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इस्लामपुर नगर में अतिक्रमण पर फिर चला खानापूर्ति का बुलडोजर !

एक बार फिर नगर परिषद और पुलिस प्रशासन ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए बुलडोजर चलाकर अतिक्रमण हटाने का 'अभियान' शुरू किया। लेकिन सवाल ये उठता है कि क्या यह भी हर बार की तरह केवल 'खानापूर्ति' बनकर रह जाएगा....?

इस्लामपुर (नालंदा दर्पण)। इस्लामपुर नगर परिषद क्षेत्र में अतिक्रमण की समस्या कोई नई नहीं है। फुटपाथों पर दुकानें, सड़कों पर टेम्पू-टोटो की कतारें और नाले के ऊपर से सड़क तक फैल चुकी गुमटियों ने नगर की सूरत बिगाड़ दी है। हर दिन की कहानी जाम और हादसों से शुरू होकर प्रशासन की चेतावनियों पर खत्म होती रही है। एक बार फिर नगर परिषद और पुलिस प्रशासन ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए बुलडोजर चलाकर अतिक्रमण हटाने का ‘अभियान’ शुरू किया। लेकिन सवाल ये उठता है कि क्या यह भी हर बार की तरह केवल ‘खानापूर्ति’ बनकर रह जाएगा?

सूत्रों के अनुसार अतिक्रमण हटाने से पहले नगर परिषद द्वारा लाउडस्पीकर के जरिए सूचना प्रसारित की गई थी कि सुबह आठ बजे तक स्वयं अतिक्रमण हटा लिया जाए, अन्यथा जबरन कार्रवाई होगी। निर्धारित समय सीमा के बाद दोपहर करीब 12 बजे नगर प्रशासन ने पटना रोड पर बुलडोजर चलवा दिया। इस कार्रवाई में कई गुमटियों, ठेलों और सड़क पर अतिक्रमण कर बैठे दुकानदारों को हटाया गया।

नगर क्षेत्र में लगातार बढ़ रहे अतिक्रमण के चलते आमजन का जीना दूभर हो गया था। फुटपाथों पर तो मानो आम लोगों के लिए कोई जगह बची ही नहीं थी। सड़क किनारे के नाले तक सीमित रहने की हिदायत को नकारते हुए दुकानें सड़कों के बीचों-बीच तक फैल चुकी थीं। टोटो और टेम्पू चालकों ने भी यातायात व्यवस्था को तार-तार कर रखा था। राहगीरों को अक्सर जाम में फंसकर परेशानी उठानी पड़ती थी और कई बार दुर्घटनाएं भी घट चुकी हैं।

यह भी कोई पहला मौका नहीं था, जब इस्लामपुर में अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई हुई हो। पिछले साल सितंबर में भी अनुमंडल पदाधिकारी हिलसा के निर्देश पर नगर परिषद ने पटना रोड, गौरव नगर, मलिक सराय एवं निचली बाजार इलाके में इसी तरह का अभियान चलाया था। लेकिन अफसोस की बात यह है कि हर बार कुछ दिनों की ‘सफाई’ के बाद अतिक्रमण फिर से पनप जाता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नगर परिषद वास्तव में अतिक्रमण पर लगाम लगाना चाहती है, तो उसे नियमित निगरानी करनी होगी। केवल बुलडोजर चला देने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकता। प्रशासन को ऐसे स्थायी उपाय करने होंगे, जिससे दुकानदार तय सीमा के भीतर ही रहें और सड़कें आम जनता के लिए खुली रहें।

अब देखना यह है कि इस बार का बुलडोजर अभियान भी बीते अभियानों की तरह कुछ दिनों की सुर्खी बनकर रह जाएगा या वास्तव में नगर परिषद इस पर गंभीर पहल कर इसे स्थायी समाधान की ओर ले जाएगी।

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