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बिहारशरीफ मॉडल हॉस्पिटल: 22 लाख की लिफ्ट 22 दिन भी नहीं चली !

Biharsharif Model Hospital: Lift worth Rs 22 lakhs did not last even 22 days!
Biharsharif Model Hospital: Lift worth Rs 22 lakhs did not last even 22 days!

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। बिहारशरीफ मॉडल हॉस्पिटल में मरीजों के लिए बनाई गई लिफ्ट सुविधा अब उनके लिए सिरदर्द बन चुकी है। अस्पताल परिसर में स्थापित तीनों लिफ्ट पूरी तरह खराब हो चुकी हैं, जिससे मरीजों खासकर गर्भवती महिलाओं, वृद्धों और आपातकालीन मामलों में भारी परेशानी हो रही है। दूसरी और तीसरी मंजिल पर जांच और इलाज के लिए सीढ़ियों का सहारा लेना पड़ रहा है, जो कई मरीजों के लिए जोखिम भरा साबित हो रहा है।

अस्पताल प्रबंधन ने लिफ्ट के दुरुपयोग को रोकने के लिए मरीजों और चिकित्सकों को छोड़कर अन्य लोगों के लिए लिफ्ट के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया है। फिर भी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। अस्पताल प्रबंधक के अनुसार तीन में से एक लिफ्ट चालू है, लेकिन इसे केवल आपातकालीन उपयोग के लिए आरक्षित रखा गया है। शेष दो लिफ्टों की मरम्मत के लिए एजेंसी से तकनीकी टीम बुलाई गई है, लेकिन मरम्मत के बाद भी लिफ्ट दो-तीन दिन में फिर से खराब हो जाती है। बार-बार होने वाली यह खराबी मशीनों की गुणवत्ता पर सवाल उठाती है।

हालांकि यह कोई नई बात नहीं है। सदर अस्पताल में भी सांसद निधि से 22 लाख रुपये की लागत से लगाई गई लिफ्ट 22 दिन से ज्यादा ठीक से नहीं चल सकी। इसके रखरखाव पर अतिरिक्त एक लाख रुपये खर्च किए गए, लेकिन आज वह लिफ्ट मात्र शोभा की वस्तु बनकर रह गई है।

मॉडल हॉस्पिटल में लिफ्ट लगाने का उद्देश्य मरीजों विशेषकर गर्भवती महिलाओं और वृद्धों के लिए सुविधा प्रदान करना था। लेकिन अब यह सुविधा खुद एक बड़ी समस्या बन गई है। ऐसी परियोजनाओं में गुणवत्ता और रखरखाव की योजना शुरू से ही सुनिश्चित करनी चाहिए थी।

लिफ्ट के उपयोग को नियंत्रित करने के लिए प्रशिक्षु एएनएम छात्रों और अस्पताल कर्मचारियों को लिफ्ट में प्रवेश से रोकने के लिए गार्ड तैनात किए गए हैं। फिर भी पिछले 20 दिनों से केवल एक लिफ्ट कार्यशील थी, जिस पर मरीजों, डॉक्टरों, तीमारदारों और कर्मचारियों का दबाव इतना बढ़ गया कि सोमवार को वह भी खराब हो गई। यह स्थिति प्रबंधन की निगरानी और योजना में कमी को दर्शाती है।

मरीजों और स्थानीय लोगों में चिकित्सा व्यवस्था को लेकर आक्रोश बढ़ रहा है। सवाल उठ रहे हैं कि जब इतनी महंगी मशीनें बार-बार खराब हो रही हैं तो जाहिर है कि उनकी गुणवत्ता की जांच ठीक नहीं की गई थी और मेंटेनेंस एजेंसी की निगरानी के लिए कोई प्रभावी तंत्र मौजूद नहीं है।

स्थानीय लोग और मरीज अब स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि लिफ्ट की मरम्मत के साथ-साथ इस समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाए। मरीजों का कहना है कि बार-बार की परेशानियों से न केवल उनका समय बर्बाद होता है, बल्कि आपातकालीन स्थिति में उनकी जान को भी खतरा हो सकता है। प्रशासन को ऐसी सुविधाओं के लिए दीर्घकालिक योजना बनानी चाहिए, जैसे कि नियमित रखरखाव और गुणवत्ता जांच होनी चाहिए।

सच पूछिए तो बिहारशरीफ मॉडल हॉस्पिटल में लिफ्ट की समस्या केवल एक तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं में प्रबंधन और जवाबदेही की कमी का प्रतीक है। यह स्थिति न केवल मरीजों के लिए असुविधा का कारण बन रही है, बल्कि स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठा रही है।

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