बिहारशरीफ में प्रॉपर्टी डीलर के घर पुलिस छापेमारी पर विवाद गहराया

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। बिहारशरीफ नगर के लहेरी थाना क्षेत्र अंतर्गत मेहरपर मोहल्ले में एक प्रॉपर्टी डीलर के घर पर पुलिस द्वारा की गई अचानक छापेमारी ने स्थानीय लोगों में हड़कंप मचा दिया। करीब दो घंटे तक चले इस तलाशी अभियान में पुलिस को कुछ भी बरामद नहीं हुआ, लेकिन घर का सामान बिखेर दिया गया, जिससे परिवार भयभीत और आक्रोशित है। इस घटना ने न केवल मोहल्ले में चर्चा का विषय बन गया है, बल्कि पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार लहेरी थानाध्यक्ष रंजीत कुमार रजक के नेतृत्व में तीन गाड़ियों में सवार पुलिस टीम प्रॉपर्टी डीलर रवींद्र प्रसाद उर्फ रवि यादव के घर पर सुबह के समय पहुंची। पुलिस ने बिना कोई पूर्व सूचना या दस्तावेज दिखाए घर की तलाशी शुरू कर दी।
सूत्रों के अनुसार पुलिस को अवैध हथियारों की गुप्त सूचना मिली थी, जिसके आधार पर यह कार्रवाई की गई। हालांकि तलाशी में कोई भी आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई।
प्रॉपर्टी डीलर रवींद्र प्रसाद ने नालंदा दर्पण से बातचीत में अपनी व्यथा साझा की और कहा, “अचानक पुलिस दल मेरे घर के दरवाजे पर पहुंचा और बिना कोई दस्तावेज दिखाए तलाशी शुरू कर दी। मैंने बार-बार पूछा कि कार्रवाई का कारण क्या है, लेकिन मुझे कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। मैं एक वैध कारोबारी हूं। मेरे खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं है, न ही कोई 107 की प्रक्रिया चल रही है।”
रवींद्र ने आगे बताया कि इस कार्रवाई से उनके बच्चे डरे-सहमे हैं और मोहल्ले में उनकी छवि को अपराधी जैसा चित्रित किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “पुलिस ने पूरे घर का सामान अस्त-व्यस्त कर दिया। मेरे परिवार को मानसिक तनाव से गुजरना पड़ रहा है। मोहल्ले में मेरी इज्जत को धूमिल कर दिया गया, जबकि मैं पूरी तरह निर्दोष हूं।”
इस मामले पर लहेरी थानाध्यक्ष रंजीत कुमार रजक ने सफाई देते हुए कहा, “हमें गुप्त सूचना मिली थी कि उक्त स्थान पर अवैध हथियार रखे गए हैं। इसी आधार पर छापेमारी की गई थी। हालांकि, तलाशी में कुछ भी बरामद नहीं हुआ। हमारी कार्रवाई नियमों के तहत थी और सूचना के आधार पर की गई थी।”
अब मेहरपर मोहल्ले के निवासियों में इस छापेमारी को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। कुछ लोगों का मानना है कि पुलिस को ऐसी कार्रवाई से पहले ठोस सबूत जुटाने चाहिए, ताकि निर्दोष लोगों को परेशानी न हो।
एक स्थानीय निवासी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “पुलिस की कार्रवाई से मोहल्ले में डर का माहौल बन गया है। अगर कुछ बरामद नहीं हुआ तो इतनी बड़ी कार्रवाई की क्या जरूरत थी? यह आम लोगों के बीच पुलिस की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है।”
इस घटना ने कई सवाल खड़े किए हैं। क्या पुलिस को केवल गुप्त सूचना के आधार पर बिना ठोस सबूत के किसी के घर में तलाशी लेने का अधिकार है? क्या ऐसी कार्रवाइयों से आम नागरिकों के अधिकारों का हनन नहीं होता?
रवींद्र प्रसाद ने इस मामले में कानूनी कार्रवाई की बात कही है। उन्होंने बताया कि वे इस छापेमारी के खिलाफ उच्च अधिकारियों से शिकायत करेंगे और अपनी छवि को हुए नुकसान की भरपाई के लिए कानूनी रास्ता अपनाएंगे।
बहरहाल, जहां एक ओर पुलिस का कहना है कि वे अपनी ड्यूटी कर रहे थे, वहीं दूसरी ओर एक आम नागरिक का परिवार मानसिक और सामाजिक तनाव से जूझ रहा है। इस मामले का सच क्या है? यह तो जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। लेकिन यह घटना चर्चा का विषय बनी हुई है।





