Wednesday, February 11, 2026
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    BPSC TRE-2 पेपर लीकः जानें कब, कहां और कैसे उड़ाए गए थे प्रश्नपत्र

    बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की BPSC TRE-2 परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक मामले में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। यह पेपर सराय और मुजफ्फरपुर के बीच एक पिकअप वैन से चोरी किया गया था। इस पूरे घटनाक्रम के पीछे पेपर लीक माफिया संजीव उर्फ लुटन मुखिया की मिलीभगत से शिवकांत सिंह और उसके साथी राहुल का हाथ सामने आया है।

    बिहार आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की टीम द्वारा दायर की गई चार्जशीट के अनुसार भोजपुर का शिवकांत सिंह और राहुल पटना से मोतिहारी के लिए BPSC TRE-2 का प्रश्नपत्र लेकर निकले थे। उनके साथ प्रश्नपत्र का एक बॉक्स था। जिसे सुरक्षा के साथ ट्रांस्पोर्ट किया जा रहा था। लेकिन सराय टोल प्लाजा पर पहुंचते ही स्थिति बदल गई।

    टोल प्लाजा पर एक स्कॉर्पियो और अल्ट्रोज़ कार, जिन पर बिहार सरकार का स्टीकर लगा हुआ था, वह वहां पहले से मौजूद थीं। राहुल ने गाड़ी रुकवाई और इन गाड़ियों से 6-7 लोग उतरकर प्रश्नपत्र का बॉक्स पिकअप से निकालकर स्कॉर्पियो में रख दिया। इसके बाद सुमित नामक एक व्यक्ति पिकअप में बैठ गया और बाकी लोग स्कॉर्पियो और अल्ट्रोज़ लेकर आगे बढ़ गए।

    उसके बाद शिवकांत और सुमित पिकअप वैन लेकर मोतिहारी के लिए रवाना हो गए। जब वे मुजफ्फरपुर के रामदयालु चौक पर पहुंचे तो वहां स्कॉर्पियो और अल्ट्रोज पहले से खड़ी थीं। यहां फिर से पेपर बॉक्स को वापस पिकअप में रख दिया गया। इसके बाद पेपर को सुरक्षित मोतिहारी के डीएम ऑफिस तक पहुंचाया गया। जहां उसे परीक्षा से पहले खोलकर लीक किया गया।

    शिवकांत ने पुलिस को बताया कि पेपर लीक करने के बदले राहुल ने उसे 5 हजार रुपये दिए थे। इसके अलावा रामनिवास चौधरी ने भी EOU बताया है कि 2023 के दिसंबर महीने में राहुल ने उसे गाड़ी के भाड़े के साथ-साथ 8 हजार रुपये अतिरिक्त दिए थे। ताकि पेपर की चोरी आसानी से हो सके। TRE-2 ही नहीं, बल्कि TRE-3 में भी इसी तरह से प्रश्नपत्र लीक कराया गया था।

    यह सब EOU द्वारा जांच के बाद इस पूरे मामले का पर्दाफाश हुआ है। पाया गया है कि इस पेपर लीक मामले में कई बड़े नाम शामिल थे। यह मामला बिहार की परीक्षा प्रणाली और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।

    इस तरह के संगठित अपराध से छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया गया है। यह पेपर लीक कांड न सिर्फ शिक्षा प्रणाली के लिए, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र के लिए भी एक गंभीर चुनौती है।

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