Home तकनीक Data entry: इन 98 स्कूलों पर होगी बड़ी कार्रवाई की चेतावनी

Data entry: इन 98 स्कूलों पर होगी बड़ी कार्रवाई की चेतावनी

Data entry: Major action will be taken against these 98 schools

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। नालंदा जिले के 98 सरकारी और निजी स्कूलों के प्रधानाध्यापकों पर डाटा इंट्री (Data entry) को लेकर शिक्षा विभाग का शिकंजा कसता नजर आ रहा है। इन स्कूलों ने अब तक अपने छात्र-छात्राओं का डाटा ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर अपलोड नहीं किया है, जिसे लेकर जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (योजना एवं लेखा) मो. शाहनवाज ने सख्त रुख अपनाया है।

उन्होंने सभी संबंधित प्रधानाध्यापकों को 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए स्पष्टीकरण माँगा है और चेतावनी दी है कि जवाब न देने पर वेतन कटौती और अनुशासनिक कार्रवाई हो सकती है।

जिला शिक्षा विभाग ने 25 अगस्त तक सभी स्कूलों को अपने नामांकित छात्रों का डाटा ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर अपलोड करने और इसे बीईओ (ब्लॉक शिक्षा अधिकारी) के लॉगिन पर सबमिट करने का निर्देश दिया था।

इसके बाद भी कई स्कूलों को बार-बार याद दिलाया गया, लेकिन 30 अगस्त तक 98 स्कूलों ने इस निर्देश का पालन नहीं किया। मो. शाहनवाज ने इसे कर्तव्य के प्रति लापरवाही और सरकारी कार्य में बाधा मानते हुए सख्त पत्र जारी किया है।

पत्र में कहा गया है कि विभागीय निर्देशों के बावजूद डाटा इंट्री में देरी गंभीर लापरवाही को दर्शाती है। सभी संबंधित प्रधानाध्यापकों को पत्र प्राप्ति के 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण देना होगा, अन्यथा वेतन कटौती और अनुशासनिक कार्रवाई के लिए जिला शिक्षा पदाधिकारी, नालंदा को सूचित किया जाएगा। इसके साथ ही स्कूलों को तत्काल डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के लिए ‘हाँ’ या ‘नहीं’ की इंट्री पूरी करने का भी आदेश दिया गया है।

जिले के विभिन्न प्रखंडों में डाटा इंट्री न करने वाले स्कूलों की स्थिति चिंताजनक है। सर्वाधिक 16 स्कूल चंडी प्रखंड के हैं। जबकि अस्थावां और नूरसराय प्रखंड के 13-13 स्कूल, परवलपुर के 12, सिलाव के 7, बिहारशरीफ और इस्लामपुर के 5-5, हिलसा के 4 तथा हरनौत, एकंगरसराय और राजगीर के 3-3 स्कूल इस सूची में शामिल हैं। बिंद प्रखंड का भी एक स्कूल इस मामले में लापरवाही बरत रहा है।

दरअसल ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर छात्रों का डाटा अपलोड करना शिक्षा विभाग की पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यह डाटा छात्रवृत्ति, डीबीटी योजनाओं, और स्कूलों को मिलने वाली सरकारी सहायता के लिए आवश्यक है। डाटा की कमी से न केवल प्रशासनिक कार्य प्रभावित होते हैं, बल्कि छात्रों को मिलने वाली सुविधाएँ भी रुक सकती हैं।

स्थानीय शिक्षक समुदाय में इस अल्टीमेटम को लेकर चर्चा तेज है। एक प्रधानाध्यापक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कई बार तकनीकी समस्याएँ और कर्मचारियों की कमी के कारण डाटा इंट्री में देरी हो जाती है। लेकिन 24 घंटे का समय बहुत कम है। वहीं शिक्षा विभाग का कहना है कि बार-बार दी गई समय-सीमा के बाद अब और ढील नहीं दी जाएगी।

जिला शिक्षा विभाग ने साफ कर दिया है कि 1 सितंबर तक स्पष्टीकरण और डाटा इंट्री पूरी न करने वाले स्कूलों के खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएँगे। यह मामला न केवल प्रशासनिक अनुशासन का है, बल्कि नालंदा की शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता और पारदर्शिता से भी जुड़ा है।

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