर जोरः शिक्षा विभाग के इस निर्णय को विद्यालयी शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषकर शिक्षक प्रतिनियुक्ति, नियंत्रण कक्ष की स्थापना और मूल्यांकन की समयबद्ध प्रक्रिया जैसी व्यवस्थाओं से यह संकेत मिलता है कि सरकार परीक्षा प्रणाली को अधिक विश्वसनीय बनाने की दिशा में प्रयासरत है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन निर्देशों का प्रभावी ढंग से पालन किया गया तो प्राथमिक और मध्य विद्यालय स्तर पर परीक्षा व्यवस्था अधिक अनुशासित और पारदर्शी बन सकती है, जिससे विद्यार्थियों के वास्तविक शैक्षणिक स्तर का आकलन संभव हो सकेगा। स्रोतः मीडिया रिपोर्ट



