मुख्यमंत्री कलाकार पेंशन योजना: वरिष्ठ कलाकारों को प्रतिमाह 3000 मिलेंगे

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। बिहार सरकार ने मुख्यमंत्री कलाकार पेंशन योजना की शुरुआत की है। इस योजना का उद्देश्य जिले के आर्थिक रूप से विपन्न और 50 वर्ष या उससे अधिक आयु के कलाकारों को आर्थिक सहायता प्रदान करना है। इस योजना के तहत पारंपरिक, शास्त्रीय, चाक्षुष और प्रदर्श कलाओं से जुड़े कलाकारों को प्रतिमाह 3000 रुपये की पेंशन दी जाएगी।

नालंदा अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है। यहाँ के लोक नृत्य, संगीत, चित्रकला और हस्तशिल्प ने न केवल बिहार, बल्कि पूरे देश में अपनी पहचान बनाई है। लेकिन कई बार इन कलाओं को जीवित रखने वाले कलाकार आर्थिक तंगी के कारण उपेक्षित रह जाते हैं। इस योजना का लक्ष्य ऐसे ही कलाकारों को न केवल आर्थिक सहायता देना है, बल्कि उनकी कला को संरक्षित कर उनके जीवन को सम्मानजनक बनाना भी है।

इस योजना के तहत नालंदा जिले के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में रहने वाले सभी पात्र कलाकार आवेदन कर सकते हैं। आवेदकों को अपने सभी आवश्यक प्रमाण पत्रों के साथ आवेदन पत्र जिला पदाधिकारी के कार्यालय में जमा करना होगा। आवेदनों की जांच के लिए जिला पदाधिकारी कुंदन कुमार की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया है। यह समिति योग्य उम्मीदवारों की अनुशंसा कला, संस्कृति और युवा विभाग को भेजेगी।

जिला पदाधिकारी कुंदन कुमार ने इस योजना को गति देने के लिए जिला संस्कृति और युवा विभाग को व्यापक प्रचार-प्रसार का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य है कि प्रत्येक प्रखंड और पंचायत स्तर पर योग्य कलाकारों की पहचान हो और उन्हें समय पर सहायता मिले। यह योजना नालंदा की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने और हमारे कलाकारों को सम्मान देने का एक प्रयास है।

जिला प्रशासन ने इस योजना को हर कोने तक पहुँचाने के लिए प्रखंड और पंचायत स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने का फैसला किया है। कला, संस्कृति और युवा विभाग को निर्देश दिया गया है कि वे स्थानीय कलाकारों तक इस योजना की जानकारी पहुँचाएँ और उन्हें आवेदन के लिए प्रोत्साहित करें। यह कदम सुनिश्चित करेगा कि कोई भी पात्र कलाकार इस अवसर से वंचित न रहे।

वेशक यह योजना न केवल आर्थिक सहायता का माध्यम है, बल्कि नालंदा के उन गुमनाम नायकों को सम्मान देने का भी एक प्रयास है, जिन्होंने अपनी कला के माध्यम से समाज को समृद्ध किया है। चाहे वह बाबनबूटी कला हो, लोक नृत्य हो या स्थानीय गीत संगीत की मधुर धुनें, इनसे जुड़े कलाकार हमारी सांस्कृतिक पहचान के आधार हैं।

यदि आप या आपके जानने वाले कोई कलाकार इस योजना के पात्र हैं तो तुरंत अपने सभी दस्तावेज तैयार करें और जिला पदाधिकारी कार्यालय में आवेदन जमा करें।

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