विद्यालय सचिव और HM की जंग में बंद हुआ बच्चों की MDM

हिलसा (नालंदा दर्पण)। थरथरी प्रखंड के अतवल चक स्थित प्राथमिक विद्यालय में चल रहा एक अनोखा विवाद अब बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य (MDM) पर भारी पड़ रहा है। स्कूल की प्रधानाध्यापिका और विद्यालय सचिव के बीच आपसी तनातनी के चलते पिछले तीन दिनों से मध्याह्न भोजन योजना (एमडीएम) पूरी तरह ठप है। इसका सीधा असर स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों पर पड़ा है, जो भूखे पेट पढ़ाई करने को मजबूर हैं। इस विवाद ने न केवल बच्चों की उपस्थिति को प्रभावित किया है, बल्कि अभिभावकों में भी गहरी नाराजगी पैदा कर दी है।

विद्यालय सचिव उषा देवी और प्रधानाध्यापिका रिंकू कुमारी के बीच तनाव का मुख्य कारण एमडीएम से संबंधित एडवाइस पर हस्ताक्षर को लेकर है। सचिव उषा देवी का आरोप है कि प्रधानाध्यापिका उन्हें स्कूल परिसर में हस्ताक्षर करने की बजाय बाहर बुलाकर सादा कागज पर हस्ताक्षर करवाती हैं।

दूसरी ओर प्रधानाध्यापिका रिंकू कुमारी का कहना है कि सचिव द्वारा एडवाइस पर हस्ताक्षर न करने के कारण जून, जुलाई और अगस्त माह के एडवाइस लैप्स हो गए हैं। इस वजह से मध्याह्न भोजन योजना का संचालन रुक गया है। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाते हुए अपनी बात को सही ठहराने की कोशिश की है, लेकिन इसका खामियाजा मासूम बच्चों को भुगतना पड़ रहा है।

मध्याह्न भोजन के बंद होने से स्कूल में बच्चों की उपस्थिति में भारी कमी आई है। स्कूल में आधे से अधिक बच्चे अनुपस्थित हैं। बच्चों का कहना है कि दोपहर में भोजन न मिलने से पढ़ाई में उनका ध्यान नहीं लग रहा। एक छात्र ने बताया कि वह पेट भूखा रहता है तो किताबों में मन कहाँ लगता है?

अभिभावकों का भी यही दर्द है। एक अभिभावक ने गुस्से में कहा कि शिक्षा विभाग को शिकायत किए कई दिन हो गए, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। बच्चों की पढ़ाई और सेहत दोनों पर बुरा असर पड़ रहा है।

मध्याह्न भोजन योजना के प्रभारी ने बताया कि उन्हें बच्चों को भोजन न मिलने की सूचना मिलने पर स्कूल का दौरा किया गया। उन्होंने पाया कि दोनों पक्ष एक-दूसरे पर हस्ताक्षर न करने का आरोप लगा रहे हैं। प्रभारी ने कहा कि हमने इसकी सूचना उच्च अधिकारियों को दे दी है, लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं निकला है।

बहरहाल, स्कूल में भोजन न मिलने से बच्चे भूखे पेट घर लौट रहे हैं। अभिभावकों का कहना है कि मध्याह्न भोजन योजना बच्चों के लिए केवल भोजन का साधन नहीं, बल्कि स्कूल आने की प्रेरणा भी है। शिक्षा विभाग की इस मामले में अब तक की निष्क्रियता से सवाल उठ रहे हैं। अगर समय रहते इस विवाद को सुलझा लिया जाता तो बच्चों को इस स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता।

शिक्षा विभाग को चाहिए कि वह दोनों पक्षों की जांच कर मध्याह्न भोजन योजना को जल्द से जल्द बहाल करे। साथ ही भविष्य में इस तरह की समस्याओं से बचने के लिए स्कूल प्रशासन और सचिव के बीच स्पष्ट दिशा-निर्देश और जिम्मेदारियों का निर्धारण किया जाए।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

ट्रेंडिंग न्यूज