Home स्वास्थ्य दीदी की रसोई: सस्ता स्वादिष्ट भोजन का केंद्र बना बिहारशरीफ सदर अस्पताल

दीदी की रसोई: सस्ता स्वादिष्ट भोजन का केंद्र बना बिहारशरीफ सदर अस्पताल

Didi's Kitchen: Biharsharif Sadar Hospital becomes a center for cheap and tasty food
Didi's Kitchen: Biharsharif Sadar Hospital becomes a center for cheap and tasty food

बिहारशरीफ (दर्पण)। बिहारशरीफ सदर अस्पताल में स्थित ‘दीदी की रसोई’ तेजी से लोगों के बीच लोकप्रिय हो रही है। यह न केवल स्वादिष्ट और शुद्ध भोजन प्रदान करती है, बल्कि इसे बाजार दर से 25 से 40 प्रतिशत कम कीमत पर उपलब्ध कराती है। ‘नो प्रॉफिट नो लॉस’ के सिद्धांत पर संचालित यह रसोई मरीजों, उनके परिजनों, अस्पताल कर्मियों और डॉक्टरों के लिए एक भरोसेमंद भोजनालय बन चुकी है।

‘दीदी की रसोई’ सुबह 6:30 बजे से शाम 7:30 बजे तक सप्ताह के सभी दिनों में खुली रहती है और यहां की चहल-पहल सुबह से ही शुरू हो जाती है। यहां प्रतिदिन 80 से 120 मरीज और 50 से 80 अस्पताल के स्टाफ भोजन करते हैं। सबसे ज्यादा डिमांड 10 रुपये के कुल्हड़ चाय की होती है, जिसमें हर दिन 150 से 200 कप चाय बिकती है। जिसमें 15 से 20 लीटर दूध का उपयोग होता है।

सफाई, ताजगी और शुद्धता पर खास ध्यान देने वाली इस रसोई ने तीन वर्षों में 3 लाख रुपये मासिक कारोबार का आंकड़ा पार कर लिया है। यहां काम करने वाले 13 कर्मी, जिनमें 12 महिलाएं शामिल हैं। वे भोजन पकाने से लेकर परोसने और साफ-सफाई की जिम्मेदारी निभाते हैं।

मंगलवार और गुरुवार को छोड़कर सभी दिन यहां शाकाहारी और मांसाहारी दोनों तरह के भोजन उपलब्ध होते हैं। खासकर मछली, चिकन और अंडा चावल की मांग ज्यादा रहती है। यहां तक कि शहर के नामी होटलों से 30 से 50 प्रतिशत कम कीमत पर स्वादिष्ट भोजन मिलता है। जो न केवल मरीजों और उनके परिजनों, बल्कि डॉक्टरों और स्टाफ के बीच भी काफी पसंद किया जा रहा है।

अस्पताल प्रबंधक मिथिलेश कुमार का कहना है कि दीदी की रसोई का उद्देश्य लाभ कमाना नहीं, बल्कि लोगों को शुद्ध, ताजा और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराना है। साफ-सफाई और स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। जिससे मरीजों और उनके परिजनों को भोजन से जुड़ी चिंता नहीं करनी पड़ती।

दीदी की रसोई न केवल एक सामाजिक सेवा का उदाहरण है, बल्कि बिहारशरीफ सदर अस्पताल के माहौल में एक सकारात्मक बदलाव का प्रतीक भी बन चुकी है।

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