तेल्हाड़ा में खुला बिहार का पहला जीविका दीदी हाट, जानें खूबियाँ

हिलसा (नालंदा दर्पण)। एकंगरसराय के तेल्हाड़ा में ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने बिहार के पहले जीविका दीदी हाट का उद्घाटन किया और इसहाट न केवल नालंदा बल्कि पूरे बिहार के लिए एक ऐतिहासिक कदम बताया।

इस अवसर पर जीविका की अपर मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी अभिलाषा कुमारी शर्मा और डीपीएम संजय कुमार पासवान भी उपस्थित थे। यह हाट महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक क्रांतिकारी पहल है, जोकि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को सशक्त बनाने के सपने को साकार करती है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि यह जीविका दीदी हाट बिहार का पहला मॉडल है, जो महिलाओं को रोजगार और आर्थिक स्वतंत्रता प्रदान कर रहा है।

उन्होंने बताया कि राज्य में करीब 11 लाख महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं और जीविका के माध्यम से आत्मनिर्भर बन रही हैं। पहले यह परियोजना केवल ग्रामीण क्षेत्रों तक सीमित थी, लेकिन अब शहरी क्षेत्रों में भी इसका विस्तार हो रहा है।

यह हाट पारंपरिक ग्रामीण बाजारों से अलग है, क्योंकि इसे स्थानीय स्वयं सहायता समूहों द्वारा प्रबंधित और संचालित किया जाएगा।

अभिलाषा कुमारी शर्मा ने बताया कि हाट में – मांसाहारी उत्पादों (मछली, अंडा, चिकन) के लिए 5 दुकानें, किराना सामग्री, फल और सब्जी की दुकानें, जूस और पेय पदार्थ की दुकान, कॉस्मेटिक्स और सौंदर्य उत्पाद , जूते-चप्पल पार्लर यूनिट, जन औषधि केंद्र, सुधा डेयरी और दीदी की रसोई, सिलाई और प्रशिक्षण इकाइयां जैसा दुकानें शामिल हैं।

ये दुकानें न केवल उपभोक्ताओं को साफ-सुथरे और पौष्टिक उत्पाद उपलब्ध कराएंगी, बल्कि स्थानीय किसानों और महिलाओं को अपने उत्पादों को बेचने का मंच भी प्रदान करेंगी।

जीविका दीदी हाट की एक और खासियत यह है कि इसे आंगनबाड़ी केंद्रों और स्कूलों के लिए यूनिफॉर्म सिलाई का जिम्मा सौंपा गया है। शिक्षा विभाग के सहयोग से कक्षा 1 से 5 तक के छात्र-छात्राओं की ड्रेस जीविका समूहों द्वारा तैयार की जाएगी। इसके अलावा अंचल और प्रखंड स्तर पर सफाई की जिम्मेदारी भी जीविका दीदियों को दी गई है।

बहरहाल, जीविका दीदी हाट महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है। उम्मीद है कि यह पहल न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल देगी, बल्कि बिहार की महिलाओं को आत्मनिर्भरता की नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी।

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