बिहार पुलिस अकादमी: सूबे को मिले 26 नए ट्रेनी DSP
बिहार पुलिस अकादमी ने देश की अग्रणी प्रशिक्षण संस्थाओं में अपनी पहचान बनाई है। आधुनिक तकनीकों और व्यापक पाठ्यक्रम के साथ यह अकादमी पुलिस अधिकारियों को न केवल शारीरिक रूप से सक्षम बनाती है, बल्कि उन्हें नैतिकता और कानून के प्रति समर्पित बनाकर समाज की सेवा के लिए तैयार करती है...

राजगीर (नालंदा दर्पण)। बिहार पुलिस अकादमी राजगीर में 67वें बैच का दीक्षांत समारोह बड़े धूमधाम और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। इस समारोह में 26 प्रशिक्षु उपाधीक्षक (डीएसपी) को सफलतापूर्वक प्रशिक्षण पूरा करने के उपरांत पदभार सौंपा गया। इनमें सात महिला अधिकारी शामिल हैं, जिनमें एक झारखंड की हैं। ये नवपदस्थापित अधिकारी अब बिहार की कानून-व्यवस्था को और सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस के महानिदेशक ए.के. अंबेडकर ने सभी पास-आउट डीएसपी को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने प्रशिक्षु अधिकारियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि एक पुलिस अधिकारी को निष्ठा, ईमानदारी और सेवा भाव के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना चाहिए। कानून, नैतिकता और सेवा भावना को ध्यान में रखते हुए आमजन के कल्याण के लिए कार्य करना जरूरी है।
उन्होंने समाज में कानून का राज स्थापित करने के लिए ईमानदारी, निष्ठा और त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही बिहार पुलिस अकादमी की व्यवस्था और प्रशिक्षण की गुणवत्ता की सराहना करते हुए बताया कि राज्य में अब तक 50000 आरक्षियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है और जुलाई से 2100 नए आरक्षियों का प्रशिक्षण शुरू होने वाला है।
महानिदेशक ने प्रशिक्षु डीएसपी को सलाह दी कि वे अपने जिला कार्यकाल के दौरान पहले के अधिकारियों के सुपरविजन और निरीक्षण टिप्पणियों का बारीकी से अध्ययन करें। ताकि किसी भी निर्दोष व्यक्ति को किसी भी कीमत पर फंसने से बचाना चाहिए।
बिहार पुलिस अकादमी के निदेशक आर. मल्हार विजी ने अकादमी की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए प्रशिक्षण की रूपरेखा और अनुशासनात्मक व्यवस्था की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान साइबर क्राइम, कम्प्यूटर फील्ड ट्रेनिंग और आपदा प्रबंधन, मानवाधिकार, तीन नए कानूनों का अध्ययन और शारीरिक दक्षता, पीटीसी के थानों में थाना स्तर का प्रशिक्षण जैसे विषयों पर विशेष ध्यान दिया गया।
निदेशक ने बताया कि इन प्रशिक्षु डीएसपी में 10 अभियंत्रण स्नातक, छह स्नातकोत्तर और एक एमबीए धारक शामिल हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि कई प्रशिक्षु, जो शुरुआत में एक किलोमीटर भी पैदल नहीं चल पाते थे, अब 10 किलोमीटर तक आसानी से चल सकते हैं।
अकादमी के प्राचार्य सह उपनिदेशक अभय कुमार लाल ने सभी प्रशिक्षु डीएसपी को कर्तव्यनिष्ठा, गोपनीयता और संविधान के प्रति निष्ठा की शपथ दिलाई। उन्होंने नवपदस्थापित अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे अपनी नई जिम्मेदारियों को पूरी ईमानदारी और सजगता के साथ निभाएंगे। समारोह का धन्यवाद ज्ञापन अकादमी के उप निदेशक (प्रशिक्षण) सुशील कुमार ने किया।
दीक्षांत समारोह में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रशिक्षु डीएसपी को पुरस्कार प्रदान किए गए। जिनमें सर्वश्रेष्ठ प्रोबेशनर अवार्ड (सीएम की पिस्तौल): पौरुष अग्रवाल , सर्वश्रेष्ठ प्रोबेशनर आउटडोर अवार्ड (डीजीपी की तलवार): मिथिलेश कुमार तिवारी, सर्वश्रेष्ठ प्रोबेशनर इंडोर अवार्ड (डीजीपी का बैटन): पौरुष अग्रवाल , सर्वश्रेष्ठ परेड कमांडर अवार्ड (निदेशक ट्रॉफी): शिवानी श्रेष्ठा शामिल हैं।
इस बैच में शामिल 26 नए डीएसपी मिथिलेश कुमार तिवारी, मो. शहनवाज अख्तर, पौरुष अग्रवाल, सुश्री ज्योति कुमारी, अभिषेक कुमार, खालिद हयात, समीर कुमार, राजन कुमार, हर्षिता रश्मि (झारखंड), सुश्री स्नेही सोनल, अब्दुर रहमान, अमरजीत तिवारी, रोशन कुमार, सुश्री इशानी सिन्हा, सन्नी दयाल, अंकित कुमार, अभिनव कुमार, विनय रंजन, अभिषेक चौबे, तरुण पाण्डेय, चित्रा कुमारी, देवाशिष हंस, सुश्री पिंकी कुमारी, मो. फैसल चाँद, रिषभ आनन्द, सुश्री शिवानी श्रेष्ठ हैं।
इस समारोह में बिहार खेल विश्वविद्यालय के कुलसचिव रजनी कांत, नालंदा एसपी भारत सोनी, अकादमी के एसपी सुशील कुमार, चंद्रप्रकाश, कामिनी बाला और आरक्षी उपाधीक्षक अजय कुमार सहित बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारी उपस्थित थे। इसके अलावा, प्रशिक्षु डीएसपी के परिजन भी समारोह में शामिल हुए।










