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Cyber ​​fraud: जीविका दीदियों से आधार केवाईसी के नाम पर लाखों की चपत

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। बिहार सरकार की मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत जीविका दीदियों को दी जा रही आर्थिक सहायता अब साइबर ठगों (Cyber ​​fraud) के निशाने पर आ गई है। अस्थावां प्रखंड क्षेत्र के गिलानी गांव में आधार केवाईसी के नाम पर साइबर ठगी का एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसने इलाके की सैकड़ों महिलाओं को दहशत में डाल दिया है। इस घटना ने न केवल जीविका दीदियों की मेहनत की कमाई को जोखिम में डाला है, बल्कि सरकारी योजनाओं के डिजिटल कार्यान्वयन की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े किए हैं।

मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत प्रत्येक लाभार्थी महिला को पहली किस्त के रूप में 10,000 रुपये की राशि उनके बैंक खाते में ट्रांसफर की जा रही है। इस प्रक्रिया के लिए लाभार्थियों को अपने आधार नंबर को मोबाइल नंबर से लिंक कराना अनिवार्य है।

इसी प्रक्रिया को पूरा करने के लिए अस्थावां प्रखंड के बहादुरपुर मोड़ पर स्थित एक साइबर कैफे में कई महिलाएं पहुंचीं, जहां उनके साथ ठगी की गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार, अब तक 11 जीविका दीदियों के बैंक खातों से लाखों रुपये की अवैध निकासी की पुष्टि हो चुकी है। ठगी के शिकार हुई कुछ महिलाओं के नाम और राशि सुनीता देवी: 20,000 रुपये, रूबी देवी: 29,000 रुपये, सरोज देवी: 4,000 रुपये , पूजा कुमारी: 9,000 रुपये, नीरो देवी: 600 रुपये, सुनीता देवी (दूसरी बार): 10,000 रुपये, पूजा देवी: 4,000 रुपये बताई जाती हैं।

आरोप है कि बहादुरपुर मोड़ पर स्थित साइबर कैफे, जोकि भैरोबीघा गांव के निवासी मनीष कुमार द्वारा संचालित किया जाता है, इस ठगी का केंद्र रहा। मनीष कुमार स्थानीय स्तर पर अपने ननिहाल में रहकर ट्यूशन पढ़ाने के साथ आधार से संबंधित कार्य भी करता है।

पीड़ित महिलाओं का कहना है कि कैफे में आधार लिंक कराने के दौरान उनकी निजी जानकारी, जैसे- आधार नंबर, बैंक खाता विवरण और ओटीपी का दुरुपयोग किया गया। इस जानकारी का उपयोग कर उनके खातों से रकम निकाली गई।

सीसीएम (कम्युनिटी कोऑर्डिनेटर मैनेजर) पूजा कुमारी ने बताया कि अस्थावां प्रखंड में कुल 600 जीविका दीदियाँ सक्रिय हैं, जिनमें से लगभग 300 महिलाएँ इस साइबर कैफे में आधार लिंक कराने गई थीं। ये महिलाएँ 3 विलेज ऑर्गेनाइजेशन (वीओ) के अंतर्गत संचालित 42 समूहों से जुड़ी हुई हैं। इस घटना ने न केवल इन महिलाओं की आर्थिक स्थिति को प्रभावित किया है, बल्कि उनके विश्वास को भी ठेस पहुँचाई है।

अस्थावां थाना पुलिस ने घटना की जानकारी मिलते ही जांच शुरू कर दी गई है। आशंका है कि अन्य महिलाएँ भी इस ठगी का शिकार हो सकती हैं। पुलिस ने सभी जीविका दीदियों को सलाह दी है कि वे अपने बैंक खातों की जाँच करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की स्थिति में तुरंत अपने बैंक शाखा से संपर्क करें।

मध्य बिहार ग्रामीण बैंक के शाखा प्रबंधक के अनुसार कुछ महिलाओं ने मौखिक रूप से अवैध निकासी की शिकायत की है, लेकिन अभी तक कोई लिखित शिकायत दर्ज नहीं हुई है। उन्होंने महिलाओं से अपील की है कि वे जल्द से जल्द लिखित शिकायत दर्ज कराएँ ताकि इस मामले में उचित कार्रवाई की जा सके।

यह घटना डिजिटल लेनदेन और आधार आधारित सेवाओं में सावधानी की आवश्यकता को रेखांकित करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि साइबर ठगी से बचने के लिए कई उपाय अपनाए जा सकते हैं।

आधार नंबर, बैंक खाता विवरण, ओटीपी या पासवर्ड किसी के साथ साझा न करें। आधार लिंक या केवाईसी के लिए केवल अधिकृत बैंकों या सरकारी केंद्रों पर जाएँ। अपने खाते में होने वाली गतिविधियों पर नजर रखें और संदिग्ध लेनदेन की तुरंत सूचना दें।  साइबर ठगी के तरीकों के बारे में जानकारी रखें और दूसरों को भी शिक्षित करें।

यह घटना न केवल जीविका दीदियों की आर्थिक स्थिति पर असर डाल रही है, बल्कि उनके आत्मविश्वास और सरकारी योजनाओं पर भरोसे को भी कमजोर कर रही है। जीविका दीदियाँ, जो अपने परिवार और समुदाय के लिए आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में काम कर रही हैं, अब इस ठगी के कारण डरी हुई हैं।

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